बी के झा
नई दिल्ली, 18 नवंबर
लाल क़िला क्षेत्र में चलती कार से धमाका करने वाले आतंकी मोहम्मद उमर नबी को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसियों के हाथ उमर का एक नया वीडियो लगा है जिसमें वह धारा प्रवाह अंग्रेजी में बैठकर ‘सुसाइड बॉम्बिंग’ को वैचारिक रूप से सही ठहराने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है।
यह वीडियो आतंकी हमले से ठीक पहले रिकॉर्ड किया गया माना जा रहा है, जिससे उसकी मानसिक स्थिति और कट्टरपंथी सोच पर कई नए संकेत मिल रहे हैं।कमरे में अकेले बैठा आतंकी, कैमरे के सामने बयान—
‘आत्मघाती हमलों को गलत समझा गया है’वीडियो में उमर नबी एक सादा कमरे में अकेले बैठा दिखाई देता है। टी-शर्ट पर लैपल माइक लगाकर वह बड़े इत्मीनान से कैमरे की ओर देखकर बयान देता है। उसकी देह भाषा से लगता है कि वह कोई प्रचार सामग्री तैयार कर रहा हो।
उमर वीडियो की शुरुआत में कहता है—“
People make the biggest mistake when they fail to understand what suicide bombing truly is.”
(लोग सबसे बड़ी गलती तब करते हैं जब वे समझ ही नहीं पाते कि आत्मघाती हमला दरअसल होता क्या है।)
वह आगे तर्क देते हुए विभिन्न ‘विरोधाभासों’ और ‘तर्कों’ की बात करता है, जिनके अनुसार उसके मुताबिक समाज आत्मघाती हमलों को सही संदर्भ में नहीं देख पाता।‘मृत्यु को मंज़िल मानना खतरनाक मानसिक स्थिति’ — उमर नबीआगे वह आत्मघाती हमलावरों की मानसिकता पर बोलते हुए कहता है—
“When a person convinces himself that death at a certain time and place is inevitable, he enters a dangerous state of mind.”
यानी, जब कोई व्यक्ति यह मान ले कि किसी निश्चित स्थान और समय पर उसकी मौत तय है, तो वह खतरनाक मानसिक स्थिति में प्रवेश कर जाता है।उमर कहता है कि यह सोच व्यक्ति को इस भ्रम में डाल देती है कि मौत ही उसका अंतिम लक्ष्य है—
और यही वह वैचारिक जहर है जिसे कई आतंकी संगठन अपने सदस्यों के भीतर भरते हैं।‘मानव व्यवस्था में यह स्वीकार्य नहीं’ —
फिर भी आतंकी बचाव करता दिखा दिलचस्प बात यह है कि उमर अपने ही तर्कों के बीच यह भी कहता है कि यह मानसिकता किसी भी लोकतांत्रिक या मानवीय समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकती क्योंकि यह जीवन, समाज और कानून की बुनियादी अवधारणाओं के खिलाफ है।
लेकिन उसके शब्दों का लहजा साफ दर्शाता है कि वह इन विरोधाभासों को समझाने के बहाने असल में ‘सुसाइड बॉम्बिंग’ को वैचारिक आवरण देने की कोशिश कर रहा है।वीडियो का आखिरी हिस्सा गायब, कई सवालों के जवाब बाकी वीडियो यहीं पर खत्म हो जाता है। इससे यह साफ नहीं हो पाता कि उमर आगे क्या कहना चाहता था और क्या वह किसी बड़े संदेश या धमकी की तैयारी में था।
जांच एजेंसियाँ यह भी परख रही हैं कि—यह वीडियो अकेले रिकॉर्ड किया गया था या किसी मॉड्यूल की पटकथा का हिस्सा था,क्या यह वीडियो किसी खास संगठन को भेजा गया था,या आतंकी हमले से पहले ‘वैचारिक संदेश’ फैलाने की कोशिश थी।
वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज
मनोविज्ञान विशेषज्ञों का मानना है कि यह वीडियो आतंकी संगठनों की वैचारिक ट्रेनिंग और आत्मघाती हमलावरों की सोच को समझने में बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।जो वैज्ञानिक चरमपंथ और हिंसक कट्टरता का अध्ययन करते हैं, उनके लिए यह रिकॉर्डिंग एक मूल्यवान साक्ष्य बन सकती है। इसमें उमर की भाषा, लहजा, ठहराव, और तर्कों की संरचना—
सब उसके मानसिक ढांचे की कई परतों को उजागर करती है।हमले से पहले का यह वीडियो कई परतें खोलेगा
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह वीडियो धमाके की साजिश के पीछे की वैचारिक तैयारी और आतंकी मॉड्यूल की गतिविधियों पर महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है।
उमर नबी की गिरफ्तारी के बाद मिले डिजिटल सबूतों के साथ इसे मिलाकर कई बड़े खुलासों की उम्मीद की जा रही है।
NSK

