चीन ने पाकिस्तान को सौंपी पनडुब्बियां, तैनाती जल्द; इंडियन नेवी सतर्क — समुद्री सुरक्षा पर बड़ा भू-राजनीतिक संकेत

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 21 नवंबर

हिंद महासागर में शक्ति संतुलन बदलने वाले घटनाक्रम में नौसेना ने पुष्टि की है कि चीन पाकिस्तान को आधुनिक पनडुब्बियां सौंप रहा है, जिनकी तैनाती जल्द शुरू होने वाली है। इंडियन नेवी के डिप्टी चीफ वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन ने कहा है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर “बारीकी से नजर” रख रहा है और समुद्री सुरक्षा को “अभेद्य” बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।फुजियान के नौसेना में शामिल होने के बाद चीन का समुद्री विस्तार और तेजनई दिल्ली में आयोजित स्वावलंबन 2025 कार्यक्रम से पहले मीडिया से बातचीत में एडमिरल वात्स्यायन ने स्वीकार किया कि चीन ने हाल ही में अपने तीसरे विमानवाहक पोत ‘फुजियान’ को नौसेना में शामिल किया है।इस पोत को चीन की सबसे उन्नत कैरियर तकनीक, यानी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट सिस्टम से लैस बताया जा रहा है। इस कार्यक्रम में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शामिल थे, जो इस सैन्यीकरण के महत्व को दर्शाता है।

चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग पर पूछे गए सवालों पर वात्स्यायन ने कहा—हमें पूरी जानकारी है कि चीन पाकिस्तान को पनडुब्बियां दे रहा है। इनकी तैनाती बहुत जल्द शुरू होगी। हम हर स्थिति पर नजर रख रहे हैं।”अमेरिकी रिपोर्ट पर राजनीतिक हलचल: पाकिस्तान का दावा, चीन ने बताया ‘भ्रामक’इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई रिपोर्ट की प्रशंसा की है। वह रिपोर्ट मई महीने में भारत-पाकिस्तान के बीच चार दिन चले संघर्ष को आधार बनाते हुए पाकिस्तान की “सैन्य सफलता” की बात करती है।हालांकि पाकिस्तान के सबसे बड़े सहयोगी

चीन ने इस रिपोर्ट को “भ्रामक और तथ्यहीन” बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया है।डॉन अख़बार के अनुसार PoK में एक कार्यक्रम में शरीफ ने चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ असीम मुनीर की खुलकर तारीफ की और कहा कि अमेरिकी रिपोर्ट उनकी रणनीति की पुष्टि करती है।रिपोर्ट में भारत-पाकिस्तान सीमावर्ती तनाव, चीनी हथियारों की भूमिका और क्षेत्रीय स्थिरता पर उसके प्रभाव का भी उल्लेख है।रणनीतिक और राजनीतिक विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

रक्षा विश्लेषक:

हिंद महासागर में ‘नई त्रिकोणीय चुनौती’

एक वरिष्ठ रक्षा विशेषज्ञ ने स्थिति का आकलन करते हुए कहा—चीनी पनडुब्बियों की पाकिस्तान में तैनाती केवल सैन्य सहयोग नहीं, बल्कि हिंद महासागर में रणनीतिक दबाव बनाना है। भारत के लिए चुनौती यह है कि उसे अब अरब सागर में दो मोर्चों की गतिविधियों पर बराबर चौकसी रखनी होगी।”वे आगे कहते हैं कि चीन का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में स्थायी उपस्थिति और पाकिस्तान के माध्यम से दक्षिण एशिया में सैन्य संतुलन को प्रभावित करना है।

भू-राजनीतिक विशेषज्ञ: भारत को ‘स्मार्ट डिप्लोमैसी + हाई-टेक नेवी’ की दोहरी नीति अपनानी होगी

एक भू-राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार—भारत अब केवल सैन्य प्रतिक्रिया के भरोसे नहीं रह सकता। उसे क्षेत्रीय समुद्री साझेदारियों को मजबूत करना होगा, जैसे—इंडो-पेसिफिक फ्रेमवर्क, क्वाड सहयोग और समुद्री निगरानी नेटवर्क को और आक्रामक बनाना।”वे यह भी बताते हैं कि भारत का घरेलू रक्षा निर्माण, पनडुब्बी-रोधी तकनीक और नौसेना के विस्तार कार्यक्रम आने वाले वर्षों में निर्णायक साबित होंगे।राजनीतिक विश्लेषक: दक्षिण एशिया ‘नैरेटिव वॉर’ का भी मैदान बन रहा है

एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक का कहना है—अमेरिकी रिपोर्ट, पाकिस्तान की प्रतिक्रियाएं और चीन का खंडन… यह साफ संकेत है कि अब लड़ाई केवल सैन्य नहीं, बल्कि वैश्विक नैरेटिव पर भी है। हर देश अपनी राजनीतिक कहानी गढ़ रहा है।”उनके अनुसार भारत को इस स्थिति का सामना तथ्य, पारदर्शिता और मजबूत कूटनीतिक संदेश के साथ करना होगा।

निष्कर्ष:

चुनौती बड़ी, लेकिन भारतीय नौसेना तैयार चीन-पाकिस्तान रक्षा सहयोग के इस नए अध्याय ने हिंद महासागर में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है।लेकिन इंडियन नेवी द्वारा स्थिति की स्पष्ट निगरानी और स्वदेशी रक्षा क्षमता पर बढ़ते फोकस से यह संकेत मिलता है कि भारत किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति के लिए पूर्णतः तैयार है।

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