बी के झा
NSK


नई दिल्ली/ कोलकाता, 21 मई
भारत इस समय दो मोर्चों पर एक साथ निर्णायक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ पश्चिम एशिया में युद्ध की आग और होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते खतरे के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा बचाने के लिए बड़ा समुद्री दांव खेलने जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में Suvendu Adhikari के नेतृत्व वाली नई सरकार ने महज कुछ दिनों में ऐसे फैसले लिए हैं, जिन्होंने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह नई दिशा दे दी है।एक कहानी भारत की आर्थिक और सामरिक मजबूरी की है, जबकि दूसरी कहानी वैचारिक और राजनीतिक पुनर्संरचना की। लेकिन दोनों घटनाओं का साझा संदेश एक ही है—भारत अब “रिएक्टिव” नहीं, बल्कि “आक्रामक रणनीतिक” दौर में प्रवेश कर चुका है।
होर्मुज की आग में भारत का तेल मिशन
ईरान युद्ध के बाद पहली बार भारत फिर से होर्मुज जलमार्ग से तेल लाने की तैयारी कर रहा है। यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। लेकिन युद्ध और हमलों के खतरे के कारण यह मार्ग लंबे समय से अत्यधिक जोखिम वाला क्षेत्र बन चुका है।अब भारत सरकार और सरकारी स्वामित्व वाली Shipping Corporation of India इस खतरनाक रास्ते से अपने समुद्री पोत भेजने की तैयारी में हैं। सूत्रों के मुताबिक योजना अंतिम चरण में है और भारतीय नौसेना की सुरक्षा मंजूरी मिलते ही मिशन शुरू हो सकता है।
क्यों मजबूर हुआ भारत?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। रूस से सस्ता तेल खरीदने के बावजूद भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा अब भी मध्य पूर्व पर निर्भर है।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत मध्य पूर्व से दूरी बनाता है, तो उसे अफ्रीका या लैटिन अमेरिका जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से तेल खरीदना पड़ेगा, जिससे लागत और परिवहन समय दोनों बढ़ जाएंगे।
यानी भारत के सामने विकल्प साफ है—या तो जोखिम उठाइए, या महंगे ईंधन और आर्थिक दबाव का सामना कीजिए।
भारतीय नौसेना की बड़ी भूमिका
इस पूरे ऑपरेशन का सबसे अहम पहलू भारतीय नौसेना की सुरक्षा रणनीति है।Indian Navy ने फारस की खाड़ी और अरब सागर में निगरानी बढ़ा दी है। युद्ध की आशंका, ड्रोन हमले, समुद्री बारूदी सुरंगें और टैंकरों पर संभावित हमलों को देखते हुए भारत अब “सशस्त्र ऊर्जा आपूर्ति मॉडल” की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल तेल लाने का ऑपरेशन नहीं, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक क्षमता का भी प्रदर्शन होगा।समुद्री बीमा और आर्थिक सुरक्षाभारत सरकार ने अत्यधिक जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों के लिए विशेष समुद्री बीमा योजना शुरू की है। यह कदम बताता है कि नई दिल्ली अब युद्धकालीन आर्थिक रणनीति पर काम कर रही है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि होर्मुज लंबे समय तक बाधित रहा, तो इसका असर केवल पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नहीं बल्कि महंगाई, परिवहन, उद्योग और आम आदमी की जेब पर भी पड़ेगा।
दूसरी तस्वीर: बंगाल में शुभेंदु सरकार का वैचारिक आक्रमण
