बी के झा
NSK

नई दिल्ली/हिसार , 10 जनवरी
तेजी से बदलते समय और अपराध की नई-नई शक्लों के बीच भारतीय न्याय प्रणाली को सशक्त बनाए रखने का मंत्र देते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अधिवक्ताओं—विशेषकर युवा वकीलों—से निरंतर अध्ययन, तकनीकी दक्षता और डिजिटल संसाधनों से जुड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि आज कानून की किताबें ही नहीं, तकनीक भी वकील की नई पाठशाला है।
हिसार के स्थानीय न्यायिक परिसर में हिसार बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते अपराधों और उभरती वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए वकीलों का अपडेट रहना अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता बन चुका है।अपराध बदल रहा है, बहस भी बदलनी होगी
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज अपराध केवल गली-मोहल्लों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि वे साइबर स्पेस में अपनी जड़ें जमा चुके हैं।उन्होंने कहा:“साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट घोटाले, ऑनलाइन धोखाधड़ी और तकनीक आधारित अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे मामलों में पारंपरिक कानूनी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। वकीलों को डिजिटल साक्ष्यों की समझ, तकनीकी शब्दावली और आधुनिक प्रौद्योगिकी से परिचित होना होगा।”उनका कहना था कि जब अधिवक्ता ई-पुस्तकालय, ऑनलाइन डेटाबेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शोध उपकरण और डिजिटल कोर्ट सिस्टम से लैस होंगे, तभी न्याय वितरण प्रणाली अधिक प्रभावी, तेज और भरोसेमंद बनेगी।
युवा वकीलों के नाम विशेष संदेश
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने युवा अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि“सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। जो वकील आज पढ़ना छोड़ देता है, वह कल पीछे रह जाता है।”उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे केवल अदालत की कार्यवाही तक सीमित न रहें, बल्कि वैश्विक कानूनी रुझानों, अंतरराष्ट्रीय कानून, साइबर लॉ और उभरती चुनौतियों पर भी निरंतर अध्ययन करें।
हिसार से आत्मीय रिश्ता
इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश भावुक भी दिखे। उन्होंने अपने शुरुआती जीवन और वकालत के दिनों को याद करते हुए कहा कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा हिसार जिले के पेतवाड़ गांव में हुई थी और उन्होंने यहीं से वकालत की शुरुआत की थी।उन्होंने कहा:“हिसार में मेरा समय भले ही लंबा न रहा हो, लेकिन आप सबके साथ मेरा रिश्ता अनंत है। हिसार बार से मुझे जो प्रेम, स्नेह और मार्गदर्शन मिला, वह मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।”उनके इस वक्तव्य पर पूरे सभागार में तालियों की गूंज सुनाई दी।
न्याय व्यवस्था के लिए व्यापक संदेश
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश का यह संदेश केवल अधिवक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी न्याय प्रणाली के लिए दिशासूचक है। डिजिटल युग में न्याय तभी प्रभावी होगा, जब न्यायाधीश, वकील और न्यायिक कर्मचारी—तीनों तकनीक और ज्ञान के साथ कदमताल करें।
निष्कर्ष
चीफ जस्टिस सूर्यकांत का यह संबोधन महज़ एक औपचारिक भाषण नहीं, बल्कि बदलते भारत में कानून के भविष्य का घोषणापत्र है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि कानून की रक्षा वही कर सकता है, जो समय, तकनीक और ज्ञान—तीनों से आगे चलता हो।यह संदेश युवा वकीलों के लिए प्रेरणा है और न्याय प्रणाली के लिए चेतावनी—कि स्थिर रहना अब पीछे हटने के बराबर है।
