बी के झा
NSK

पटना/नई दिल्ली, 8 अप्रैल
बिहार की राजनीति एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां करीब दो दशकों से सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के पद छोड़ने के साथ ही एक नए राजनीतिक युग की पटकथा लिखी जा रही है।सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर नई सरकार को लेकर लगभग सभी समीकरण तय हो चुके हैं—अब केवल औपचारिकताओं का इंतजार है।
दिल्ली से पटना तक: सत्ता परिवर्तन की टाइमलाइन
राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है:9 अप्रैल: नीतीश कुमार का दिल्ली दौरा10 अप्रैल: राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ11 अप्रैल: पटना वापसी इसके बाद: किसी भी दिन मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा पटना लौटते ही वे NDA विधायक दल की बैठक बुलाकर अपने इस्तीफे की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं और फिर राज्यपाल को पद त्याग पत्र सौंपेंगे।
“सब सेट” फॉर्मूला: भाजपा का सीएम, जदयू का डिप्टी
गठबंधन सूत्रों के अनुसार सत्ता का नया फार्मूला कुछ इस प्रकार तय हुआ है:मुख्यमंत्री पद — भारतीय जनता पार्टी के पासउपमुख्यमंत्री पद — जनता दल यूनाइटेड के पासयह पहली बार होगा जब बिहार में भाजपा अपना मुख्यमंत्री बनाएगी, जबकि जदयू को पहली बार डिप्टी सीएम पद मिलने जा रहा है।
सीएम की कुर्सी पर कौन?
हालांकि आधिकारिक घोषणा बाकी है, लेकिन सियासी गलियारों में सबसे आगे नाम है:सम्राट चौधरी इसके अलावा कुछ अन्य नाम भी चर्चा में हैं, लेकिन भाजपा ने अब तक रणनीतिक चुप्पी साध रखी है।निर्णय NDA की संयुक्त विधायक दल की बैठक में ही सार्वजनिक किया जाएगा।
डिप्टी सीएम पर भी नजरें
जदयू की ओर से उपमुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं, जिनमें:निशांत कुमार हालांकि इसे लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन यह संकेत जरूर है कि जदयू नई सरकार में अपनी “सशक्त उपस्थिति” बनाए रखना चाहती है।
खरमास के बाद शपथग्रहण
धार्मिक परंपराओं के अनुसार “खरमास” (अशुभ काल) के दौरान कोई बड़ा कार्य नहीं किया जाता।यह अवधि 14 अप्रैल तक समाप्त हो रही है, इसलिए:—
15 अप्रैल के बाद नई सरकार के शपथ ग्रहण की पूरी संभावना है
राजनीतिक विश्लेषण: सत्ता का संतुलन या रणनीतिक बदलाव?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह बदलाव केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि सत्ता संरचना का पुनर्गठन है:
भाजपा का पहला मुख्यमंत्री — दीर्घकालिक रणनीति का संकेत
जदयू की साझेदारी — गठबंधन संतुलन बनाए रखने की कोशिश
नीतीश कुमार का दिल्ली जाना — राष्ट्रीय राजनीति में नई भूमिकाएक वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा:“यह परिवर्तन बिहार की राजनीति को ‘गठबंधन युग’ से ‘नेतृत्व परिवर्तन युग’ में ले जा सकता है।”
विपक्ष का रुख: सवाल और सियासत
विपक्षी दल इस पूरे घटनाक्रम को “पूर्व नियोजित सत्ता परिवर्तन” बता रहे हैं। उनका आरोप है कि:जनता के जनादेश से ज्यादा गठबंधन समीकरण हावी हैंनेतृत्व परिवर्तन का फैसला पर्दे के पीछे तय हुआ
बड़ा सवाल: क्या बदलेगा बिहार?
नई सरकार के सामने कई चुनौतियां होंगी:रोजगार और उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था जनता की नजर इस बात पर होगी कि क्या नया नेतृत्व “नीतीश मॉडल” को आगे बढ़ाता है या पूरी तरह नई दिशा देता है।
निष्कर्ष
:बिहार में सत्ता परिवर्तन अब लगभग तय माना जा रहा है। नीतीश कुमार के संभावित प्रस्थान और भाजपा के उभार के साथ राज्य एक नए राजनीतिक अध्याय में प्रवेश करने जा रहा है।अब असली इंतजार उस पल का है, जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन अपने नए नेता का नाम घोषित करेगा—
जो न केवल सरकार चलाएगा, बल्कि बिहार की राजनीति की दिशा भी तय करेगा।
