बी के झा
NSK

ढाका / नई दिल्ली, 23 नवंबर
बांग्लादेश की राजनीति इन दिनों उथल-पुथल के चरम पर है। राजधानी ढाका की सड़कों पर शनिवार और रविवार का पूरा दिन प्रदर्शनकारियों की भीड़ उमड़ती रही। जगह-जगह नारों की गूंज, प्रतिरोध के मार्च और प्रतीकात्मक फांसी के मंचन ने माहौल को विस्फोटक बना दिया।पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध और 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान कथित हत्याकांड में दोषी मानते हुए अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल (ICT) द्वारा 17 नवंबर को सुनाई गई मौत की सजा ने पूरे देश को राजनीतिक विभाजन की आग में झोंक दिया है।हसीना देश से बाहर हैं और अदालत में उपस्थित नहीं थीं। लेकिन फैसला आने के बाद से उनके प्रत्यर्पण और फांसी की मांग राजकीय एजेंडा को पीछे छोड़ जनभावनाओं का तूफान बन गई है।
बीएनपी–जमात ए इस्लामी की विशाल रैली: ढाका से शाहबाग तक गरजा जन सैलाब रविवार को राजधानी ढाका में मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और इस्लाम वाली संगठन जमात-ए-इस्लामी की संयुक्त रैली ने माहौल को चरम पर पहुंचा दिया।ढाका विश्वविद्यालय परिसर, शाहबाग, मोतीलाल कॉलोनी, प्रेस क्लब—
हर जगह एक ही स्वर सुनाई दिया:“हसीना को फांसी दो!”“भारत से प्रत्यर्पित करो!”“हमारे शहीदों को न्याय दो!”हजारों छात्रों, विपक्षी कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवारों ने भाग लिया। ढाका विश्वविद्यालय के एक छात्र राफी ने कहा—“हमारे साथियों की हत्या का आदेश हसीना ने दिया। न्याय केवल फांसी है।”बीएनपी नेता का तीखा बयान: “भागी गुंडे को भारत सौंपे”रैली में बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा:“यह फैसला तानाशाही के पतन की शुरुआत है। भारत को उसे तुरंत सौंपना चाहिए, जिसने देश में खून-खराबा कराया।
”जमात के महासचिव मिया गोलाम परवार ने बयान दिया—“1.8 करोड़ लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है। अब न्याय तभी पूरा होगा जब हसीना को फांसी दी जाएगी।
”पृष्ठभूमि:
2024 के ‘कोटा आंदोलन’ में 1,400 मौतें, 14,000 घायल हसीना को मिली सजा की जड़ें 2024 के जुलाई–अगस्त के छात्र आंदोलन से जुड़ी हैं।सरकारी नौकरियों में 30% कोटा बहाल किए जाने के खिलाफ छात्रों का आंदोलन देशव्यापी विद्रोह में बदल गया था।संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार—1,400 लोग मारे गए14,000 घायल हुए सैकड़ों अब भी लापता सरकार पर पुलिस बल, रैपिड एक्शन बटालियन और अर्धसैनिक गैंगों के बलपूर्वक दमन का आरोप लगा था।इसी हिंसा के लिए ICT ने हसीना और पूर्व गृहमंत्री असदु ज्जमान खान कमाल को दोषी ठहराया।
ढाका का माहौल जटिल:
विपक्ष का दबदबा, अवामी लीग का प्रतिबंध, कट्टरपंथी एजेंडा भी सक्रिय अंतरिम सरकार प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने फरवरी 2026 में चुनाव कराने का वादा किया है, लेकिन ruling पार्टी अवामी लीग के प्रतिबंधित होने से संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया है।इस बीच हसीना के समर्थकों ने 13–17 नवंबर को देशव्यापी लॉकडाउन किया, बसें जलाई गईं, ढाका ठप पड़ा।रविवार की विपक्षी रैली में चुनाव सुधारों के अलावा जमात ने—अहमदिया समुदाय को “काफिर” घोषित करने का विवादास्पद प्रस्ताव भी उठा दिया, जिसने आंदोलन की गंभीरता को नई दिशा दे दी।पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। वहीं ‘मौलिक बांग्ला’ नामक संगठन ने शाहबाग में शेख हसीना की प्रतीकात्मक फांसी का मंचन कर माहौल और उग्र कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: एमनेस्टी और यूएन ने दी चेतावनी
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस ट्रायल को अनुचित कहा संयुक्त राष्ट्र ने न्यायसंगत जांच की मांग की लेकिन फांसी का विरोध भी किया पश्चिमी देश बांग्लादेश में बढ़ती अस्थिरता को लेकर चिंतित हैं हसीना ने खुद इस फैसले को “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताया है।उनका कहना है कि अवामी लीग को हटाने और चुनाव को प्रभावित करने के लिए अंतरिम सरकार और विपक्ष ने यह माहौल बनाया है।
राजनीतिक विश्लेषण: बांग्लादेश एक निर्णायक मोड़ पर विशेषज्ञों के अनुसार—हसीना के खिलाफ सजा औरविपक्ष–इस्लाम वादियों की संयुक्त ताकत आने वाले चुनावों से पहले देश को अस्थिरता और धार्मिक ध्रुवीकरण की ओर धकेल सकती है। पीड़ित परिवारों का मत बिल्कुल साफ है:“जब तक हसीना को फांसी नहीं दी जाती, न्याय अधूरा रहेगा।”लेकिन दूसरी ओर यह भी आशंका है कि इस ‘न्याय आंदोलन’ की आड़ में कट्टरपंथी ताकतें भी सक्रिय हो चुकी हैं।
निष्कर्ष:
बांग्लादेश बारूद के ढेर पर—अगला कदम किसका भारी पड़ेगा?
ढाका की सड़कों पर आज जो जनसैलाब उमड़ा है, वह देश के भविष्य की दिशा तय करेगा।क्या यह आंदोलन न्याय की ओर ले जाएगा, या राजनीतिक प्रतिशोध, धार्मिक कट्टरवाद और अंतरराष्ट्रीय दबाव बांग्लादेश को और अस्थिर कर देगा?
अगले कुछ सप्ताह इस पूरे परिदृश्य को निर्णायक रूप से बदल सकते हैं।
