बी के झा
NSK


पटना/ न ई दिल्ली, 18 मई
बिहार की राजनीति और अर्थव्यवस्था में सोमवार को दो ऐसी बड़ी तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने विकास और जनजीवन के बीच खड़े विरोधाभास को एक बार फिर उजागर कर दिया। एक ओर देश के बड़े उद्योगपति Gautam Adani ने बिहार में 50 से 60 हजार करोड़ रुपये तक के विशाल निवेश का ऐलान कर राज्य को औद्योगिक और स्वास्थ्य क्रांति का सपना दिखाया, तो दूसरी ओर देश में तेजी से बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की चिंता और गहरा दी है।
राजनीतिक गलियारों में अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या बड़े निवेश और मेगा प्रोजेक्ट्स वास्तव में आम जनता की जिंदगी बदल पाएंगे, या फिर महंगाई की आग में विकास के दावे फीके पड़ जाएंगे।
बिहार में अडानी का मेगा प्लान, निवेश से बदल सकती है तस्वीर
सारण जिले के मस्तीचक में आयोजित कार्यक्रम में Adani Group के चेयरमैन गौतम अडानी ने बिहार के लिए बड़े निवेश की घोषणा करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में समूह गैस, बिजली, सीमेंट, स्मार्ट मीटर और स्वास्थ्य क्षेत्र में भारी पूंजी लगाएगा।उन्होंने कहा कि बिहार अब केवल राजनीतिक विमर्श का केंद्र नहीं, बल्कि औद्योगिक संभावना का बड़ा हब बनकर उभर रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘रोशनी का मिशन’कार्यक्रम के दौरान Adani Foundation और Akhand Jyoti Eye Hospital के बीच साझेदारी का ऐलान किया गया। इसके तहत ग्रामीण और गरीब मरीजों को बेहतर नेत्र चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए करीब 150 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी।अडानी सेंटर फॉर आई और ऑप्थैल्मिक मेडिसिन ट्रेनिंग सेंटर जैसे संस्थान स्थापित किए जाएंगे।
दावा किया गया कि हर साल लगभग 3.3 लाख आंखों की सर्जरी और एक हजार स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।10 नई एंबुलेंस को भी रवाना किया गया, ताकि दूरदराज गांवों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंच सकें।
पीरपैंती से बदलेगी ऊर्जा की तस्वीर
अडानी समूह पहले ही बिहार में करीब 40 हजार करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता कर चुका है। इनमें सबसे चर्चित परियोजना भागलपुर के पीरपैंती में बनने वाला 2400 मेगावाट का अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट है।करीब 27 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना बिहार के निजी क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा निवेश मानी जा रही है।इसके अलावा गया और नालंदा में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, उत्तर बिहार में 30 लाख स्मार्ट मीटर और नवादा-मुजफ्फरपुर में सीमेंट यूनिट विस्तार की योजनाएं भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
लेकिन दूसरी तस्वीर डराने वाली… महंगाई ने बढ़ाई चिंता
जहां बिहार में निवेश की घोषणाओं से विकास की उम्मीदें जगी हैं, वहीं दूसरी तरफ देशभर में बढ़ती महंगाई ने लोगों की जेब पर दबाव बढ़ा दिया है।रिपोर्टों के अनुसार अप्रैल 2026 में थोक महंगाई दर (WPI) बढ़कर 8.3 प्रतिशत पहुंच गई, जो पिछले साढ़े तीन वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है।पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, अमेरिका-ईरान टकराव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है।
पेट्रोल-डीजल के बाद अब रोजमर्रा की चीजें भी महंगी होने के संकेत
Bank of Baroda की रिपोर्ट के अनुसार अगर वैश्विक तनाव लंबे समय तक बना रहा, तो पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस और परिवहन लागत में लगातार बढ़ोतरी हो सकती है।इसका असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सब्जियां, दूध, दवा, कपड़े और निर्माण सामग्री तक महंगी हो सकती हैं।अप्रैल में फ्यूल और पावर कैटेगरी में महंगाई दर 24.7 प्रतिशत तक पहुंच गई। एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में 100 प्रतिशत से अधिक उछाल दर्ज किया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय : ‘विकास बनाम महंगाई’ बनेगा बड़ा मुद्दा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में अडानी समूह का निवेश आगामी चुनावों से पहले सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है।विश्लेषकों के अनुसार सत्ता पक्ष इसे “नए बिहार” और “औद्योगिक क्रांति” के रूप में पेश करेगा, जबकि विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी और निजी कंपनियों को बढ़ते सरकारी संरक्षण को मुद्दा बना सकता है।कई शिक्षाविदों का मानना है कि केवल बड़े निवेश की घोषणाएं पर्याप्त नहीं होतीं। असली चुनौती यह है कि इन परियोजनाओं से स्थानीय युवाओं को कितना रोजगार मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कितना लाभ पहुंचेगा।
कानूनविदों ने उठाए पारदर्शिता और पर्यावरण के सवाल
कुछ कानून विशेषज्ञों ने इतने बड़े औद्योगिक निवेश के साथ पर्यावरणीय मंजूरी, भूमि अधिग्रहण और स्थानीय हितों की सुरक्षा जैसे मुद्दों को भी महत्वपूर्ण बताया है।उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता और सामाजिक संतुलन बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
विपक्षी दलों ने इस निवेश घोषणा को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ नेताओं ने कहा कि बिहार में निवेश स्वागतयोग्य है, लेकिन सरकार को यह भी बताना चाहिए कि राज्य में पहले से मौजूद बेरोजगारी और महंगाई से जनता को कब राहत मिलेगी।विपक्ष का आरोप है कि बड़े उद्योगपतियों के निवेश के प्रचार के बीच आम आदमी की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
आम जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल
बिहार में निवेश की यह सुनहरी तस्वीर निश्चित रूप से विकास की उम्मीद जगाती है, लेकिन दूसरी ओर महंगाई की कड़वी सच्चाई लोगों को परेशान कर रही है।एक तरफ उद्योग, बिजली, गैस और अस्पतालों का विस्तार हो रहा है, तो दूसरी तरफ रसोई का बजट बिगड़ता जा रहा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या आने वाले वर्षों में यह निवेश वास्तव में बिहार की जनता की जिंदगी में खुशहाली और रोजगार लाएगा, या फिर बढ़ती महंगाई विकास की चमक को फीका कर देगी।
