बी के झा
NSK

पटना/मुजफ्फरपुर, नई दिल्ली
4 अक्टूबर बिहार
विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही शराबबंदी कानून की चुनौती एक बार फिर सामने आ गई है। राज्य में 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार इस कानून को सख्ती से लागू करने का दावा करते रहे हैं। मगर इसके बावजूद चुनावी मौसम में शराब का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा।ताज़ा मामला मुजफ्फरपुर ज़िले का है, जहाँ उत्पाद विभाग ने गुरुवार देर रात तुर्की थाना क्षेत्र के थुम्हा गांव स्थित एक गोदाम पर छापा मारकर एक करोड़ रुपये मूल्य की विदेशी शराब बरामद की है। इस कार्रवाई ने न सिर्फ शराब माफियाओं की सक्रियता उजागर कर दी है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा कर दिया है कि चुनाव के ऐन पहले बिहार तक इतनी बड़ी खेप आखिर कैसे पहुँची?960 कार्टन विदेशी शराब बरामदछापेमारी के दौरान उत्पाद विभाग की टीम को गोदाम से 960 कार्टन विदेशी शराब मिली। इनमें विभिन्न नामी ब्रांड की बोतलें थीं, जिनकी कीमत बाज़ार में करोड़ों आंकी जा रही है। टीम ने मौके से एक टाटा 407 और एक पिकअप वाहन भी ज़ब्त किया, जिनमें शराब लोड करने की तैयारी थी।कार्रवाई के दौरान गोदाम के भीतर से पाँच सप्लायरों को दबोचा गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पश्चिमी चंपारण के रहने वाले मोतीलाल कुमार, बजरंगी कुमार, संतोष कुमार, राजेश कुमार और सूरज कुमार के रूप में हुई है।पंजाब से लाई गई थी खेपपूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ है कि जब्त शराब पंजाब से तस्करी कर बिहार लाई गई थी। यह खेप मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में सप्लाई की जानी थी। अधिकारियों का मानना है कि यह स्टॉक चुनावी माहौल में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल किया जाना था।उत्पाद विभाग के इंस्पेक्टर दीपक कुमार सिंह ने बताया कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि थुम्हा गांव के एक गोदाम में अवैध रूप से शराब का बड़ा स्टॉक रखा गया है। उसी सूचना के आधार पर विशेष टीम गठित कर छापेमारी की गई।चुनाव और शराब का पुराना रिश्ताबिहार में चुनाव आते ही शराब माफियाओं की हलचल बढ़ जाती है। शराबबंदी के बावजूद, हर चुनाव में करोड़ों रुपये की अवैध शराब जब्त होने की खबरें आती हैं। माना जाता है कि शराब को “वोट हासिल करने का हथियार” बनाकर इस्तेमाल किया जाता है। ग्रामीण इलाकों में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए शराब की बोतलें बाँटना कोई नई रणनीति नहीं है।इस बार भी वही तस्वीर उभर रही है। प्रशासन ने भले ही चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण कराने की तैयारी तेज़ कर दी हो, लेकिन माफिया लगातार नए-नए रास्ते तलाश रहे हैं। पंजाब और हरियाणा से लेकर उत्तर प्रदेश तक से अवैध शराब की खेप बिहार भेजे जाने की खबरें आ रही हैं।अब सवाल जनता के नाममुजफ्फरपुर में हुई यह बड़ी बरामदगी सिर्फ एक खेप नहीं, बल्कि चुनाव और शराब के “अटूट रिश्ते” की झलक है। जब्त मोबाइल फोन से पुलिस और उत्पाद विभाग अब बड़े नेटवर्क तक पहुँचने की कोशिश कर रहा है।लेकिन असली सवाल यह है कि—क्या बिहार की जनता इस बार फिर शराब की बोतलों के लालच में वोट डालेगी, या फिर एक ऐसे नेतृत्व को चुनेगी जो राज्य को विकास की राह पर ले जा सके?
