बी के झा
NSK

नई दिल्ली/ पटना, 26 नवंबर
बिहार की राजनीति में एक नाम है जो पिछले चार दशकों से सिर्फ नेतृत्व ही नहीं, बल्कि सत्ता-चातुर्य और रणनीतिक दक्षता की अनोखी मिसाल पेश करता रहा है— नीतीश कुमार।1985 से शुरू हुई उनकी संसदीय यात्रा आज इस मुकाम पर पहुंच चुकी है कि वह 25 बार शपथ लेने वाले भारत के अकेले नेता बन चुके हैं।नीतीश कुमार को बिहार ने सबसे ज्यादा अवधि तक मुख्यमंत्री के रूप में देखा है, लेकिन यह कम लोग जानते हैं कि वह पूरे करियर में सिर्फ एक बार विधायक रहे, और वह भी 39 साल पहले— 1985 में।
40 साल में 25 शपथ — एक अद्भुत राजनीतिक यात्रा नीतीश के राजनीतिक जीवन का सबसे रोचक पहलू यह है कि उन्होंने 10 बार मुख्यमंत्री, 6 बार सांसद, 4 बार केंद्रीय मंत्री, और 4 बार विधान पार्षद के रूप में शपथ ली है।यानी, हर महत्वपूर्ण राजनीतिक सीढ़ी उन्होंने न सिर्फ चढ़ी, बल्कि बार–बार दोहराई भी।
शपथ संख्या 1: 1985 — हरनौत से पहली बार विधायक यही वह शपथ थी जिसने नीतीश को राजनीति के बड़े कैनवास पर उतारा।लेकिन हैरत की बात— इस शपथ के बाद वे दोबारा कभी विधायक नहीं बने।1995 में विधायक चुनाव जीतने के बाद भी उन्होंने शपथ लेने से इनकार कर दिया, क्योंकि तब तक वे बाढ़ से लोकसभा सदस्य बन चुके थे।अगर वे शपथ ले लेते तो आज उनकी कुल शपथ संख्या 26 होती।
लोकसभा की 6 शपथें:
दो सीटें, दर्जनों राजनीतिक मोड़ बाढ़ संसदीय क्षेत्र से नीतीश ने लगातार 5 बार सांसद के रूप में शपथ ली—1989, 1991, 1996, 1998, 1999और 2004 में नालंदा से चुनाव जीतकर छहवीं बार सांसद का ओथ लिया।इन शपथों के बीच ही नीतीश राष्ट्रीय राजनीति के सबसे विश्वसनीय चेहरों में गिने जाने लगे।
केंद्र में 4 बार मंत्री पद की शपथ — कमान और संघर्ष की कहानियाँनीतीश कुमार ने केंद्र में चार बार काबीना का हिस्सा बनकर भारतीय लोकतंत्र में अपनी छाप छोड़ी—
1990 — कृषि राज्यमंत्री (वी.पी. सिंह सरकार)पहली बार मंत्रिमंडल में प्रवेश।
1998 — रेलमंत्री (वाजपेयी सरकार)रेल दुर्घटना के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया—आज भी उनकी यह नैतिकता भारतीय राजनीति में मिसाल मानी जाती है।
1999 — सड़क परिवहन मंत्री + बाद में कृषि मंत्रालययह दौर नीतीश की केंद्रीय छवि को सबसे अधिक मजबूत करने वाला माना गया।
मार्च 2000 — दोबारा रेल मंत्रीयह शपथ तब आई जब उन्होंने बिहार में अल्पमत सरकार बनाई थी और तुरंत इस्तीफा देकर फिर केंद्र लौट आए।
विधायी परिषद की 4 शपथें: बिहार की सत्ता में स्थिर पकड़2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश ने विधानसभा की जगह विधान परिषद का रास्ता चुना।इसके बाद उन्होंने एमएलसी के रूप में 4 शपथें ली—2006, 2012, 2018, 2024उनका एमएलसी कार्यकाल मई 2030 तक तय है।
मुख्यमंत्री की 10 शपथें — बिहार के इतिहास में अभूतपूर्व2005 से लेकर 2024 तक नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है—इतना कोई मुख्यमंत्री आज तक भारत के किसी राज्य में नहीं दोहरा सका।यह बिहार की राजनीति के उलटफेर, गठबंधन के उतार-चढ़ाव और नीतीश की रणनीतिक क्षमता— तीनों का अनूठा मेल है।
क्या 26वीं शपथ प्रधानमंत्री पद की होगी? —
राजनीतिक गलियारों में नई हलचल राष्ट्रीय राजनीति के जानकारों में एक दिलचस्प चर्चा जोर पकड़ रही है—क्या नीतीश कुमार की 26वीं शपथ प्रधानमंत्री पद की होगी?
एक वरिष्ठ राजनीतिक विशेषज्ञ ने टिप्पणी की—नीतीश कुमार का राष्ट्रीय कद, उनका प्रशासनिक रिकॉर्ड और विपक्ष–समर्थक क्षेत्रीय दलों की हालिया रणनीति देखकर लगता है कि दिल्ली की राजनीति में अगले कुछ महीनों में बड़ा उलटफेर हो सकता है। यह संभव है कि बिहार पहली बार प्रधानमंत्री दे।”हाल ही में जिस तरह चंद्रबाबू नायडू, ममता बनर्जी और राहुल गांधी के इशारों पर इंडिया गठबंधन नीतीश से संपर्क में बताया जा रहा है, उससे राजनीतिक थर्मामीटर अचानक गर्म है।इसके साथ यह भी संकेत मिल रहे हैं कि नीतीश समर्थन वापसी का कार्ड केंद्र की राजनीति में खेल सकते हैं।
निष्कर्ष:
नीतीश का सफर— सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, रणनीति का अद्भुत उदाहरण 25 शपथें सिर्फ एक संख्या नहीं—यह 40 वर्षों की वह यात्रा है जिसमें—सत्ता बदली गठबंधन बदले प्रदेश बदला राजनीति का चेहरा बदला लेकिन नीतीश बने रहे— निर्णायक, प्रभावी और प्रासंगिक।
अब पूरे देश की निगाहें इस पर हैं—क्या उनकी 26वीं शपथ इतिहास बनाएगी?
