बी के झा
NSK

बार्सिलोना / नई दिल्ली, 12 अक्टूबर
दक्षिणी स्पेन के पहाड़ी इलाकों में वैज्ञानिकों को एक ऐसी खोज मिली है जिसने इतिहास, पुरातत्व और पर्यावरण विज्ञान — तीनों क्षेत्रों को एक साथ जोड़ दिया है। यहाँ 650 साल पुराने दाढ़ी वाले गिद्धों (Bearded Vultures या Gypaetus barbatus) के घोंसलों से ऐसे खजाने मिले हैं, जो मानो समय की गहराइयों में छिपे हुए किसी “टाइम कैप्सूल” से बाहर आए हों।
बार्सिलोना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एंटोनी मार्गलिडा के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम ने जब 12 पुराने घोंसलों की खुदाई की, तो उन्हें इंसानों द्वारा बनाई गई 225 से अधिक वस्तुएँ और हजारों जानवरों की हड्डियाँ मिलीं। इनमें 13वीं सदी की एक चप्पल, 18वीं सदी की टोकरियाँ, रस्सियाँ और घास के बुनाई के सामान शामिल हैं।कैसे हुई यह खोज?यह अध्ययन वर्ष 2008 से 2014 के बीच किया गया। टीम ने पुराने ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन किया और स्थानीय बुज़ुर्गों से बातचीत कर लगभग 50 संभावित गिद्ध घोंसलों की जगहें पहचानीं। इनमें से 12 घोंसलों की वैज्ञानिक तरीके से परत-दर-परत खुदाई की गई।
जांच में सामने आया कि ये गिद्ध , जो हड्डियाँ खाने वाले शिकारी पक्षी होते हैं —
अनजाने में इंसानों की छोड़ी गई चीजों को अपने घोंसलों में ले जाते थे। इस तरह वे सदियों तक इन वस्तुओं को प्राकृतिक रूप से सुरक्षित रखते रहे।घोंसलों के अंदर क्या मिला?सबसे बड़ी खोज रही एक पूरी तरह सुरक्षित 674 साल पुरानी चप्पल, जो एस्पार्टो घास की रस्सियों से बनी थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के जूते जिन्हें ‘अगोबिया’ कहा जाता था, मध्यकालीन भूमध्यसागरीय कारीगरी की पहचान माने जाते थे।इसके अलावा,18वीं शताब्दी की टोकरी का एक टुकड़ा,कपड़े और चमड़े के छोटे टुकड़े,जानवरों की हड्डियाँ,और लकड़ी के औजारों के अवशेष भी मिले।यह सब कुछ यह दर्शाता है कि ये पक्षी अलग-अलग समय की चीजें उठाकर अपने घोंसलों में जमा करते थे, जिससे वे प्राकृतिक “पुरातात्विक संग्रहालय” बन गए।घोंसलों की संरचना ने बचाई सदियों तक चीजेंइन गिद्धों ने अपने घोंसले चट्टानों की गुफाओं और चट्टानी किनारों पर बनाए थे, जहाँ तापमान स्थिर रहता था और नमी बहुत कम थी। इसी वजह से घास, चमड़ा और हड्डियों जैसी नाजुक चीजें भी सड़ने से बच गईं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यही प्राकृतिक स्थिति इन घोंसलों को “टाइम कैप्सूल” में बदलने की सबसे बड़ी वजह रही।
वैज्ञानिकों के लिए क्या मायने रखती है यह खोज?यह अध्ययन न केवल पक्षियों की पारिस्थितिकी पर नई रोशनी डालता है, बल्कि यह दिखाता है कि प्रकृति खुद भी मानव इतिहास को संरक्षित कर सकती है।
प्रोफेसर मार्गलिडा के अनुसार
इन गिद्धों ने अनजाने में इतिहास को बचाकर रखा। उनके घोंसले हमारे लिए एक टाइम मशीन की तरह हैं, जो हमें सैकड़ों साल पीछे ले जाते हैं।”इस खोज ने पुरातत्वविदों, पर्यावरण वैज्ञानिकों और इतिहासकारों को एक साथ काम करने का नया रास्ता दिखाया है।संकट में हैं ‘दाढ़ी वाले गिद्ध’कभी यूरोप के पहाड़ी इलाकों में बड़ी संख्या में पाए जाने वाले ये गिद्ध अब गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति माने जाते हैं।रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज यूरोप में इनके सिर्फ 309 प्रजनन जोड़े ही बचे हैं।वैज्ञानिक उम्मीद कर रहे हैं कि इस तरह की खोज से इन दुर्लभ पक्षियों के संरक्षण और पारिस्थितिक महत्व पर दुनिया का ध्यान जाएगा।
निष्कर्ष
स्पेन के इन प्राचीन घोंसलों ने साबित कर दिया कि प्रकृति सिर्फ जीवन नहीं पालती, बल्कि इतिहास को भी सहेजकर रखती है।650 साल पुरानी यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि हर जीव,
