खराब मौसम या व्यवस्था की नाकामी? दरभंगा फ्लाइट डायवर्जन पर हंगामा, सियासत और सवाल

बी के झा

NSK

दरभंगा/‌ कोलकाता,‌26 दिसंबर

हैदराबाद से दरभंगा आ रही इंडिगो की फ्लाइट का कोलकाता में डायवर्ट होना महज़ एक तकनीकी या मौसम से जुड़ी घटना भर नहीं रहा, बल्कि यह घटना नागरिक उड्डयन व्यवस्था, यात्रियों के अधिकार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को लेकर बड़े सवाल खड़े कर गई। विमान के कोलकाता एयरपोर्ट पर उतरते ही यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा, नारेबाजी हुई और एयरलाइन प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए गए।क्या था पूरा

मामला इंडिगो की हैदराबाद–दरभंगा फ्लाइट तय समय पर रवाना हुई थी। लेकिन दरभंगा में खराब मौसम के कारण पायलट को सुरक्षा मानकों के तहत विमान को कोलकाता की ओर मोड़ना पड़ा। विमान के उतरते ही यात्रियों को बताया गया कि मौसम के कारण आगे की उड़ान संभव नहीं है। यहीं से विवाद ने तूल पकड़ लिया।

यात्रियों का कहना था कि वे दरभंगा के लिए टिकट लेकर आए थे, लेकिन उन्हें बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था, होटल, भोजन या स्पष्ट जानकारी के कोलकाता में उतार दिया गया। कई यात्रियों ने विमान के भीतर ही विरोध दर्ज कराया, जो बाद में एयरपोर्ट परिसर में हंगामे और नारेबाजी में बदल गया।

यात्रियों का गुस्सा: सुरक्षा के नाम पर लापरवाही

”यात्रियों का आरोप है कि खराब मौसम कोई नई या अचानक पैदा हुई स्थिति नहीं होती, फिर भी एयरलाइन ने न तो पहले से स्पष्ट सूचना दी और न ही डायवर्जन के बाद जिम्मेदारी निभाई। यात्रियों ने रिफंड, वैकल्पिक उड़ान या अन्य परिवहन की मांग की। उनका कहना था कि सुरक्षा जरूरी है, लेकिन यात्रियों को बेसहारा छोड़ देना स्वीकार्य नहीं।

शिक्षाविदों और विमानन विशेषज्ञों की राय

नागरिक उड्डयन मामलों के जानकार और शिक्षाविदों का मानना है कि मौसम के कारण फ्लाइट डायवर्जन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन असली कसौटी डायवर्जन के बाद की व्यवस्थाओं की होती है।एक विमानन विशेषज्ञ के अनुसार, “एयरलाइंस को यात्रियों के साथ पारदर्शी संवाद, वैकल्पिक व्यवस्था और संवेदनशील व्यवहार अपनाना चाहिए।

यहां समस्या मौसम नहीं, प्रबंधन की तैयारी और यात्रियों के प्रति जवाबदेही की है।”

विपक्ष का हमला: “डबल इंजन सरकार में भी अव्यवस्था”इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों को घेरा है। विपक्ष का कहना है कि बिहार जैसे राज्य में हवाई कनेक्टिविटी को विकास का प्रतीक बताया जाता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रहीं।विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार एयरलाइंस के आगे नतमस्तक है और यात्रियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कोई ठोस निगरानी तंत्र नहीं है।

सरकार की प्रतिक्रिया: “सुरक्षा सर्वोपरि”

सरकारी सूत्रों और नागरिक उड्डयन मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि खराब मौसम में फ्लाइट डायवर्ट करना पूरी तरह सुरक्षा से जुड़ा फैसला होता है और इसमें कोई समझौता नहीं किया जा सकता। साथ ही यह भी कहा गया कि एयरलाइंस को यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखना चाहिए और यदि कहीं कमी हुई है तो उसकी जांच की जाएगी।

बड़ा सवाल

यह घटना केवल एक फ्लाइट डायवर्जन की नहीं, बल्कि उस सोच की है जहां यात्रियों को अक्सर ‘विकल्पहीन’ मान लिया जाता है।

क्या एयरलाइंस की जिम्मेदारी सिर्फ सुरक्षित लैंडिंग तक सीमित है, या सुरक्षित और सम्मानजनक यात्रा अनुभव तक?

दरभंगा जैसी उभरती हवाई पट्टियों के लिए यह घटना चेतावनी है कि कनेक्टिविटी के साथ-साथ व्यवस्थाओं की मजबूती और यात्रियों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

वरना विकास के दावे रनवे पर ही दम तोड़ते रहेंगे।

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