बी के झा
NSK

नई दिल्ली/मॉस्को, 5 जुन
वैश्विक भू-राजनीति के बदलते समीकरणों के बीच रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने भारत को लेकर एक महत्वपूर्ण और व्यापक संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत एक मजबूत, स्वतंत्र और आत्मनिर्भर राष्ट्र है, जो अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेता है। पुतिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की रणनीतिक भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है और दुनिया की बड़ी शक्तियां नई साझेदारियों की तलाश में जुटी हैं।
रूसी राष्ट्रपति ने भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों, तेज आर्थिक विकास और स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा कि भारत आज विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है तथा आने वाले वर्षों में उसकी वैश्विक भूमिका और भी प्रभावशाली होने वाली है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार जल्द ही 100 अरब अमेरिकी डॉलर के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच सकता है।
भारत को बताया रूस का भरोसेमंद मित्र
अपने संबोधन में पुतिन ने कहा कि रूस भारत को केवल एक व्यापारिक साझेदार के रूप में नहीं, बल्कि एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक मित्र के रूप में देखता है। उन्होंने दोनों देशों के दशकों पुराने संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत और रूस के बीच विश्वास की नींव लगातार मजबूत हुई है।रूसी राष्ट्रपति के अनुसार, ऊर्जा, रक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और व्यापार जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में यह साझेदारी और व्यापक स्वरूप ग्रहण करेगी।
अमेरिका पर अप्रत्यक्ष प्रहार, भारत की स्वतंत्र नीति की सराहना
पुतिन ने अपने वक्तव्य में अमेरिका का नाम लेते हुए कहा कि कई मुद्दों पर, विशेष रूप से रूस के साथ सहयोग को लेकर, भारत पर दबाव बनाने के प्रयास किए जाते रहे हैं। हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि भारत अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए ऐसे दबावों का मजबूती से सामना करेगा।उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्वतंत्र सोच और संतुलित विदेश नीति है। यही कारण है कि भारत दुनिया के विभिन्न देशों के साथ अपने संबंधों को अपने हितों के अनुरूप आगे बढ़ाता है।
पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के अन्य देशों के साथ बढ़ते संबंधों को रूस किसी प्रतिस्पर्धा या नकारात्मक दृष्टिकोण से नहीं देखता। उनके अनुसार, वैश्विक सहयोग का आधार परस्पर सम्मान और राष्ट्रीय हितों की समझ होना चाहिए।
लोकतंत्र और विकास मॉडल की भी की प्रशंसा
रूसी राष्ट्रपति ने भारत को “महान राष्ट्र” और “मजबूत लोकतंत्र” बताते हुए कहा कि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था ने दुनिया के सामने एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय में भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे गतिशील केंद्रों में से एक बन चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन का यह बयान केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में भारत की बढ़ती अहमियत की स्वीकारोक्ति भी है। आज भारत न केवल एशिया बल्कि विश्व राजनीति का एक निर्णायक केंद्र बनकर उभरा है।
सितंबर में भारत आएंगे पुतिन, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर दुनिया की नजर
रूस के राष्ट्रपति सितंबर में भारत की यात्रा पर आने वाले हैं, जहां वे BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले इस सम्मेलन की मेजबानी भारत करेगा।ब्रिक्स समूह, जो कभी पांच देशों—Brazil, Russia, India, China और South Africa—तक सीमित था, अब विस्तार के बाद एक बड़े वैश्विक मंच का स्वरूप ले चुका है। इसमें Egypt, Ethiopia, Iran, United Arab Emirates और Indonesia जैसे देश भी शामिल हो चुके हैं।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का संकेत
पुतिन का बयान ऐसे समय आया है जब भारत एक साथ अमेरिका, रूस, यूरोप, पश्चिम एशिया और इंडो-पैसिफिक देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित ढंग से आगे बढ़ा रहा है। रूस के राष्ट्रपति की टिप्पणियों को भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता के रूप में देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति पुतिन के शब्दों में भारत केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि ऐसा लोकतांत्रिक शक्ति केंद्र है जो अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता रखता है। अमेरिका सहित किसी भी बाहरी दबाव के बीच भारत का राष्ट्रहित सर्वोपरि रहेगा—
रूस की ओर से आया यह संदेश आने वाले समय में वैश्विक कूटनीति की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण संकेतों में से एक माना जा रहा है।
