बी के झा
लखनऊ, 22 दिसंबर
उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र मंगलवार को उस वक्त राजनीतिक रणभूमि में बदल गया, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोडीन कफ सिरप के अवैध कारोबार पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व पर बिना नाम लिए ऐसा हमला बोला, जिसने विपक्ष को तिलमिला दिया।मुख्यमंत्री के शब्दों में तल्खी थी, व्यंग्य था और सीधा राजनीतिक संदेश भी—
“देश में राजनीति के दो नमूने हैं। एक दिल्ली में बैठते हैं, दूसरा लखनऊ में। जैसे ही देश में कोई गंभीर मुद्दा आता है, दोनों देश छोड़कर भाग जाते हैं।”योगी ने तंज कसते हुए कहा कि “आपके बबुआ भी अब शायद इंग्लैंड की यात्रा पर निकलने वाले होंगे और आप लोग यहां सदन में सिर्फ चिल्लाते रह जाएंगे।”नाम नहीं लिया, लेकिन सपा भड़की
मुख्यमंत्री ने किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन समाजवादी पार्टी ने इसे सीधे अखिलेश यादव से जोड़ लिया। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सीएम की भाषा पर आपत्ति जताई, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप करते हुए कहा—
“मुख्यमंत्री ने किसी का नाम नहीं लिया है, फिर आप खुद को क्यों जोड़ रहे हैं?”इसके बावजूद सपा विधायक संतुष्ट नहीं हुए और नारेबाज़ी करते हुए सदन से वॉकआउट कर गए। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने भी विपक्ष को नसीहत दी कि “आरोप तभी लगाइए जब नाम लिया गया हो।”कोडीन कांड: आरोप नहीं, आंकड़ों के साथ वार
राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच मुख्यमंत्री योगी ने सदन में कोडीन कफ सिरप के अवैध कारोबार को लेकर गंभीर तथ्य रखे। उन्होंने दावा किया कि—इस नेटवर्क में लोहिया वाहिनी के एक बड़े नेता का नाम सामने आया है जिसके बैंक खाते से करोड़ों रुपये के गैरकानूनी लेनदेन के पुख्ता सबूत मिले हैं
सीएम ने कहा—“एसटीएफ की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, समाजवादी पार्टी के कई चेहरों से नकाब उतरेगा।”2016 का लाइसेंस, आज की सियासत योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष को घेरते हुए याद दिलाया कि—“
जिस बड़े होलसेलर को एसटीएफ ने सबसे पहले पकड़ा, उसे 2016 में समाजवादी पार्टी की सरकार ने ही लाइसेंस दिया था।”
उन्होंने साफ किया कि—यूपी में कोडीन सिरप का उत्पादन नहीं होता यह केवल स्टॉकिंग और डायवर्जन का मामला हैऔर जिन मौतों की बात हो रही है, वे तमिलनाडु में बने सिरप से अन्य राज्यों में हुई हैं“पढ़ाई-लिखाई से वास्ता नहीं, इसलिए चिल्लाते हैं”विपक्षी हंगामे पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा—“
आप लोग विषय समझने के बजाय सिर्फ चिल्लाते हैं। यह नकली दवा नहीं, बल्कि इल्लीगल डायवर्जन का मामला है।”सीएम ने बताया कि शराबबंदी वाले राज्यों और देशों में नशे के लिए इस सिरप को भेजा गया—
जो सीधे तौर पर NDPS एक्ट का उल्लंघन है।सरकारी कार्रवाई: आंकड़े बोले, सियासत मौन मुख्यमंत्री ने सदन में कार्रवाई का पूरा लेखा-जोखा रखा—79 एफआईआर दर्ज 225 आरोपी नामजद 78 गिरफ्तार 134 फर्मों पर छापेमारी
योगी ने चेतावनी देते हुए कहा—“हाईकोर्ट में सरकार जीत चुकी है कि इस पर NDPS एक्ट लगेगा। आगे बुलडोज़र चले, तो मानवाधिकार की दुहाई मत दीजिए।
”राजनीतिक विश्लेषण:
आक्रामक योगी, रक्षात्मक विपक्ष
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह भाषण योगी आदित्यनाथ की आक्रामक गवर्नेंस शैली का विस्तार है।
एक विश्लेषक कहते हैं—“योगी अब केवल प्रशासन नहीं, बल्कि नैरेटिव भी तय कर रहे हैं। विपक्ष को न सिर्फ आरोपों का, बल्कि अपने अतीत का भी जवाब देना पड़ रहा है।
”विपक्ष की प्रतिक्रिया: ‘
ध्यान भटकाने की कोशिश’सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि—“सरकार असली मुद्दों—
महंगाई, बेरोज़गारी—से ध्यान हटाने के लिए सदन को अखाड़ा बना रही है।”हालांकि वे कोडीन कांड पर लगाए गए आरोपों पर ठोस जवाब देने से बचते नजर आए।हिंदू संगठनों का समर्थन: ‘
नशे पर ज़ीरो टॉलरेंस ज़रूरी’कई हिंदू संगठनों ने मुख्यमंत्री के सख्त रुख का समर्थन किया है।एक संगठन के प्रवक्ता ने कहा—“नशा समाज को खोखला करता है। चाहे कोई भी पार्टी हो, ऐसे अपराधियों पर बुलडोज़र चलना चाहिए।”
निष्कर्ष:
सदन में शब्दों की जंग, सड़क पर सख्ती का संदेश
कोडीन कांड पर योगी सरकार ने यह साफ कर दिया है कि—अपराधी चाहे राजनीतिक रसूख वाला होया किसी भी दल से जुड़ा हो कार्रवाई होगी और बिना संकोच होगी।विधानसभा में हुआ यह टकराव केवल बयानबाज़ी नहीं, बल्कि आने वाले समय में यूपी की सियासत की दिशा भी तय करता नजर आ रहा है—
जहां सरकार “एक्शन” की भाषा बोल रही है और विपक्ष “आक्रोश” की।
NSK

