कर्नाटक कांग्रेस में घमासान, BJP भी सतर्क — “ अगर शिवकुमार BJP में आए तो मुझे दूसरा रास्ता चुनना होगा”, रमेश जिरकिहोली के बयान ने बढ़ाया सियासी तापमान

बी के झा

नई दिल्ली / बेंगलुरु, 25 नवंबर

कर्नाटक की राजनीति इन दिनों अस्थिरता के भंवर में फंसी दिखाई दे रही है। एक तरफ कांग्रेस के भीतर सत्ता-साझेदारी को लेकर मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा, वहीं दूसरी ओर भाजपा भी हालात पर पैनी नजर बनाए हुए है। किंतु दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता रमेश जिरकिहोली ने अपनी ही पार्टी को कांग्रेस संकट में कूदने से सख्त चेतावनी दी है।“कांग्रेस की लड़ाई उनका मामला है,

BJP को दलदल में नहीं उतरना चाहिए” — जिरकिहोलीपूर्व मंत्री और भाजपा विधायक रमेश जिरकिहोली ने मीडिया से कहा—“मैं भाजपा नेतृत्व से अपील करता हूं कि कांग्रेस सरकार को गिराने की कोशिश बिल्कुल न करें। यह दलदल है, इसमें पड़ना ठीक नहीं। कांग्रेस अपनी लड़ाई खुद लड़े, हम अगले चुनावों में बहुमत के साथ लौटें—यही बेहतर रास्ता है।”उनका यह बयान भाजपा के भीतर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।“डीके शिवकुमार BJP में आए, तो मैं उन्हें नेता नहीं मानूंगा”जब पत्रकारों ने पूछा कि यदि कांग्रेस के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार पार्टी बदलकर भाजपा में आते हैं,

तो क्या होगा?

जिरकिहोली बोले—“मुझे नहीं लगता कि ऐसा होगा। लेकिन अगर ऐसा होता है, तो इस जीवन में मैं उन्हें अपना नेता स्वीकार नहीं कर पाऊंगा। मुझे फिर दूसरा राजनीतिक विकल्प चुनना पड़ेगा।”यह बयान कर्नाटक की राजनीति में बगल-बगल बैठी दोस्ती और प्रतिद्वंद्विता की जटिलता को खुलकर सामने लाता है।“यदि शिवकुमार के पास संख्या होती, तो वे पहले ही CM बन गए होते”जिरकिहोली ने यह भी कहा कि शिवकुमार के पास पार्टी विधायकों का निर्णायक समर्थन नहीं है।

उन्होंने कहा—“अगर उनके पास नंबर होता, तो वे बहुत पहले ही मुख्यमंत्री बन चुके होते। अभी जो शोर है, वह सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति है।”दिल्ली में ‘शक्ति प्रदर्शन’: आलाकमान के दरवाजे पर शिवकुमार समर्थककांग्रेस में जारी खींचतान के बीच, शिवकुमार गुट के 6 विधायक दिल्ली पहुंच चुके हैं।सूत्रों का दावा है—और विधायक राजधानी जा सकते हैंउनकी मांग स्पष्ट है—शिवकुमार को तुरंत मुख्यमंत्री बनाया जाएसिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों गुट ‘कमांड’ की नजर में अपनी-अपनी ताकत साबित करने में जुटे हैंइस बीच सिद्धारमैया ने बड़ा बयान दिया—“आलाकमान जो भी तय करेगा, मैं उसे स्वीकार करूंगा। शिवकुमार को भी स्वीकार करना चाहिए।”जिरकिहोली के बयान के क्या राजनीतिक मायने?राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार—भाजपा नेता का यह बयान संकेत देता है कि पार्टी अभी वेट-एंड-वॉच मोड में हैकांग्रेस के भीतर चल रही कलह को भाजपा चुनावी अवसर के रूप में देख रही है शिवकुमार के भाजपा में आने की चर्चाएं कई बार उठीं, पर पहली बार भाजपा के वरिष्ठ MLA ने सार्वजनिक रूप से नाराज़गी जताई

एक वरिष्‍ठ विश्लेषक ने कहा—“जिरकिहोली का बयान सिर्फ शिवकुमार को नहीं, बल्कि भाजपा को भी संकेत है कि कांग्रेस के टूटने का जोखिम उठाने से पहले सोचें।”कर्नाटक की सियासत में उठता तूफ़ान — अगला कदम कौन करेगा?कांग्रेस में सत्ता-संतुलन की यह लड़ाई आगे बढ़ती दिख रही है।– क्या आलाकमान शिवकुमार को शांत कर पाएगा?– क्या दिल्ली का शक्ति-प्रदर्शन कांग्रेस नेतृत्व को झुका पाएगा?–

या क्या भाजपा दूर बैठकर मौजूदा सरकार की आंतरिक टकराव से राजनीतिक लाभ लेगी?अभी ये सवाल अनुत्तरित हैं, लेकिन इतना निश्चित है कि कर्नाटक की राजनीति आने वाले दिनों में और अधिक उथल-पुथल देखने वाली है।

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