दरभंगा की रैली में योगी का वार — “इंडी गठबंधन के तीन बंदर: पप्पू, टप्पू और अप्पू”

बी के झा

NSK





दरभंगा / नई दिल्ली 3 नवंर

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान नज़दीक आते ही राज्य का सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। दरभंगा में रविवार को हुई एनडीए की चुनावी रैली में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार किया और अपने खास अंदाज़ में माहौल गरमा दिया।

सीएम योगी ने गांधीजी के तीन बंदरों का ज़िक्र करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा —

आपने गांधीजी के तीन बंदरों के बारे में सुना होगा — बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत कहो। अब ‘इंडी गठबंधन’ के तीन नए बंदर आ गए हैं —

पप्पू, टप्पू और अप्पू!उनके इस बयान पर मंच से लेकर भीड़ तक तालियों की गूंज गूंज उठी। योगी ने कहा कि कांग्रेस ने देश को बार-बार कमजोर किया और कश्मीर को विवादित बनाकर देश की एकता को चोट पहुंचाई।

कश्मीर को विवादित किसने बनाया? कांग्रेस ने! लेकिन मोदी जी और अमित शाह जी ने उसे आतंकवाद से मुक्त कराया,” उन्होंने जोश भरे अंदाज़ में कहा।

तेजस्वी पर चिराग का तंज —

“मुंगेरीलाल के हसीन सपने”इसी मंच से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने भी तेजस्वी यादव को निशाने पर लिया।

उन्होंने कहा —

सपने देखना गलत नहीं है, लेकिन तेजस्वी जी ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपनों’ में जी रहे हैं। बिहार की जनता 14 नवंबर को एक बार फिर नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनाएगी।चिराग ने आगे कहा कि बिहार अब उस दौर में लौटना नहीं चाहता, जब अपराध और अराजकता चरम पर थी।लोगों को आज भी ‘जंगल राज’ की याद है। बिहार अब विकास चाहता है, डर नहीं,”

उन्होंने जोड़ाचुनाव प्रचार का आखिरी दौर —

बढ़ती तल्ख़ ज़ुबानेंपहले चरण का मतदान 6 नवंबर को होना है, और जैसे-जैसे प्रचार का आख़िरी दौर नज़दीक आ रहा है, नेताओं की भाषा और वार्तालाप में तल्ख़ी बढ़ती जा रही है।

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जैसे-जैसे तारीख़ पास आ रही है, हर पार्टी अपने समर्थकों को साधने के लिए हर संभव शब्दिक हथियार का इस्तेमाल कर रही है।दरभंगा की इस रैली में योगी आदित्यनाथ और चिराग पासवान के बयानों ने न केवल माहौल को गर्म किया, बल्कि सियासी गलियारों में नई बहस भी छेड़ दी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार बिहार का चुनाव “विकास बनाम वादों” के साथ-साथ “बयानबाज़ी बनाम मर्यादा” की लड़ाई में भी बदलता जा रहा है।

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