बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 20 नवंबर
दिल्ली कार ब्लास्ट की तहकीकात जैसे-जैसे परतें खोल रही है, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक ऐसा नाम फिर से उभर आया है जिसे बीते 16 वर्षों से देश की सबसे बड़ी आतंकी खोज में ‘मोस्ट वॉन्टेड’ माना जाता है—मिर्जा शादाब बेग।चौंकाने वाली बात यह कि बेग भी हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी का ही छात्र रहा है—
वही संस्थान, जिसके हालिया ब्लास्ट आरोपियों के भी कनेक्शन सामने आए हैं।कौन है मिर्जा शादाब बेग? आजमगढ़ का ‘स्लीपर से मास्टरमाइंड’ बनने का सफर उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के लालगंज तहसील के बरैदी गांव में पैदा हुआ बेग साधारण पृष्ठभूमि से आया था। स्कूल शिक्षा के दौरान उसका प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा—
वह कक्षा 9 में फेल तक हुआ था। बाद में किसी तरह आज़मगढ़ रेलवे स्टेशन के पास स्थित चिल्ड्रन स्कूल से 12वीं पूरी की।इसके बाद उसकी ज़िंदगी ने एक अप्रत्याशित मोड़ लिया—
बेग ने अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज (अब अल-फलाह यूनिवर्सिटी) से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इंस्ट्रूमेंटेशन में B.Tech. किया और वर्ष 2007 में ग्रेजुएट बनकर निकला।यही वह दौर था जब उसने कट्टरपंथी संपर्कों की ओर कदम बढ़ाए और कुछ ही वर्षों में इंडियन मुजाहिदीन (IM) के सबसे आक्रामक चेहरों में शुमार हो गया।
IM का आजमगढ़ मॉड्यूल: बेग तेजी से रियाज और यासीन भटकल का भरोसेमंद बना टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मिर्जा शादाब बेग IM के आजमगढ़ मॉड्यूल का शीर्ष संचालक था।उसके पाकिस्तान में IM के संस्थापकों रियाज और यासीन भटकल के साथ रहने की आशंका है।
सूत्र बताते हैं कि फरारी के शुरुआती वर्षों में वह सऊदी अरब में भी सक्रिय रहा।उसने 2008 में अपने चचेरे भाई साकिब निसार समेत कई युवाओं को संगठन में शामिल किया।बेग ने आजमगढ़ के अतीफ अमीन समूह और दिल्ली के कट्टरपंथी छात्रों के समूह को जोड़कर एक बड़ा स्लीपर नेटवर्क तैयार किया था। यही नेटवर्क आगे चलकर 2008 के देशव्यापी धमाकों के लिए ज़िम्मेदार माना गया।
दिल्ली और अहमदाबाद धमाकों में सीधी भूमिका, इंडिया गेट पर विस्फोटक लगाने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार:बेग दिल्ली में कई महत्वपूर्ण लोकेशन्स की रीकी टीम में शामिल था।इंडिया गेट पर लगाए गए विस्फोटक में उसकी सीधी संलिप्तता पाई गई।जाकिर नगर में रहते हुए वह IM सदस्यों को ठिकाना, साहित्य और फंडिंग उपलब्ध कराता था।बटला हाउस एनकाउंटर (2008) के बाद छापेमारी में उसके किराए के कमरे से उसका ID कार्ड मिला था।उस ऑपरेशन में चार आतंकी पकड़े गए, लेकिन बेग और उसका साथी मोहम्मद खालिद आज भी फरार हैं।जयपुर और पुणे धमाकों में भी लिंक—
कर्नाटक में छिपकर किया था विस्फोटक का इंतजाम जांच में यह भी सामने आया कि 2008 में बेग:कर्नाटक के उडुपी गया थावहीं से जयपुर धमाकों के लिए डिटोनेटर्स, विस्फोटक सामग्री और बॉल बेयरिंग्स की सप्लाई की जर्मन बेकरी ब्लास्ट (पुणे) में भी उसकी भूमिका पर एजेंसियां लंबे समय से नज़र रख रही हैं
2008 के सिलसिलेवार धमाकों की खौफनाक तस्वीरधमाका मौतें घायलअहमदाबाद (2008) 56 246दिल्ली – 13 सितंबर 2008 20 100+दिल्ली–अहमदाबाद से बरामद इलेक्ट्रॉनिक सामग्री, मोबाइल इंटरसेप्ट और विस्फोटकों पर मिले निशान—हर जगह बेग की गतिविधियों की कड़ी मिलती रही है।अब फिर क्यों आया बेग का नाम?
दिल्ली कार ब्लास्ट ने उठाए सवाल
हालिया दिल्ली ब्लास्ट में नए इनपुट मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि:क्या IM का पुराना नेटवर्क दोबारा सक्रिय हो रहा है?
क्या मिर्जा शादाब बेग किसी नए मॉड्यूल को रिमोट ली ऑपरेट कर रहा है?
क्या हालिया ब्लास्ट महज़ एक शुरुआत है या किसी व्यापक आतंकी योजना का हिस्सा?
अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर सवालों की नई आंधी
इसी बीच अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर आतंकी संगठनों से संभावित कनेक्शन को लेकर सवाल और तेज हो गए हैं। कारण:दिल्ली ब्लास्ट के आरोपी डॉ. उमर नबी, डॉ. मुजम्मिल गनाई,
डॉ. शाहीन शाहिद—तीनों इसी यूनिवर्सिटी से MBBS कर चुके हैं।ब्लास्ट से 10 दिन पहले उमर नबी ने नूह (मेवात) के हिदायत कॉलोनी में किराए पर कमरा लिया था।यह किराया यूनिवर्सिटी से जुड़े एक इलेक्ट्रीशियन शोएब ने दिलाया था।इन कड़ियों ने जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है।क्या 16 साल बाद फिर सक्रिय हुआ 2008 का ‘शैडो नेटवर्क’?मिर्जा शादाब बेग का नाम दोबारा चर्चा में आने का मतलब केवल एक फरार आतंकी की तलाश नहीं है।यह संकेत है कि:पुराना मॉड्यूल आज भी कहीं न कहीं ज़िंदा हो सकता है
सोशल नेटवर्क, शिक्षा संस्थानों और विदेशी पनाहगाहों के जरिए आतंकी संगठन अपनी जड़ें फैलाने की कोशिश कर रहे हैं हालिया ब्लास्ट किसी बड़े खतरे की शुरुआती हलचल हो सकता है सुरक्षा एजेंसियां अब देशव्यापी पुख्ता कार्रवाई की तैयारी में जुटी हैं।
