कूटनीति से दिल्ली दरबार तक: कौन हैं नए उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, जिन्होंने वॉशिंगटन से कोलंबो तक संभाली भारत की रणनीतिक जिम्मेदारियां

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 6 मार्च

राष्ट्रीय राजधानी की प्रशासनिक संरचना में एक अहम बदलाव करते हुए राष्ट्रपति भवन ने दिल्ली के नए उपराज्यपाल की नियुक्ति की घोषणा कर दी है। गुरुवार को जारी अधिसूचना के अनुसार वरिष्ठ राजनयिक और पूर्व भारतीय राजदूत Taranjit Singh Sandhu को राष्ट्रीय राजधानी का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है।वे इस पद पर Vinai Kumar Saxena का स्थान लेंगे। संधू की नियुक्ति को प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वे दशकों तक भारत की विदेश नीति और कूटनीति के अग्रिम मोर्चे पर काम कर चुके हैं।कूटनीति के गलियारों से निकला अनुभवी प्रशासकTaranjit Singh Sandhu भारतीय विदेश सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं और उन्होंने अपने लंबे राजनयिक करियर में कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पदों पर काम किया है।उनका नाम खास तौर पर भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाई देने वाले राजनयिकों में लिया जाता है। उन्होंने दो अलग-अलग कार्यकाल में अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में भारतीय मिशन में अहम जिम्मेदारियां निभाईं।वॉशिंगटन में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, तकनीकी आदान-प्रदान और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-अमेरिका संबंधों के “स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” के दौर में संधू की भूमिका बेहद प्रभावशाली रही।

श्रीलंका में भी निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में संधू का अनुभव केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने 2017 से 2020 तक Sri Lanka में भारत के उच्चायुक्त के रूप में भी कार्य किया।इस दौरान भारत और श्रीलंका के बीच रणनीतिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गईं।दरअसल, श्रीलंका हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में वहां संधू की भूमिका केवल राजनयिक ही नहीं बल्कि रणनीतिक भी मानी गई।दिलचस्प बात यह भी है कि वे इससे पहले 2000 से 2004 के बीच कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग में पॉलिटिकल विंग के प्रमुख के रूप में भी काम कर चुके थे। इस तरह श्रीलंका की राजनीति और कूटनीति को समझने का उन्हें लंबा अनुभव रहा है।

राजनीति में भी आजमा चुके हैं किस्मत

राजनयिक सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद Taranjit Singh Sandhu ने सक्रिय राजनीति की राह भी चुनी।उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में Bharatiya Janata Party के टिकट पर पंजाब की प्रतिष्ठित Amritsar सीट से चुनाव लड़ा। हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में उनकी पहचान एक अनुभवी नीति-निर्माता की बनी रही।

दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में बड़ी जिम्मेदारी

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का प्रशासनिक ढांचा अन्य राज्यों से अलग है। यहां उपराज्यपाल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि उन्हें केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच समन्वय बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी होती है।विशेषज्ञों का मानना है कि संधू के पास कूटनीति, प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय राजनीति का जो व्यापक अनुभव है, वह दिल्ली के शासन तंत्र में संतुलन और संवाद को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा

दिल्ली के नए उपराज्यपाल की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र सरकार ने ऐसे व्यक्ति को इस पद पर नियुक्त किया है, जिसके पास न केवल प्रशासनिक अनुभव है बल्कि जटिल परिस्थितियों में संतुलन बनाने की क्षमता भी है। वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि दिल्ली में केंद्र और राज्य सरकार के बीच पहले से मौजूद संवैधानिक टकराव को देखते हुए नए उपराज्यपाल की भूमिका बेहद संवेदनशील होगी।

कूटनीति का अनुभव, प्रशासन की चुनौती

कुल मिलाकर देखा जाए तो Taranjit Singh Sandhu की नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि उस अनुभव को दिल्ली के शासन तंत्र में लाने की कोशिश भी है जो उन्होंने वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अर्जित किया।अब नजर इस बात पर होगी कि वॉशिंगटन और कोलंबो जैसे वैश्विक कूटनीतिक मंचों पर अपनी पहचान बना चुके संधू दिल्ली की जटिल राजनीति और प्रशासनिक चुनौतियों को किस तरह संभालते हैं।

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