बी के झा
पटना, 7 नवंबर
बिहार के चुनावी माहौल में शुक्रवार का दिन गर्मागर्म बयानबाज़ी के नाम रहा। जन सुराज आंदोलन के प्रमुख प्रशांत किशोर (PK) ने डिप्टी सीएम और तारापुर से बीजेपी उम्मीदवार सम्राट चौधरी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “जो नेता पूरे बिहार में जीत का दावा कर रहे हैं, उन्हें पहले अपनी ही सीट तारापुर की चिंता कर लेनी चाहिए।”
PK का तंज:
दूसरों की रैलियां छोड़ें, पहले अपनी सीट का हाल बताएं प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा—“सम्राट चौधरी बताएं कि तारापुर जीत रहे हैं या हार रहे हैं? इतने बड़े नेता हैं, लेकिन अपना चुनाव छोड़कर अमित शाह और राजनाथ सिंह की रैलियों में घूम रहे हैं। अगर इतना भरोसा है तो अपने काम के दम पर चुनाव लड़ें।”
PK का यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। माना जा रहा है कि इसका सीधा असर तारापुर सीट के समीकरणों पर पड़ सकता है।
मतदान प्रतिशत बढ़ने पर PK ने दिया बड़ा बयानपहले चरण में रिकॉर्डतोड़ वोटिंग पर भी प्रशांत किशोर ने सरकार और राजनीतिक दलों को संदेश देने की कोशिश की।
उन्होंने कहा—“इस बार आजादी के बाद सबसे ज्यादा मतदान हुआ है। महीनों से कह रहा हूं कि 60% से ज्यादा लोग बदलाव चाहते हैं। जन सुराज ने उन्हें विकल्प दिया है।”“छठ के बाद भी जो प्रवासी मजदूर बिहार में रुके हैं, वे इस चुनाव का सबसे बड़ा एक्स फैक्टर हैं।”PK ने दावा किया कि 14 नवंबर को बिहार “ऐतिहासिक फैसला” करेगा और राज्य की राजनीति नई दिशा लेगी।पहले चरण की मतदान रिकॉर्ड: बिहार ने तोड़ा 73 साल का इतिहास 06 नवंबर को हुए पहले चरण के मतदान में बिहार ने इतिहास रच दिया।
निर्वाचन आयोग के अनुसार:121 सीटों पर 64.66% मतदान,1951 के बाद किसी भी विधानसभा या लोकसभा चुनाव से ज्यादा,पहली बार राज्य में इस स्तर का रिकॉर्ड,करीब 3.75 करोड़ मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह।पिछले रिकॉर्ड:लोकसभा: 64.6% (1998)विधानसभा: 62.57% (2000)इस बार के आंकड़ों ने दोनों रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। यह मतदाताओं की बढ़ती जागरूकता और लोकतंत्र के प्रति विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।
तारापुर का बदलता समीकरण
स्थानीय पत्रकारों की क्या राय?
स्थानीय राजनीतिक पत्रकारों और ज़मीनी विश्लेषकों ने भी प्रशांत किशोर की टिप्पणी का समर्थन करते हुए बड़ा दावा किया है। उनके अनुसार:“इस बार सम्राट चौधरी के लिए चुनाव परिणाम भगवान भरोसे है।”“जन सुराज के उम्मीदवार ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाकर बीजेपी के लिए राहुकाल पैदा कर दिया है।”“सम्राट चौधरी ऊपर से जितना धाकड़ दिखते हैं, उतना ही अंदर से जानते हैं कि मतदाता इस बार चुपचाप बड़ा संदेश दे गए हैं।”तारापुर सीट पर मतदाताओं की चुप्पी और अधिक मतदान ने चुनाव को बेहद रोमांचक बना दिया है।
राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि PK के आंदोलन का इस क्षेत्र में अप्रत्याशित असर देखने को मिल रहा है।
निष्कर्ष
बिहार का चुनावी रण अब चरम पर है। प्रशांत किशोर और सम्राट चौधरी जैसे बड़े नामों में सीधी ठन गई है। बढ़ा हुआ मतदान यह संकेत दे रहा है कि जनता इस बार गंभीर मन से बदलाव की ओर देख रही है।तारापुर सीट पर मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है—और 14 नवंबर को पता चलेगा कि मतदाता किसकी दावेदारी को स्वीकार करते हैं और किसे सबक सिखाते हैं।
NSK

