केंद्र से बिहार को 30 हजार करोड़ की सौगात, सरकारी खजाने को राहत; वेतन-पेंशन भुगतान में तेजी, बड़ी योजनाओं का पैसा अभी रुका, विपक्ष ने उठाए विकास योजनाओं के भुगतान पर सवाल

बी के झा

NSK

पटना, 6 मार्च

वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम महीने में बिहार को केंद्र सरकार से बड़ी वित्तीय राहत मिलने जा रही है। राज्य को इस माह करीब 30 हजार करोड़ रुपये की राशि प्राप्त होगी, जिसमें लगभग 7500 करोड़ रुपये केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी के रूप में मिलेंगे, जबकि शेष राशि विभिन्न केंद्रीय योजनाओं में केन्द्रांश के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।इस राशि के आने से राज्य सरकार के खजाने को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, मानदेय और छोटे वित्तीय भुगतानों के निपटान में तेजी आएगी। हालांकि, बड़े विकास कार्यों से जुड़े कई भुगतानों पर अभी भी रोक बनी रह सकती है।

वेतन, पेंशन और मानदेय को प्राथमिकता

राज्य के वित्त विभाग ने निर्देश दिया है कि 10 मार्च तक सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, मानदेय और सहायता अनुदान की निकासी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।वित्तीय वर्ष के अंतिम माह में वित्तीय अनुशासन का पालन सुनिश्चित करने के लिए खर्चों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र से राशि मिलने के बाद कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को भुगतान में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाएगी।

विकास योजनाओं के भुगतान में देरी

राज्य में इस समय शहरी और ग्रामीण सड़कों, पुल-पुलियों, सरकारी भवनों और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं पर बड़े पैमाने पर काम चल रहा है। इन योजनाओं में लगे संवेदकों को आम तौर पर कार्य की प्रगति के अनुसार भुगतान किया जाता है।लेकिन वित्त विभाग के सूत्रों के मुताबिक इस समय बड़ी परियोजनाओं से जुड़े वित्तीय दावों की गहन जांच की जा रही है, जिसके कारण भुगतान में देरी हो सकती है।विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिन परियोजनाओं के दावों की जांच पूरी हो जाएगी, उनके भुगतान राशि की उपलब्धता के आधार पर किया जाएगा।

छोटे भुगतान संभव, बड़े अभी प्रतीक्षा में

वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार केंद्र से मिलने वाली राशि से छोटे-छोटे भुगतान और नियमित सरकारी खर्चों को पूरा करना संभव होगा।साथ ही राज्य को अपने स्रोतों से भी टैक्स और अन्य राजस्व के रूप में अतिरिक्त आय मिलने की उम्मीद है।हालांकि, बड़े वित्तीय दावों को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। जिन परियोजनाओं के भुगतान इस वित्तीय वर्ष में संभव नहीं हो पाएंगे, उन्हें अगले वित्तीय वर्ष में लंबित रखा जा सकता है।

सरकार का दावा: विकास की रफ्तार जारी

राज्य सरकार के सूत्रों का कहना है कि केंद्र से मिलने वाली राशि राज्य की विकास योजनाओं को गति देने में मदद करेगी।मुख्यमंत्री Nitish Kumar के नेतृत्व में सरकार का दावा है कि वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता के साथ विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है।सरकार का कहना है कि हर वित्तीय दावे की जांच के बाद ही भुगतान किया जा रहा है ताकि सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

विपक्ष ने उठाए सवाल

विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने कहा कि“यदि बिहार की अर्थव्यवस्था मजबूत है तो विकास योजनाओं के भुगतान में देरी क्यों हो रही है? संवेदकों और ठेकेदारों को समय पर भुगतान नहीं मिलने से परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।”विपक्ष का आरोप है कि वित्तीय वर्ष के अंत में सरकार केवल नियमित भुगतानों पर ध्यान दे रही है, जबकि बड़ी परियोजनाओं को लेकर स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आ रहा।

शिक्षाविदों और आर्थिक विश्लेषकों की राय

आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने में खर्चों पर नियंत्रण रखना सरकारों की सामान्य प्रक्रिया होती है।पटना के एक आर्थिक विश्लेषक का कहना है कि“केंद्र से मिलने वाली राशि राज्य के राजकोषीय संतुलन को बनाए रखने में मदद करेगी। हालांकि विकास योजनाओं के भुगतान में देरी लंबे समय तक नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इससे निर्माण कार्य प्रभावित हो सकते हैं।”

बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए क्या मायने

विशेषज्ञों के अनुसार केंद्र से मिलने वाली यह राशि बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है—कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के भुगतान से बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा छोटे भुगतान होने से सरकारी योजनाओं के संचालन में सुगमता आएगी वित्तीय अनुशासन के कारण खर्चों की पारदर्शिता बढ़ेगी हालांकि बड़ी परियोजनाओं के भुगतान में देरी से निर्माण क्षेत्र पर कुछ समय के लिए दबाव भी बन सकता है।

वित्तीय वर्ष का अंतिम चरण

मार्च का महीना सरकारों के लिए हमेशा वित्तीय प्रबंधन की दृष्टि से अहम माना जाता है। ऐसे में बिहार सरकार भी छोटे भुगतान और नियमित खर्चों को प्राथमिकता देकर वित्तीय संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है।अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्र से मिलने वाली राशि के बाद राज्य सरकार विकास योजनाओं के लंबित भुगतानों को कितनी तेजी से पूरा कर पाती है।फिलहाल इतना स्पष्ट है कि केंद्र की यह वित्तीय सहायता बिहार के सरकारी खजाने को तत्काल राहत जरूर देगी, लेकिन बड़े विकास कार्यों के भुगतान पर अंतिम निर्णय आने वाले दिनों में ही स्पष्ट

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