डीएनए, डर और व्यवस्था की चुप्पी: पटना में नीट छात्रा और दानापुर की राखी की मौत ने खड़े किए सवाल

बी के झा

पटना, 10 फरवरी

बिहार की राजधानी इन दिनों दो ऐसी मौतों की गवाह है, जिन्होंने न सिर्फ कानून व्यवस्था बल्कि राज्य की नैतिक और प्रशासनिक चेतना पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की रहस्यमयी मौत, दूसरी ओर दानापुर में 18 वर्षीय राखी कुमारी की संदिग्ध हत्या — दोनों मामलों में सवाल बहुत हैं, जवाब बेहद कम।

नीट छात्रा मामला: 22 डीएनए फेल, अब 10 और की बारी

पटना में रहकर नीट की तैयारी कर रही छात्रा के अंडरगारमेंट्स से मिले स्पर्म का रहस्य अब और गहराता जा रहा है।अब तक 22 लोगों के डीएनए सैंपल लिए गए, लेकिन किसी का भी मिलान नहीं हो सका।एसआईटी ने अब 10 और लोगों का डीएनए टेस्ट कराने का निर्णय लिया है।जांच अधिकारियों के अनुसार:जिन लोगों के मोबाइल नंबर मृतका के फोन में थे, उनसे पूछताछ हो चुकी है

हॉस्टल स्टाफ और कर्मचारियों से भी पूछताछ जारी है लेकिन अब तक किसी ठोस आरोपी तक जांच नहीं पहुंच पाई है

परिजनों का आरोप

मृतका के परिजन लगातार इस बात पर अड़े हैं कि“छह जनवरी को छात्रा के साथ अनहोनी पटना में ही हुई, न कि जहानाबाद में।”यह बयान सीधे तौर पर

हॉस्टल व्यवस्था

स्थानीय प्रशासन

और जांच एजेंसियों पर सवाल खड़े करता है।

सीबीआई जांच: भरोसे की आखिरी उम्मीद?

राज्य सरकार ने इस मामले में सीबीआई जांच की अनुशंसा केंद्र सरकार को भेज दी है। सूत्रों के अनुसार जल्द ही केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा नोटिफिकेशन जारी हो सकता है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है:“जब राज्य पुलिस की जांच पर भरोसा कमजोर पड़ता है, तब सीबीआई की मांग अपने आप राजनीतिक और सामाजिक दबाव बन जाती है।”लेकिन सवाल यह भी है कि

क्या सीबीआई जांच से सच सामने आएगा या मामला लंबी फाइलों में दफन हो जाएगा?

शिक्षाविदों की चिंता:

कोचिंग सिटी’ में असुरक्षित छात्राएं

पटना के एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने नाम न छापने की शर्त पर कहा:“यदि ईमानदारी से जांच हुई, तो बड़े-बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। यही वजह है कि जांच की रफ्तार और दिशा संदेह पैदा करती है।”उनका कहना है कि कोचिंग हब बन चुके शहरों में हॉस्टल व्यवसाय बिना निगरानी के फल-फूल रहा है छात्राएं संरक्षण नहीं, केवल किराया बनकर रह गई हैं

कानूनविदों की राय:

डीएनए सबूत के बावजूद खाली हाथ जांच वरिष्ठ कानूनविद मानते हैं कि स्पर्म का मिलना सिर्फ संकेत हैं लेकिन जब डीएनए मैच नहीं होता, तो

जांच की दिशा

सैंपल की चेन

और सबूतों की सुरक्षातीनों पर सवाल उठते हैं।एक आपराधिक कानून विशेषज्ञ कहते हैं:“या तो आरोपी जांच के दायरे से बाहर हैं, या फिर शुरुआती स्तर पर ही गंभीर चूक हुई है।”

हॉस्टलों पर सख्ती: सवाल उठने के बाद जागा प्रशासन

इसी मामले की पृष्ठभूमि में पटना के पीरबहोर थाना परिसर में गर्ल्स हॉस्टल संचालकों के साथ बैठक हुई।निर्देश दिए गए:चारों ओर सीसीटीवी कैमरे विजिटर रजिस्टर अनिवार्यऑडियो रिकॉर्डिंग वाले कैमरे वार्डेन और गार्ड का पुलिस सत्यापन हालांकि विपक्ष का कहना है:“यह कदम घटना के बाद उठाया गया — पहले क्यों नहीं?”दानापुर मामला: घर के भीतर ही मौत इसी बीच पटना के दानापुर में 18 वर्षीय राखी कुमारी की घर में संदिग्ध हालत में लाश मिलना एक और भयावह तस्वीर पेश करता है।

मृतका की नानी ने

पिता मनोज दास पर

गला दबाकर हत्या का आरोप लगाया है।

पुलिस ने:मामला दर्ज कर लियाआरोपी पिता को गिरफ्तार किया

शव का पोस्टमार्टम कराया नानी का बयान दिल दहला देने वाला है:“नतनी ने फोन पर कहा था कि पापा मार रहे हैं… जब पहुंचे तो वह मरी पड़ी थी।”

विपक्ष का हमला

विपक्षी दलों ने दोनों मामलों को लेकर सरकार पर हमला बोला है।उनका आरोप है:महिला सुरक्षा सिर्फ भाषणों में हैअपराध के बाद कार्रवाई होती है, पहले रोकथाम नहीं

प्रशासन दबाव में काम कर रहा है

निष्कर्ष:

दो मौतें, एक सवालनीट छात्रा और राखी कुमारी —दो अलग कहानियां,लेकिन सवाल एक:

क्या बिहार में बेटियां सुरक्षित हैं?

क्या जांच एजेंसियां स्वतंत्र हैं?

और क्या सच कभी सामने आएगा?जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते,तब तक डीएनए रिपोर्ट, एफआईआर और बैठकों के बीचन्याय सिर्फ एक वादा बना रहेगा।

NSK News NSK News NSK News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *