बी के झा
NSK

दरभंगा/ पटना, 8 मार्च
बिहार के दरभंगा जिले में ग्रामीण महिलाओं की मेहनत और आत्मविश्वास ने विकास की एक नई कहानी लिखी है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं—जिन्हें स्थानीय स्तर पर ‘जीविका दीदी’ कहा जाता है—अब केवल घर तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे अपने कौशल और उद्यमिता के दम पर आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं।Bihar Rural Livelihoods Promotion Society (JEEViKA) से जुड़ी इन महिलाओं ने सब्जी खेती, बकरी पालन, सिलाई-कढ़ाई, किराना दुकान, पापड़-मसाला निर्माण और मिथिला पेंटिंग जैसे छोटे-छोटे व्यवसायों के जरिए आय के नए स्रोत बनाए हैं। जिले में अब तक करीब एक लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, यानी उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे अधिक हो चुकी है।यह बदलाव न केवल महिलाओं के जीवन में बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना में भी सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है।
स्वरोजगार से बदलती ग्रामीण तस्वीर
दरभंगा के कई गांवों में आज महिलाएं छोटे-छोटे उद्यम चला रही हैं।इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:सब्जी की उन्नत खेती-बारी और डेयरी पालन सिलाई-कढ़ाई व परिधान निर्माण मिथिला पेंटिंग और हस्तशिल्प किराना और घरेलू उत्पादों का व्यापार पापड़, मसाला और अगरबत्ती निर्माण इन गतिविधियों से महिलाएं न केवल अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में इस पहल से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं और पलायन में भी कमी देखने को मिली है।
मिथिला पेंटिंग से वैश्विक पहचान
दरभंगा के बहादुरपुर प्रखंड की पूनम कुमारी इस परिवर्तन की एक प्रेरक मिसाल हैं।वे एक स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मिथिला पेंटिंग को व्यावसायिक रूप दे चुकी हैं।आज उनके साथ लगभग एक दर्जन महिलाएं काम कर रही हैं और उनके बनाए उत्पादों की मांग देश से लेकर विदेश तक पहुंच चुकी है।पूनम कुमारी मजदूरी देने के बाद भी हर महीने करीब 20 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं।
बैंकिंग सेवा से भी रोजगार
हनुमाननगर प्रखंड की अंजलि देवी ने ग्रामीण क्षेत्र में बैंकिंग सुविधा को आसान बनाने का काम किया है।वे Central Bank of India का ग्राहक सेवा केंद्र संचालित करती हैं।इस केंद्र के माध्यम से ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें 20 से 25 हजार रुपये मासिक आय भी हो रही है।
अस्पताल की रसोई से आत्मनिर्भरता
दरभंगा के Darbhanga Medical College and Hospital में संचालित जीविका रसोई भी महिलाओं के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।यहां कार्यरत दर्जनों महिलाएं करीब 15 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रही हैं और अपने परिवार के आर्थिक सहयोग में अहम भूमिका निभा रही हैं।
सिलाई प्रशिक्षण से नई राह
बेनीपुर प्रखंड की फूल देवी ने Mukhyamantri Mahila Udyamita Yojana के तहत सिलाई प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया है।इस केंद्र से जुड़ी महिलाएं सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण लेकर 20 हजार रुपये तक की मासिक आय अर्जित कर रही हैं।
प्रशासन का क्या कहना है
जिले की जीविका परियोजना की डीपीएम डॉ. ऋचा गार्गी के अनुसार,“लखपति दीदी पहल का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। दरभंगा में यह पहल तेजी से सफल हो रही है।”
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ना सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण संकेत है।विशेषज्ञों के अनुसार जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं तो इसका असर पूरे परिवार की शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिति पर सकारात्मक पड़ता है।
शिक्षाविदों का दृष्टिकोण
शिक्षाविदों का कहना है कि स्वयं सहायता समूह आधारित मॉडल ग्रामीण विकास की प्रभावी रणनीति बनता जा रहा है।उनके अनुसार:इससे महिलाओं में नेतृत्व क्षमता बढ़ती है स्थानीय स्तर पर उद्यमिता विकसित होती है ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती हैं
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
हालांकि विपक्षी दलों ने इस पहल की सराहना करते हुए यह भी कहा है कि सरकार को इन योजनाओं को और व्यापक स्तर पर लागू करने की जरूरत है।विपक्षी नेताओं का कहना है कि:प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत हो बैंकिंग ऋण की प्रक्रिया सरल हो उत्पादों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार विकसित किया जाए ताकि महिलाओं की आय और अधिक बढ़ सके।
निष्कर्ष
दरभंगा की ‘लखपति दीदियों’ की कहानी केवल आर्थिक सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत में बदलती सामाजिक चेतना और महिला सशक्तिकरण की मिसाल है।स्वरोजगार, कौशल और सामूहिक प्रयासों के बल पर इन महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि अगर अवसर और समर्थन मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी विकास की धुरी बन सकती हैं।आज दरभंगा के गांवों में लिखी जा रही यह कहानी आने वाले समय में बिहार के ग्रामीण विकास मॉडल का प्रेरक उदाहरण बन सकती है।
