बी के झा
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रियाद / नई दिल्ली, 7 मार्च
मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक गतिविधि ने अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir हाल ही में सऊदी अरब पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात सऊदी रक्षा मंत्री Khalid bin Salman Al Saud से हुई।यह बैठक ऐसे समय हुई है जब Saudi Arabia और Iran के बीच तनाव चरम पर है और क्षेत्र में लगातार ड्रोन तथा मिसाइल हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। इस मुलाकात ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पाकिस्तान आने वाले समय में सऊदी अरब की सुरक्षा रणनीति में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकता है।
रियाद में रणनीतिक बातचीत
सऊदी रक्षा मंत्री Khalid bin Salman Al Saud ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir से मुलाकात की, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और ईरान से जुड़े हमलों पर चर्चा हुई।उन्होंने लिखा कि यह चर्चा दोनों देशों के बीच मौजूद संयुक्त सामरिक रक्षा समझौते के तहत हुई। बैठक में इस बात पर भी चिंता जताई गई कि हालिया सैन्य गतिविधियां पूरे क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।
क्या पाकिस्तान को युद्ध में उतरने का दबाव?
अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब अब ईरानी खतरों का सामना अकेले करने के बजाय अपने करीबी सैन्य सहयोगियों की भूमिका बढ़ाना चाहता है।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सऊदी अरब और Pakistan के बीच दशकों पुराना रक्षा सहयोग है। कई बार पाकिस्तान ने सऊदी अरब में सैनिक तैनात किए हैं और सऊदी सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी भाग लिया है।एक रक्षा विशेषज्ञ का कहना है कि आर्थिक रूप से संकट झेल रहे पाकिस्तान के लिए सऊदी अरब एक महत्वपूर्ण सहयोगी है, जो तेल आपूर्ति, वित्तीय सहायता और निवेश के जरिए उसकी मदद करता रहा है। ऐसे में यदि सऊदी अरब सुरक्षा सहयोग की मांग करता है तो पाकिस्तान के लिए पूरी तरह तटस्थ रहना आसान नहीं होगा।
ईरान से जुड़े हमलों ने बढ़ाया तनाव
सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता Turki Al-Maliki के अनुसार सऊदी वायु रक्षा प्रणाली ने हाल ही में शायबह ऑयल फील्ड की ओर बढ़ रहे 16 ड्रोन को चार अलग-अलग चरणों में मार गिराया।ये ड्रोन रूब अल-खाली क्षेत्र के ऊपर से आ रहे थे और पूरी तरह नष्ट कर दिए गए। इसके अलावा Prince Sultan Air Base के पास एक बैलिस्टिक मिसाइल और एक क्रूज मिसाइल को भी इंटरसेप्ट किया गया।यह एयर बेस Riyadh से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित एक महत्वपूर्ण सैन्य और औद्योगिक क्षेत्र है।
तेल ठिकानों पर खतरा
शायबह ऑयल फील्ड सऊदी अरब के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस लिक्विड और तेल का उत्पादन होता है।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन ऊर्जा ठिकानों पर हमला सफल हो जाता है तो इसका असर केवल सऊदी अरब ही नहीं बल्कि वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है।
यूएई भी अलर्ट मोड में
क्षेत्रीय तनाव के बीच United Arab Emirates ने भी अपने वायु रक्षा तंत्र को सक्रिय कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार पिछले 24 घंटों में यूएई ने 125 से अधिक ड्रोन और 6 बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट किया है।बताया जा रहा है कि यह हमले Iran के खिलाफ अमेरिका और Israel के हालिया हवाई हमलों के जवाब के रूप में किए जा रहे हैं।
इस्लामी संगठनों की प्रतिक्रिया
क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर Organisation of Islamic Cooperation और Arab League ने चिंता व्यक्त की है।इन संगठनों ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने की अपील की है।कुछ इस्लामी विद्वानों और मौलानाओं ने भी कहा है कि मुस्लिम देशों के बीच सैन्य टकराव पूरे इस्लामी जगत के लिए नुकसानदेह होगा और इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ेगी।
रक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान-सऊदी तनाव और बढ़ता है तो यह केवल क्षेत्रीय संघर्ष तक सीमित नहीं रहेगा।मध्य-पूर्व के एक रणनीतिक अध्ययन केंद्र से जुड़े एक विशेषज्ञ के अनुसार यदि पाकिस्तान सीधे तौर पर सऊदी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल होता है तो इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और जटिल हो सकता है।
क्या मध्य-पूर्व में नया सैन्य गठबंधन बन रहा है?
कई अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान घटनाक्रम मध्य-पूर्व में एक नए सुरक्षा गठबंधन की शुरुआत का संकेत हो सकता है।सऊदी अरब, यूएई और अन्य सहयोगी देश ईरानी प्रभाव को संतुलित करने के लिए सामूहिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं।
बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या Pakistan केवल कूटनीतिक समर्थन तक सीमित रहेगा या भविष्य में Saudi Arabia की सैन्य रणनीति में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएगा।
फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और पूरी दुनिया की नजर इस क्षेत्र की गतिविधियों पर टिकी हुई है।
