अदालत में कम बोलना चाहिए” — पूर्व जज काटजू ने CJI बी.आर. गवई को बताया ‘जूता कांड’ का जिम्मेदार

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर

सुप्रीम कोर्ट में हुए ‘जूता कांड’ पर अब देश के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू का बयान सामने आया है। काटजू ने इस चौंकाने वाली घटना की निंदा तो की है, लेकिन साथ ही उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई को ही अप्रत्यक्ष रूप से इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों को अदालत में कम बोलना चाहिए, प्रवचन या व्याख्यान नहीं देना चाहिए।काटजू का बयान: “घटना की जड़ में न्यायाधीश की टिप्पणी”पूर्व न्यायमूर्ति काटजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा—मैं सीजेआई पर जूता फेंके जाने की घटना की निंदा करता हूं। लेकिन उन्होंने खुद इस घटना को न्योता दिया था। खजुराहो में भगवान विष्णु की मूर्ति से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा था — ‘आप कहते हैं कि आप विष्णु के बड़े भक्त हैं, तो जाइए और देवता से कहिए कि वे खुद कुछ करें, जाकर प्रार्थना कीजिए।’”काटजू ने आगे लिखा—ऐसी टिप्पणियों की कोई जरूरत नहीं थी। ये अनुचित और गैरजरूरी थीं। इनका केस के कानूनी मुद्दों से कोई संबंध नहीं था। जजों को कोर्ट में सीमित रहना चाहिए, न्याय देना चाहिए, उपदेश नहीं।”वकील राकेश किशोर बोले — “सीजेआई ने मजाक उड़ाया”घटना में शामिल 72 वर्षीय वकील राकेश किशोर ने भी खुलकर अपनी नाराज़गी जताई। उन्होंने मंगलवार को कहा—मैं बहुत आहत था। 16 सितंबर को किसी व्यक्ति ने जनहित याचिका दायर की थी। उस पर सुनवाई के दौरान गवई साहब ने उसका मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि ‘आप मूर्ति से जाकर प्रार्थना करें कि वह खुद अपना सिर दोबारा बना ले।’”किशोर ने आगे कहा—अगर याचिका को खारिज करना था तो कीजिए, लेकिन इस तरह किसी की आस्था का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए। उन्होंने उस व्यक्ति से कहा कि जाकर मूर्ति के सामने ध्यान लगाओ। यह मेरे लिए अन्याय था।”किशोर का दावा है कि इसी टिप्पणी से वे मानसिक रूप से बेहद आहत हुए और इसी के चलते उन्होंने आवेश में आकर सोमवार को अदालत में जूता फेंकने की कोशिश की।अदालत में ‘जूता कांड’: पूरे देश को झकझोर देने वाली घटनाइस हंगामे के बाद अदालत कक्ष में अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत राकेश किशोर को हिरासत में ले लिया।सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने उनके सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी, जबकि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI)** ने उनका लाइसेंस निलंबित** कर दिया।सीजेआई बी.आर. गवई ने बाद में इस घटना पर कहा था —जो हुआ, उससे मैं और मेरे साथी न्यायाधीश बेहद स्तब्ध हैं। हमारे लिए यह एक भुला दिया गया अध्याय है।” FIR दर्ज, जांच शुरूघटना को लेकर अब बेंगलुरु पुलिस ने भी कार्रवाई की है।अखिल भारतीय अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष भक्तवचला की शिकायत पर राकेश किशोर के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा132 — लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग133 — किसी व्यक्ति का अपमान करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग (गंभीर उकसावे के अलावा)के तहत मामला दर्ज किया गया है।न्यायपालिका में संवाद की मर्यादा पर बहसइस पूरे विवाद के बाद अब न्यायपालिका की संवाद मर्यादा और जजों के सार्वजनिक वक्तव्यों पर नई बहस छिड़ गई है।कई वरिष्ठ वकीलों का मानना है कि अदालतें आस्था या व्यक्तिगत विचारों पर टिप्पणी करने से बचें, जबकि आलोचक यह भी कह रहे हैं कि कानूनी असहमति का जवाब हिंसा से नहीं दिया जा सकता।न्याय के मंदिर में अनुशासन का सवालयह घटना केवल एक अदालत कक्ष की नहीं, बल्कि उस मर्यादा की परीक्षा है जो न्यायिक प्रणाली की आत्मा है।अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक समीक्षा और इस विवाद पर न्यायपालिका की आगे की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

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