बी के झा
NSK


पटना, खगड़िया/ नई दिल्ली, 25 अक्टूबर
बिहार विधानसभा चुनाव में सियासी माहौल हर दिन गरमाता जा रहा है। शनिवार को खगड़िया में एक बड़ा विवाद तब खड़ा हो गया जब महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरा तेजस्वी यादव की एक जनसभा को प्रशासन ने रद्द कर दिया। बताया गया कि यह फैसला सुरक्षा कारणों से लिया गया क्योंकि उसी दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली भी खगड़िया में थी।हालांकि तेजस्वी यादव और राजद नेताओं ने इस फैसले को “तानाशाही” करार दिया और आरोप लगाया कि प्रशासन भाजपा नेताओं के दबाव में काम कर रहा है।
तेजस्वी बोले – जनता सब समझ रही है पटना से चुनावी दौरे पर निकलने से पहले तेजस्वी यादव ने मीडिया से कहा,यह लोकतंत्र नहीं, तानाशाही है। भाजपा और प्रशासन जनता की भीड़ से डर गया है। अमित शाह के कहने पर मेरी सभा रद्द की गई। लेकिन बिहार की जनता अब किसी के डर या दबाव में नहीं आने वाली।”
उन्होंने कहा कि जनता इस बार वोट से जवाब देगी और सच्चाई की जीत होगी।खगड़िया में तीन सभाएं तय, एक पर रोक तेजस्वी यादव की शनिवार को खगड़िया जिले में तीन चुनावी सभाएं तय थीं —1. परबत्ता विधानसभा क्षेत्र के भगवान हाई स्कूल मैदान में सुबह 11 बजे,2. अलौली विधानसभा क्षेत्र के उच्च विद्यालय मैदान में दोपहर 1:15 बजे,3. और तीसरी सभा खगड़िया शहर के संसारपुर मैदान में होनी थी।
4. तीसरी सभा को जिला प्रशासन ने कैंसिल कर दिया। वहीं अमित शाह की चुनावी रैली शहर के जीनकेटी मैदान में तय थी।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अमित शाह की सुरक्षा व्यवस्था और जनसभा के समय को देखते हुए सुरक्षा कारणों से तेजस्वी की एक सभा की अनुमति नहीं दी गई। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों कार्यक्रम एक ही शहर में पास-पास थे, इसलिए सुरक्षा जोखिम से बचने के लिए यह कदम उठाया गया।
राजद प्रत्याशी ने लगाया गंभीर आरोप
प्रत्याशी डॉ. चंदन यादव ने कहा कि यह फैसला भाजपा नेताओं के दबाव में लिया गया।अमित शाह की सभा और तेजस्वी यादव की सभा के बीच चार घंटे का अंतर था और स्थान भी अलग था। फिर भी प्रशासन ने केवल एक पक्ष की बात मानकर हमारी सभा रद्द कर दी। यह लोकतंत्र का मजाक है,” उन्होंने कहा।
स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों ने उठाए सवाल
खगड़िया के स्थानीय बुद्धिजीवियों और राजनीतिक विश्लेषकों ने भी इस कदम पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर एक ही दिन दो सभाओं की अनुमति देने में भेदभाव क्यों किया गया।उन्होंने चुनाव आयोग से भी अपील की कि वह इस मामले में संज्ञान ले और सुनिश्चित करे कि आगे किसी भी दल के साथ ऐसा भेदभाव न हो।
जनता का मूड खगड़िया की जनता में भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज है। कई लोगों का कहना है कि चुनाव के वक्त इस तरह का पक्षपात जनता के भरोसे को कमजोर करता है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि प्रशासन को सुरक्षा कारणों को प्राथमिकता देनी चाहिए, लेकिन फैसले में पारदर्शिता जरूरी है।
निष्कर्ष:
खगड़िया में तेजस्वी यादव की सभा रद्द होने से बिहार का सियासी तापमान और बढ़ गया है। एक तरफ अमित शाह की रैली पूरे जोश में रही, वहीं दूसरी तरफ तेजस्वी यादव इस मुद्दे को लेकर सरकार और प्रशासन दोनों पर हमलावर हैं। अब देखना होगा कि जनता इस राजनीतिक खींचतान को चुनावी नतीजों में कैसे बदलती है।
