बी के झा
NSK


नई दिल्ली, 15 फरवरी
राजधानी की जहरीली होती हवा ने एक बार फिर दिल्ली की राजनीति को गर्मा दिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक वीडियो साझा किए जाने के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
सौरभ भारद्वाज ने इस वीडियो को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सरकार के एक साल पूरे होने पर “सर्टिफिकेट” बताते हुए तीखा राजनीतिक संदेश दिया है।दरअसल, आगामी 20 फरवरी को रेखा गुप्ता सरकार का एक वर्ष पूरा होने जा रहा है। इससे पहले सौरभ भारद्वाज ने योगी आदित्यनाथ के उस बयान को सामने रखा, जिसमें वे दिल्ली की वायु गुणवत्ता की तुलना “गैस चेम्बर” से करते नजर आते हैं।
भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर लिखा—“CM आदित्यनाथ का CM रेखा गुप्ता सरकार को एक साल पूरा होने पर सर्टिफिकेट।”
‘दिल्ली गैस चेम्बर जैसी’—योगी का बयान बना सियासी हथियार
वीडियो में योगी आदित्यनाथ कहते हैं,“देख रहे हो ना दिल्ली में किस तरह घुटन भरी जिंदगी हो गई है। ऐसा लगता है जैसे गैस चेम्बर में हों। एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 से ऊपर है। दम घुटता है, आंखों में जलन होती है, सांस लेने में दिक्कत होती है। डॉक्टरों को कहना पड़ता है कि बुजुर्ग, बीमार और बच्चे घर से बाहर न निकलें।”
AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने इन्हीं शब्दों के सहारे दिल्ली सरकार की पर्यावरण नीति, प्रदूषण नियंत्रण उपायों और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि जब सरकार अपने एक साल की उपलब्धियां गिनाने की तैयारी कर रही है, तब राजधानी की हवा खुद सरकार के कामकाज का हाल बयां कर रही है।
गोरखपुर मॉडल की चर्चा, दिल्ली पर परोक्ष तंज
योगी आदित्यनाथ ने अपने बयान में गोरखपुर की स्वच्छ आबोहवा की सराहना करते हुए कहा,“गोरखपुर में शानदार माहौल है। कहीं दमघोंटू स्थिति नहीं। क्योंकि पर्यावरण को आप बचाएंगे तो पर्यावरण आपको बचाएगा।”यह बयान गोरखपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया गया, जहां 2.47 करोड़ रुपये की लागत से बने नवनिर्मित कल्याण मंडपम् (कन्वेंशन सेंटर) का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर राप्तीनगर विस्तार स्पोर्ट्स सिटी आवासीय योजना के अंतर्गत EWS/LIG श्रेणी के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए।
योगी ने गोरखपुर को “विकास का नया मॉडल” बताते हुए AIIMS, मेडिकल कॉलेज, बेहतर सड़कें और फर्टिलाइजर कारखाने जैसी परियोजनाओं का उल्लेख किया।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय: मुद्दा असली, सियासत तीखी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सौरभ भारद्वाज का यह कदम सिर्फ एक वीडियो शेयर करना नहीं, बल्कि दिल्ली सरकार के एक साल के मूल्यांकन की वैकल्पिक पटकथा पेश करना है। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार के अनुसार, “दिल्ली में प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण का नहीं, बल्कि राजनीतिक विश्वसनीयता का मुद्दा बन चुका है।
विपक्ष इसे सरकार की विफलता के प्रतीक के रूप में पेश कर रहा है।”
कानूनविदों का कहना है कि वायु प्रदूषण से जुड़े मामलों में पहले ही अदालतें सख्त टिप्पणियां कर चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) समय-समय पर दिल्ली सरकार और केंद्र दोनों से जवाब मांगते रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक आरोपों के साथ-साथ कानूनी दबाव भी सरकार पर बना हुआ है।
पर्यावरण विशेषज्ञों की चेतावनी
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि AQI का 400 के पार जाना केवल मौसमी समस्या नहीं, बल्कि नीतिगत असफलताओं का परिणाम है। वरिष्ठ पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, “जब तक वाहनों, निर्माण गतिविधियों, पराली और औद्योगिक प्रदूषण पर समन्वित कार्रवाई नहीं होगी, तब तक हर सर्दी में यही हाल रहेगा—चाहे सरकार कोई भी हो।”
अन्य विपक्षी दलों का हमला
AAP के अलावा कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भी दिल्ली सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रदूषण पर आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर ठोस समाधान की जरूरत है। वहीं कुछ क्षेत्रीय दलों ने इसे “सरकार की प्राथमिकताओं की विफलता” बताया।
दिल्ली सरकार की प्रतिक्रिया
दिल्ली सरकार के सूत्रों का कहना है कि प्रदूषण एक जटिल और बहु-राज्यीय समस्या है, जिसे केवल दिल्ली सरकार के खाते में नहीं डाला जा सकता। सरकार का दावा है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, ग्रीन कवर बढ़ाने और निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण जैसे कई कदम उठाए गए हैं। सरकार ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह गंभीर मुद्दे पर राजनीति कर रहा है।
हवा से जुड़ा सवाल, सियासत से आगे
दिल्ली की वायु गुणवत्ता लंबे समय से जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है। सर्दियों में AQI का 400 पार करना अब अपवाद नहीं, बल्कि नियम सा बन गया है। ऐसे में योगी आदित्यनाथ के बयान को राजनीतिक हथियार बनाकर सौरभ भारद्वाज का हमला इस ओर इशारा करता है कि आने वाले दिनों में पर्यावरण और प्रदूषण दिल्ली की राजनीति के सबसे बड़े मुद्दों में शामिल रहेंगे।
एक ओर सरकार अपने एक साल पूरे होने की उपलब्धियां गिनाने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर विपक्ष का सवाल सीधा है—
क्या राजधानी की सांसें सुरक्षित हैं?
और यही सवाल इस “सर्टिफिकेट” को महज सियासी व्यंग्य से आगे बढ़ाकर, एक गंभीर चेतावनी और जनचिंता का विषय बना देता है।