जहां एक तरफ केंद्र सरकार वैश्विक संकटों से निपटने में जुटी है, वहीं पश्चिम बंगाल में नई भाजपा सरकार ने प्रशासनिक और वैचारिक बदलावों की तेज रफ्तार शुरू कर दी है।मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने सत्ता संभालने के कुछ ही दिनों के भीतर ऐसे फैसले लिए हैं, जिन्हें भाजपा समर्थक “सुधार” और विपक्ष “वैचारिक ध्रुवीकरण” बता रहा है।‘लक्ष्मी भंडार’ से ‘अन्नपूर्णा’ तकनई सरकार ने All India Trinamool Congress शासन की चर्चित “लक्ष्मी भंडार” योजना को बंद कर “अन्नपूर्णा योजना” लागू कर दी है।अब पात्र महिलाओं को हर महीने ₹3000 सीधे बैंक खातों में भेजे जाएंगे। भाजपा इसे “पारदर्शी आर्थिक सशक्तिकरण” बता रही है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार पुराने राजनीतिक प्रतीकों को मिटाने की कोशिश कर रही है।
आयुष्मान भारत और केंद्र के साथ तालमेल
राज्य में Ayushman Bharat योजना लागू करने का फैसला भी बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा अब बंगाल को “डबल इंजन मॉडल” के जरिए केंद्र की योजनाओं से सीधे जोड़ना चाहती है, ताकि राज्य और केंद्र के बीच टकराव की राजनीति खत्म हो।
‘चिकन नेक’ और राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे बड़ा सामरिक फैसला
सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी “चिकन नेक” को लेकर आया। यह इलाका पूर्वोत्तर भारत को मुख्य भूमि से जोड़ता है और सैन्य दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। सरकार ने यहां के सात राष्ट्रीय राजमार्गों को केंद्रीय एजेंसियों को सौंपने का फैसला लिया है, ताकि सेना और सुरक्षा बलों की आवाजाही तेज हो सके।रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और बांग्लादेश से जुड़े सामरिक समीकरणों को देखते हुए यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण है।
सीमा फेंसिंग और घुसपैठ पर सख्ती
सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर लंबित फेंसिंग कार्य को पूरा करने के लिए 45 दिनों में बीएसएफ को जमीन देने की घोषणा की है।यह भाजपा के उस लंबे राजनीतिक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें “घुसपैठ” और “राष्ट्रीय सुरक्षा” को मुख्य मुद्दा बनाया गया है।‘
वंदे मातरम’ और वैचारिक संदेश
सरकारी स्कूलों में Vande Mataram अनिवार्य करने का फैसला केवल सांस्कृतिक निर्णय नहीं, बल्कि वैचारिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि भाजपा बंगाल की राजनीति में राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती से स्थापित करना चाहती है।
फर्जी प्रमाण पत्रों की जांच और भ्रष्टाचार पर हमला
1.69 करोड़ जाति प्रमाण पत्रों की दोबारा जांच और Sandip Ghosh पर कार्रवाई को सरकार “भ्रष्टाचार विरोधी अभियान” के रूप में पेश कर रही है।विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है, लेकिन भाजपा इसे “सिस्टम क्लीनअप” कह रही है।
बदलते भारत का नया चेहरा
दोनों घटनाएं—होर्मुज में भारत का जोखिम उठाना और बंगाल में शुभेंदु सरकार का आक्रामक प्रशासनिक एजेंडा—एक बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रही हैं।भारत अब केवल प्रतिक्रियात्मक राष्ट्र नहीं रहना चाहता। चाहे वैश्विक ऊर्जा संकट हो, समुद्री सुरक्षा हो या आंतरिक राजनीतिक पुनर्गठन—
नई रणनीति अधिक आक्रामक, निर्णायक और वैचारिक दिखाई दे रही है।
निष्कर्ष
एक तरफ भारतीय जहाज युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं, दूसरी ओर बंगाल में नई सरकार राज्य की राजनीति की दिशा बदलने में जुटी है।
दोनों मोर्चों पर संदेश स्पष्ट है—जोखिम उठाए बिना न ऊर्जा सुरक्षा बचाई जा सकती है और न राजनीतिक वर्चस्व स्थापित किया जा सकता है।
अब आने वाले दिनों में पूरी दुनिया की नजर होर्मुज के समुद्र और बंगाल की सियासत—दोनों पर टिकी रहेगी।
