बी के झा
NSK

पटना / नई दिल्ली, 21 अक्टूबर
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयान बाज़ी तेज हो गई है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने मंगलवार को विपक्षी महागठबंधन पर जमकर निशाना साधा।
उन्होंने न केवल SIR मुद्दे पर विपक्ष को “भ्रम फैलाने वाला” करार दिया बल्कि लालू प्रसाद यादव के 15 साल के शासनकाल को दलितों और पिछड़े वर्गों के प्रति “उपेक्षा का प्रतीक” बताया।“लालू के राज में दलितों को वार्ड सदस्य बनने तक की अनुमति नहीं थी”
समाचार एजेंसी ‘एएनआई’ से बातचीत में उपेंद्र कुशवाहा ने कहा —जब लालू प्रसाद यादव बिहार में 15 साल तक सत्ता में रहे, तब किसी दलित को वार्ड सदस्य बनने तक की अनुमति नहीं थी। न तो दलित और अति पिछड़े वर्ग की महिलाओं को और न ही पुरुषों को वार्ड सदस्य बनने दिया गया।
कुशवाहा ने आरोप लगाया कि उस दौर में सामाजिक न्याय के नाम पर केवल राजनीतिक नारा उछाला गया, लेकिन जमीनी स्तर पर दलित और पिछड़े तबके को हाशिये पर ही रखा गया।
SIR मुद्दे पर बोले — जनता ने महागठबंधन को पहले ही कर दिया रिजेक्ट SIR (सामाजिक आर्थिक सर्वे) को लेकर विपक्ष के अभियान पर कुशवाहा ने कहा कि यह सिर्फ “लोगों को गुमराह करने का हथकंडा” है।
उन्होंने कहा —वो SIR पर जोर-शोर से चिल्ला रहे थे लेकिन क्या मिला? क्या आज जनता के बीच SIR कोई चर्चा का विषय है?
जनता ने पहले ही इन्हें रिजेक्ट कर दिया है।”कुशवाहा ने कहा कि महागठबंधन जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाकर राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब लोग सब समझ चुके हैं।
नीतीश कुमार की सरकार को बताया ‘सामाजिक समानता का प्रतीक’उपेंद्र कुशवाहा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार की सराहना करते हुए कहा कि जब एनडीए सरकार बनी तो उसने तुरंत ऐसी नीतियां बनाईं जिससे दलितों और पिछड़ों को समाज में प्रतिनिधित्व और सम्मान मिला।
उन्होंने कहा —नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने निचले तबके के लोगों को समाज के हर स्तर पर सम्मान दिलाने का काम किया है। आज पंचायत से लेकर विधानसभा तक हर जगह दलित और पिछड़े वर्ग की आवाज़ सुनी जा रही है।
महागठबंधन पर ‘महाभारत’ वाला तंज
बातचीत के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार के राजनीतिक हालात की तुलना महाभारत से करते हुए कहा —जिस तरह महाभारत में पहले से तय था कि कौन विजयी होगा, उसी तरह बिहार चुनाव में भी तय है कि एनडीए बहुमत के साथ सरकार बनाएगा।
कुशवाहा ने दावा किया कि जनता के मन में कोई भ्रम नहीं है और बिहार में एनडीए की सरकार आराम से बहुमत हासिल करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का तंज — “कुशवाहा जी बताएं, पांडव कौन हैं और दुर्योधन कौन?”
कुशवाहा के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।
एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने व्यंग्य करते हुए कहा —कुशवाहा जी की नजर में बिहार के मौजूदा चुनाव में आखिर पांडव कौन हैं और दुर्योधन कौन?
क्योंकि इस समय बिहार की सियासत इतनी उलझी हुई है कि यह तय कर पाना मुश्किल है कि कौन किसके साथ है।”
विश्लेषक ने आगे कहा कि बिहार के राजनीतिक समीकरण इतने जटिल हैं कि “कौन किससे हाथ मिलाएगा, यह तस्वीर 14 नवंबर के बाद ही साफ होगी।”“कुशवाहा खुद तय नहीं कर पाए हैं कि वो किस ओर हैं
”विश्लेषक ने तंज कसते हुए कहा कि उपेंद्र कुशवाहा खुद अभी इस स्थिति में नहीं हैं कि वे तय कर सकें कि उनका राजनीतिक भविष्य किस ओर सुरक्षित है।
उन्होंने कहा —कभी वो नीतीश कुमार के साथ दिखते हैं, तो कभी गृह मंत्री अमित शाह से नजदीकियां बढ़ाते हैं।
वहीं पप्पू यादव के हालिया बयान ने भी नया मोड़ दे दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार का सम्मान कांग्रेस गठबंधन में ही है।”ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि 14 नवंबर के बाद कौन किसके साथ खड़ा होता है और उपेंद्र कुशवाहा की कही “महाभारत” वाली उपमा में कौन पांडव बनेगा और कौन दुर्योधन।
निष्कर्ष
बिहार का यह चुनाव हर दिन नए बयानों, तंजों और आरोप-प्रत्यारोपों से गरमाता जा रहा है।उपेंद्र कुशवाहा का “महाभारत” वाला बयान न केवल चुनावी रंग में नया तड़का जोड़ गया है, बल्कि इसने राजनीतिक पंडितों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि इस सियासी युद्ध का कुरुक्षेत्र आखिर कहां तक जाएगा।
अब सबकी निगाहें 14 नवंबर पर हैं — जब यह तय होगा कि कौन सत्ता के सिंहासन पर बैठेगा और कौन विपक्ष की पंक्ति में खड़ा होगा।
