बी के झा
NSK

कटिहार/ पटना, 4 मई
बिहार के कटिहार जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि समाज में बढ़ती असहिष्णुता किस हद तक खतरनाक रूप ले चुकी है। एक मामूली मजाक से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते इतना विकराल हो गया कि एक निर्दोष व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी।
घटना बलिया बेलौन थाना क्षेत्र के मढाइपुर पंचायत स्थित अलहणडा खाड़ी गांव की है, जहां रविवार को एक साधारण बातचीत ने हिंसा का रूप ले लिया। जानकारी के मुताबिक, मृतक मुजम्मिल (47 वर्ष), जो बारसोई अनुमंडल कोर्ट में मुंशी के पद पर कार्यरत थे, के बेटे मुश्फिक रजा अपने पशुओं के लिए चारा काटने जा रहे थे। इसी दौरान गांव के ही एक व्यक्ति रब्बानी ने तंज कसते हुए कहा—“
ग्रेजुएट होकर घास काटोगे, तो शादी कैसे होगी?”
यह टिप्पणी भले ही मजाक के रूप में की गई हो, लेकिन इसने आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई। बात बढ़ी, शब्दों ने तल्खी पकड़ी और देखते ही देखते बहस हाथापाई में बदल गई। कुछ ही मिनटों में यह विवाद दो व्यक्तियों से निकलकर दो परिवारों के बीच टकराव में तब्दील हो गया।
स्थिति को बिगड़ता देख मुंशी मुजम्मिल बीच-बचाव के लिए पहुंचे। उनका मकसद केवल झगड़े को शांत करना था, लेकिन दुर्भाग्य से वही इस हिंसा का शिकार बन गए। आरोप है कि हमलावरों ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की और इसी दौरान उनका गला दबा दिया।मौके पर ही वे बेहोश होकर गिर पड़े।
परिजन उन्हें तुरंत इलाज के लिए नजदीकी चिकित्सक के पास ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एक शांतिप्रिय व्यक्ति, जो विवाद खत्म करने आया था, खुद हिंसा की भेंट चढ़ गया।घटना के बाद पूरे गांव में तनाव का माहौल व्याप्त हो गया।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।एसडीपीओ अजय कुमार के अनुसार, परिजनों के बयान में कुछ विरोधाभास सामने आए हैं। पहले सिर पर लाठी से वार की बात कही गई, जबकि बाद में गला दबाकर हत्या का आरोप लगाया गया। पुलिस दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण का खुलासा हो सकेगा।यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि समाज के उस कड़वे सच का आईना है, जहां छोटी-छोटी बातें अहंकार और आक्रोश में बदलकर जानलेवा साबित हो रही हैं।
एक हल्का मजाक, एक तंज, और कुछ क्षणों का गुस्सा — और परिणाम एक परिवार के लिए आजीवन शोक।
अब सवाल यह है कि क्या हम अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना सीख पाएंगे, या ऐसे ही छोटी चिंगारियां बड़ी आग बनती रहेंगी?
