बी के झा
NSK

लखनऊ/ नई दिल्ली, 15 दिसंबर
मीरा–भायंदर–वसई–विरार पुलिस आयुक्तालय की क्राइम ब्रांच ने संगठित अपराध की दुनिया में एक बड़ी कड़ी को पकड़ते हुए दाऊद इब्राहिम गैंग से जुड़े कुख्यात गैंगस्टर सुभाष सिंह ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया है। उत्तर प्रदेश के फतेहगढ़ केंद्रीय कारागृह से हुई यह गिरफ्तारी सिर्फ एक आरोपी की धरपकड़ नहीं, बल्कि मुंबई महानगर से सटे वसई–विरार बेल्ट में सक्रिय संगठित अपराध की उस जड़ तक पहुंचने की कोशिश है, जिसकी छाया वर्षों से इस इलाके पर पड़ी रही है।
सुभाष सिंह ठाकुर की गिरफ्तारी 26 फरवरी 2022 को विरार के मनवेलपाड़ा इलाके में हुए बिल्डर समय चौहान हत्याकांड में की गई है। दिनदहाड़े हुई इस गोलीकांड ने उस समय पूरे इलाके को दहला दिया था। शुरू से ही इस हत्याकांड के पीछे साजिशकर्ता के तौर पर सुभाष सिंह ठाकुर का नाम सामने आ रहा था, लेकिन वह कानून की पकड़ से बाहर था।
क्या है पूरा मामला?
विरार निवासी चॉल बिल्डर समय चौहान की 26 फरवरी 2022 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में पुलिस ने मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) के तहत अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच आगे बढ़ी तो साजिश की डोर सीधे सुभाष सिंह ठाकुर तक पहुंची।
हालांकि, सुभाष सिंह ठाकुर उस वक्त उत्तर प्रदेश में जेजे हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहा था। 2019 से वह इलाज के नाम पर बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती था, जिसके चलते उसकी गिरफ्तारी संभव नहीं हो सकी। वर्ष 2024 में जब उसे पुनः कारागृह भेजा गया, तब पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया तेज की।सोमवार को क्राइम ब्रांच की टीम यूपी रवाना हुई और उसे कस्टडी में लिया।
पुलिस उपायुक्त (अपराध) संदीप डोईफोडे के अनुसार, आरोपी को मंगलवार को वसई लाया जाएगा।अपराध का ‘गॉडफादर’ और स्थानीय नेटवर्कपुलिस सूत्रों के अनुसार, वसई–
विरार क्षेत्र में सक्रिय कई अपराधियों को सुभाष सिंह ठाकुर का संरक्षण प्राप्त था। जमीन, बिल्डिंग, वसूली और सुपारी किलिंग जैसे मामलों में उसके इशारे पर ही कई वारदातें अंजाम दी गईं।क्राइम ब्रांच को उम्मीद है कि उसकी पुलिस हिरासत से कई पुराने और दबे हुए मामलों का खुलासा हो सकता है।
क्यों दाऊद इब्राहिम का खास था सुभाष?अंडरवर्ल्ड के गलियारों में सुभाष सिंह ठाकुर को दाऊद इब्राहिम का भरोसेमंद माना जाता रहा है। बताया जाता है कि दाऊद की बहन के पति की हत्या के बाद, दाऊद के कहने पर सुभाष सिंह ठाकुर ने उस हत्या में शामिल आरोपियों को मरवाया था। इसी घटना के बाद वह दाऊद के बेहद करीबी लोगों में शुमार हो गया।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
हिन्दू संगठनों की प्रतिक्रियाएक प्रमुख हिन्दू संगठन के पदाधिकारी ने कहा,वसई–विरार जैसे तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में अंडरवर्ल्ड का दखल बेहद चिंताजनक है। सुभाष सिंह ठाकुर की गिरफ्तारी से यह साफ होता है कि अपराध और जमीन माफिया का गठजोड़ कितना गहरा था। हम मांग करते हैं कि पूरे नेटवर्क को बेनकाब किया जाए।”
विपक्षी दलों का हमला एक विपक्षी दल के वरिष्ठ नेता ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा,यह गिरफ्तारी स्वागतयोग्य है, लेकिन सवाल यह है कि इतना बड़ा अपराधी वर्षों तक सिस्टम से बाहर कैसे रहा? इलाज के नाम पर जेल से बाहर रहना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। सरकार को जवाब देना चाहिए।
”राजनीतिक विश्लेषकों की रायराजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह मामला सिर्फ आपराधिक नहीं, बल्कि शहरी विकास और राजनीति से भी जुड़ा है।एक विश्लेषक के अनुसार,जहां रियल एस्टेट तेज़ी से बढ़ता है, वहां अंडरवर्ल्ड की दिलचस्पी भी बढ़ती है। वसई–विरार इसका उदाहरण है।
सुभाष सिंह ठाकुर की गिरफ्तारी से यह बहस फिर तेज होगी कि संगठित अपराध को राजनीतिक संरक्षण तो नहीं मिला।”
कानून के जानकार क्या कहते हैं?
वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार सिंह और कानून विशेषज्ञों का कहना है कि मकोका के तहत यह मामला बेहद अहम है।एक कानूनी विशेषज्ञ ने कहा,यदि पुलिस सुभाष सिंह ठाकुर के खिलाफ मजबूत सबूत पेश करने में सफल रहती है, तो यह केस संगठित अपराध पर एक नजीर बनेगा। साथ ही, उसके नेटवर्क में शामिल सफेदपोशों तक भी कानून का शिकंजा कस सकता है।
”आगे क्या?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस हिरासत में सुभाष सिंह ठाकुर से पूछताछ में किन-किन राज़ों से पर्दा उठता है। क्या वसई–
विरार बेल्ट में सक्रिय अपराध का पूरा तंत्र बेनकाब होगा? क्या अंडरवर्ल्ड के पुराने साये एक बार फिर जांच के घेरे में आएंगे?फिलहाल, एक बात तय है—
दाऊद के नाम से पहचाने जाने वाले इस ‘मेंटोर’ की गिरफ्तारी ने अंडरवर्ल्ड, राजनीति और कानून—
तीनों के बीच छिपे रिश्तों पर नई बहस छेड़ दी है।
