बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 24 मई
भारत की राजधानी इन दिनों आग उगलती धूप और झुलसा देने वाली गर्मी से तप रही है। सड़कें तवे की तरह दहक रही हैं और लोगों का दिन में बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। ऐसे में पहली बार भारत दौरे पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio भी दिल्ली की इस प्रचंड गर्मी से अछूते नहीं रह सके।
दिल्ली में नए अमेरिकी कॉन्सुलेट ऑफिस के उद्घाटन समारोह के दौरान मंच पर पहुंचते ही रुबियो ने गर्मी को लेकर ऐसा हल्का-फुल्का तंज कसा कि पूरा सभागार ठहाकों से गूंज उठा। उनका अंदाज कूटनीतिक कम और दोस्ताना ज्यादा नजर आया।उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा,“आज यहां आना मेरे लिए सम्मान की बात है, लेकिन मैं अपनी बात ज्यादा लंबी नहीं रखूंगा… क्योंकि यहां सच में बहुत गर्मी है।”इसके बाद उन्होंने अपने गृहनगर मियामी का जिक्र करते हुए कहा,“
हालांकि यहां मियामी जैसी उमस नहीं है। मैं मियामी से हूं, इसलिए मुझे अच्छी तरह पता है कि उमस वाली गर्मी और तपती गर्मी में क्या फर्क होता है।
वैसे अभी समय क्या हुआ है?
अब तक तो मौसम थोड़ा ठंडा हो जाना चाहिए था।”रुबियो की इस टिप्पणी ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला दी। सोशल मीडिया पर भी उनका यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे “दिल्ली की गर्मी पर विदेशी मेहमान की सटीक प्रतिक्रिया” बता रहे हैं।
गर्मी के बीच कूटनीति का संदेश
हालांकि माहौल हल्का था, लेकिन मंच से दिया गया उनका संदेश बेहद गंभीर और रणनीतिक महत्व का था। रुबियो ने नए अमेरिकी कॉन्सुलेट कार्यालय को भारत-अमेरिका संबंधों का मजबूत प्रतीक बताते हुए कहा कि यह केवल वीजा सेवा केंद्र नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और सहयोग का नया अध्याय है।उन्होंने कहा कि इस आधुनिक फैसिलिटी से अमेरिकी करदाताओं का पैसा बचेगा, कामकाज ज्यादा प्रभावी होगा और यहां तैनात अधिकारी बेहतर ढंग से अपनी जिम्मेदारियां निभा सकेंगे। उन्होंने उन अधिकारियों की भी सराहना की जो सुरक्षा और कूटनीतिक मिशनों के लिए दिन-रात काम करते हैं।
विदेश मंत्री बनने के बाद पहला भारत दौरा
विदेश मंत्री बनने के बाद Marco Rubio का यह पहला भारत दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। अपने दौरे के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक सुरक्षा, व्यापार, इंडो-पैसिफिक रणनीति, रक्षा सहयोग और उभरती तकनीकों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।विशेषज्ञों की मानें तो फरवरी 2025 में पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की मुलाकात के बाद यह भारत-अमेरिका संबंधों की सबसे महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठकों में से एक रही।
तपती दिल्ली, गर्म होते रिश्ते
दिल्ली की गर्मी भले ही विदेशी मेहमानों को बेचैन कर रही हो, लेकिन भारत और अमेरिका के रिश्तों में लगातार बढ़ती गर्माहट दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है। रुबियो का यह दौरा साफ संकेत देता है कि बदलती वैश्विक राजनीति के बीच वॉशिंगटन और नई दिल्ली अब पहले से कहीं ज्यादा करीब आते दिख रहे हैं।
