बी के झा
NSK

नई दिल्ली/मंडी, 26
हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने एक बार फिर अपने तीखे तेवरों से राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर विपक्ष की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना ने घुसपैठियों की तुलना ‘कैंसर’ जैसी बीमारी से कर दी और कहा कि “पूरा देश अब सैनिटाइजेशन चाहता है। घुसपैठियों को बाहर निकालना राष्ट्रीय संकल्प बन चुका है।”उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब देशभर में SIR को लेकर राजनीतिक खींचतान अपने चरम पर है और विपक्ष इसे सामाजिक तनाव बढ़ाने वाला कदम बता रहा है।घुसपैठियों को बताया ‘कैंसर’, देश को चाहिए ‘सैनिटाइजेशन’मीडिया से बातचीत में कंगना ने कहा—
जिस तरह शरीर में कैंसर फैल जाता है, उसी तरह देश में घुसपैठिए फैलते हैं। पूरा देश इनसे मुक्ति चाहता है। विपक्ष चाहे जितनी धमकियाँ दे, SIR लागू होकर रहेगा।उनके इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
विपक्ष ने कसा तंज—“बीमारी और इंसानों की तुलना अमानवीय”टीएमसी की महुआ मोइत्रा ने कहा,“बीमारी और इंसानों की तुलना करना राजनीति नहीं, नफरत फैलाने की कोशिश है। भाजपा सांसदों को संविधान पढ़ाया जाए।”कांग्रेस के जयराम रमेश ने प्रतिक्रिया दी,“कैंसर का उदाहरण देकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। SIR कोई देशभक्ति का मुद्दा नहीं, बल्कि चुनावी ध्रुवीकरण का नया टूल है।”सीपीएम के सीताराम येचुरी ने कहा,“घुसपैठ का वास्तविक समाधान कूटनीतिक और प्रशासनिक है, बॉलीवुड शैली की सनसनीखेज बयानबाज़ी नहीं।”सियासी हलकों में यह चर्चा भी गर्म है कि कंगना के बयान भाजपा की आक्रामक रणनीति का हिस्सा हैं या फिर एक ‘राष्ट्रवादी नैरेटिव’ को बल देने की कोशिश।
PM मोदी को बताया ‘उद्धारकर्ता’:
राम मंदिर में धर्म ध्वजारोहण पर भावुक हुईं कंगना राम मंदिर के 191 फुट ऊँचे शिखर पर धर्म ध्वजा फहराने के कार्यक्रम पर कंगना भावुक दिखीं। उन्होंने कहा—काशी में बैठकर टीवी पर यह दृश्य देखा तो मेरी आँखों में आंसू आ गए। प्रधानमंत्री मोदी ने सनातन का गौरव पुनर्जीवित कर दिया। उन्हीं का जन्म देश का उद्धार करने के लिए हुआ है।
”्कंगना ने दावा किया कि धर्म ध्वजा की स्थापना से “भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक सम्मान” मिला है।
विपक्ष बोला—“प्रधानमंत्री देवता नहीं, लोकतांत्रिक पद हैं”कांग्रेस नेता पवन खेड़ा बोले,“प्रधानमंत्री को ‘उद्धारकर्ता’ बताना लोकतंत्र के विरुद्ध संस्कृति है। प्रधानमंत्री किसी धर्म या वर्ग के नहीं, पूरे देश के होते हैं।”राजद प्रवक्ता मनोज झा ने कहा,“पीएम को मसीहा बताने की राजनीति अगली पीढ़ी के लिए नुकसानदेह है।”इसके बावजूद भाजपा नेतृत्व कंगना के इस बयान को “भावनाओं की स्वाभाविक अभिव्यक्ति” बता रहा है।पाकिस्तान की प्रतिक्रिया पर कंगना का प्रहारअयोध्या कार्यक्रम पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की टिप्पणी पर कंगना ने तंज भरा हमला किया—पाकिस्तान इसलिए बौखला रहा है क्योंकि उसका भविष्य अंधकारमय है। वे भीख का कटोरा लेकर घूम रहे हैं, जबकि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द ही पहली बन जाएगा।
”राजनयिक हलकों में कंगना की यह टिप्पणी “राजनीतिक बयान” कहकर खारिज कर दी जा रही है, पर भाजपा समर्थक इसे “राष्ट्रवादी प्रतिक्रिया” मान रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का नजरिया प्रसिद्ध
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अमरेंद्र शुक्ला कहते हैं—कंगना रनौत भाजपा की आक्रामक सांस्कृतिक राजनीति की एक मुखर आवाज हैं। उनके बयानों का मकसद भावनात्मक माहौल तैयार करना होता है, विशेषकर चुनावी समय में यह रणनीति प्रभावी मानी जाती है।”वरिष्ठ पत्रकार अनुप्रिया देसाई के अनुसार—प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय अस्मिता को ‘मसीहाई’ रूप देने का प्रयास जनता के एक हिस्से में प्रभावशाली साबित होता है। लेकिन विपक्ष इसे लोकतांत्रिक संतुलन के लिए ख़तरा मान रहा है।
”राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर फिरोज़ अहमद कहते हैं—SIR पर सरकार को तर्क आधारित चर्चा करनी चाहिए। घुसपैठ जैसे गंभीर विषयों पर बीमारी की उपमा देना जनता में भय तो पैदा करता है, समाधान नहीं।”अयोध्या ध्वजारोहण: आध्यात्मिक और राजनीतिक प्रतिध्वनअयोध्या मंदिर पर फहराया गया धर्म ध्वज, जिस पर ॐ, सूर्य और को विधायक के चिन्ह मौजूद हैं, सनातन परंपरा की अध्यात्मिक जड़ों का प्रतीक माना जा रहा है।जहां भाजपा इसे “सदियों का गौरव पुनर्स्थापन” बता रही है, वहीं विपक्ष इसे “राजनीति और धर्म के मिश्रण” के रूप में देख रहा है।
निष्कर्ष
कंगना रनौत के बयानों ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में भावनात्मक और वैचारिक विभाजन को तेज कर दिया है।जहां भाजपा इसे राष्ट्रवाद की मुखर अभिव्यक्ति बताती है, वहीं विपक्ष इसे उग्र राजनीति और विभाजनकारी भाषा का उदाहरण मान रहा है।आने वाले दिनों में SIR और राम मंदिर से जुड़े मुद्दे देश की सियासत का केंद्र बने रहेंगे—और कंगना जैसे बयानों से यह बहस और तीखी होने वाली है।
