बी के झा
NSK

वॉशिंगटन / नई दिल्ली, 16 अक्टूबर
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और 2024 के चुनावी दावेदार डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बार उन्होंने भारत और रूस से तेल आयात को लेकर बड़ा बयान दिया, जिसमें उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “विश्वसनीय और महान नेता” बताते हुए दावा किया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा।
ट्रंप का बयान: “मोदी ने भरोसा दिलाया”व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा:मैं खुश नहीं था कि भारत रूस से तेल खरीद रहा था। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने मुझे भरोसा दिलाया है कि अब भारत ऐसा नहीं करेगा।”उन्होंने इसे मॉस्को पर दबाव बढ़ाने के अमेरिकी प्रयासों का महत्वपूर्ण कदम बताया। ट्रंप ने कहा कि यह उनके प्रयास का हिस्सा है जिसमें वे रूस को यूक्रेन युद्ध के कारण अलग-थलग करने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत को बताया विश्वसनीय साझेदार ट्रंप ने भारत और पीएम मोदी के प्रति प्रशंसा करते हुए कहा:भारत विश्वसनीय साझेदार है। मोदी मेरे मित्र हैं और हमारे बीच अच्छे संबंध हैं। हमें रूस से तेल खरीदने की स्थिति पर खुशी नहीं थी, क्योंकि इससे रूस इस निरर्थक युद्ध को जारी रख सकता है, जिसमें डेढ़ लाख लोग मारे गए हैं, ज्यादातर सैनिक।”उन्होंने यह भी कहा कि अब अमेरिका चीन से भी वही उम्मीद कर रहा है कि वह पश्चिमी प्रतिबंधों का पालन करे और रूस को आर्थिक सहायता ना दे।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर ट्रंप की रायट्रंप ने इस युद्ध को “ऐसा युद्ध जो कभी शुरू नहीं होना चाहिए था” बताया और कहा:रूस को यह युद्ध पहले हफ्ते में ही जीत लेना चाहिए था, लेकिन अब यह चौथे साल में प्रवेश कर चुका है। मैं चाहता हूं कि युद्ध जल्द समाप्त हो। इसलिए मैं खुश नहीं था कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है।”उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका पश्चिमी प्रतिबंधों की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए दबाव बढ़ा रहा है।
भारत ने साफ किया अपना रुखभारत ने पहले ही स्पष्ट किया है कि रूस से तेल खरीद उसके राष्ट्रीय ऊर्जा हितों पर आधारित है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था:हम किसी भी देश से राजनीतिक विचारों के आधार पर आयात नहीं करते। हमारे निर्णय बाजार की वास्तविकताओं और राष्ट्रीय हितों पर आधारित हैं।”भारत ने यह भी बताया कि उसका रूस से तेल आयात G7 द्वारा निर्धारित मूल्य सीमा के अनुरूप है और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हुए ही घरेलू ऊर्जा आवश्यकताएं पूरी की जा रही हैं।
वैश्विक राजनीति पर असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप का यह बयान वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत-अमेरिका संबंधों पर ध्यान खींचने वाला कदम है। अमेरिका इस समय रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए हर उपाय कर रहा है और ट्रंप का दावा इसे और सार्वजनिक रूप दे रहा है।राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं:ट्रंप हमेशा अपने बयान से सुर्खियां बनाते हैं। चाहे चुनावी रणनीति हो या अंतरराष्ट्रीय राजनीति, उनका अंदाज विवादास्पद और ध्यान खींचने वाला होता है। यह बयान भारत के लिए नई चुनौतियां नहीं बल्कि अमेरिका के नजरिए को उजागर करता है।”
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान दर्शाता है कि वैश्विक ऊर्जा राजनीति और भारत-रूस-अमेरिका संबंध लगातार जटिल हो रहे हैं। जबकि भारत अपनी राष्ट्रीय ऊर्जा जरूरतों और बाज़ार आधारित निर्णयों पर कायम है, ट्रंप ने इसे “वैश्विक दबाव और मोदी के नेतृत्व की सफलता” के रूप में पेश किया।
अब यह देखना होगा कि भारत-यूएस संबंध और ऊर्जा नीति पर यह बयान कितनी राजनीतिक हलचल लाता है, और पश्चिमी प्रतिबंधों के प्रभाव को लेकर आगे क्या रणनीति अपनाई जाती है।
