चुनाव आयोग BJP का सपना पूरा कर रहा”—अखिलेश यादव का बड़ा आरोप, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर तीखी राजनीतिक टकराहट

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 1 दिसंबर

देश की राजनीति में सोमवार को उस समय नई हलचल पैदा हो गई, जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर भारतीय जनता पार्टी के इशारों पर काम करने का आरोप लगाया। संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश ने कहा कि मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) के नाम पर भाजपा विपक्षी वोटों को योजनाबद्ध तरीके से काटवा रही है।

उन्होंने कहा कि SIR को “जल्दबाज़ी में, गैर–ज़रूरी दवाब के साथ और गलत मौसम में” कराया जा रहा है, जिससे बीएलओ (BLO) कर्मचारियों पर असहनीय कार्यभार पड़ गया है और कई कर्मचारियों की मौत की घटनाएँ भी सामने आई हैं।“शादी–समारोह के मौसम में SIR का चुनाव जानबूझकर”अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि SIR की टाइमिंग ही संदिग्ध है।उनके अनुसार—जिस समय लोग शादी–ब्याह में एक जगह से दूसरी जगह जा रहे हैं, उसी समय वोटर वेरीफिकेशन कराकर वोट कटाने की साज़िश चल रही है।

भाजपा का लक्ष्य साफ है—जहाँ विपक्ष मज़बूत है, वहाँ नाम काट दो।”उन्होंने कहा कि यूपी में अभी कोई चुनाव निर्धारित नहीं है, इसलिए SIR की इस जल्दबाज़ी का कोई प्रशासनिक औचित्य नहीं, बल्कि यह राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित लगता है।“

बीएलओ की मौत—परिवारों ने वोट काटने के दबाव का आरोप लगाया”अखिलेश ने कहा कि कई जगहों से BLO कर्मचारियों की मौत की खबरें आई हैं।उनके शब्दों में—बीएलओ पर फॉर्म बाँटने और भरवाने का इतना दवाब है कि वे रात–दिन गलियों में भटक रहे हैं। कुछ परिवारों ने तो आरोप लगाया है कि उनके करीबियों पर वोट काटने का दबाव था। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।”उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र में काम कर रहे निम्नस्तरीय कर्मचारियों के साथ अमानवीय व्यवहार है।

“चुनाव आयोग BJP की मंशा का औजार बन गया है”अखिलेश ने अपने आरोपों को और तीखा करते हुए कहा—चुनाव आयोग लोकतंत्र की रक्षा करे, BJP के सपने पूरे न करे।SIR का इस्तेमाल विपक्षी दलों का वोट बैंक खत्म करने के लिए किया जा रहा है।”उन्होंने कहा कि भाजपा असली मुद्दों—बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं—से ध्यान हटाना चाहती है और SIR इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

राजनीतिक विश्लेषण—क्या अखिलेश का आरोप नया मोर्चा खोल रहा?

चुनाव मान रहे हैं कि SIR को लेकर बढ़ते विवाद ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर फिर से राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।राजनीतिक विश्लेषक अनिल त्रिपाठी कहते हैं—यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े नेता ने EC की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हों। लेकिन इस बार आरोप सीधे BLO की मौतों और राजनीतिक दबाव से जुड़े हैं, जो मामले को गंभीर बना देता है।वहीं वरिष्ठ विश्लेषक मालती झा का कहना है UP में विपक्ष जिस तरह 2024 के बाद अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में है, SIR को वह ‘राजनीतिक खतरे’ के रूप में देख रहा है। भाजपा–विपक्ष का यह टकराव आने वाले महीनों का माहौल तय करेगा।”

“SIR ईमानदारी से हो, कोई मतदाता न छूटे”—अखिलेश की मांग

अखिलेश यादव ने यह स्पष्ट किया कि वे SIR के विरोध में नहीं, बल्कि उसकी निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं।उन्होंने कहा—हम चाहते हैं कि हर नागरिक का नाम मतदाता सूची में रहे। एक भी वोटर छूटना नहीं चाहिए। यह लोकतंत्र की मूल आत्मा है।”उन्होंने भाजपा पर मतदाताओं को वोट डालने से रोकने के कई पुराने आरोप भी दोहराए।

निष्कर्ष

SIR पर अखिलेश का हमला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल नहीं है—यह चुनाव आयोग की विश्वसनीयता,विपक्ष की राजनीतिक गतिशीलता,और UP की आने वाली चुनावी राजनीति तीनों को सीधे प्रभावित करने वाला बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।आने वाले दिनों में EC की प्रतिक्रिया, BJP का जवाब और विपक्ष की रणनीति इस विवाद की दिशा तय करेगी।

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