बी के झा
NSK News

ठाकुरगंज (किशनगंज), 23 जुलाई
बिहार के किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड स्थित नेपाल सीमा से सटे भेलागुड़ी मौजा में जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सरकारी रजिस्ट्री अभिलेखों के अनुसार कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के नाम इस क्षेत्र में करीब 25.60 एकड़ भूमि दर्ज है। इनमें लगभग 5 एकड़ 60 डिसमिल जमीन खरीद के माध्यम से प्राप्त की गई है, जबकि करीब 20 एकड़ भूमि दान के रूप में मिलने का उल्लेख रिकॉर्ड में है।यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसी क्षेत्र में भारतीय सेना के प्रस्तावित स्टेशन के लिए 189.68 एकड़ भूमि चिह्नित की जा चुकी है।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि अभी केवल भूमि का चिन्हांकन हुआ है, अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।सेना स्टेशन की सुगबुगाहट के बीच बढ़ी जमीन की खरीदारी जानकारी के अनुसार, भेलागुड़ी गांव नेपाल सीमा से बेहद निकट स्थित है। वर्ष 2025 में प्रशासन ने यहां सेना स्टेशन स्थापित करने के लिए निजी भूमि का चिन्हांकन किया था। इसके बाद दिल्ली और उत्तर प्रदेश के सात लोगों के नाम कुल करीब 94.86 एकड़ भूमि की खरीद और दान से प्राप्ति का रिकॉर्ड सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या प्रस्तावित सैन्य परियोजना की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद बाहरी लोगों ने भविष्य में मिलने वाले संभावित मुआवजे या अन्य कारणों को ध्यान में रखकर जमीन खरीदी।
किन-किन लोगों के नाम दर्ज हुई जमीन
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार सात प्रमुख खरीदारों के नाम इस प्रकार बताए जा रहे हैं—मोहम्मद सलमान खान (दक्षिण दिल्ली) – 14.09 एकड़मोहम्मद सुल्तान (प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश) – 13.93 एकड़सुलेमान खान – 13.12 एकड़मोहम्मद शमीम (दक्षिण दिल्ली) – 11.72 एकड़मोहम्मद अनस (मऊ, उत्तर प्रदेश) – 9.05 एकड़तश्कील अहमद (प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश) – 7.35 एकड़ इमरान प्रतापगढ़ी (राज्यसभा सांसद) – लगभग 25.60 एकड़ सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार इमरान प्रतापगढ़ी के नाम दर्ज भूमि में सात अलग-अलग रजिस्ट्री के माध्यम से खरीदी गई जमीन के अलावा लगभग 20 एकड़ भूमि दान स्वरूप दर्ज है।
स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन खरीदने वालों ने प्रारंभिक दौर में क्षेत्र में शिक्षा और खेल से जुड़ी संस्थाएं विकसित करने की बात कही थी। हालांकि अब तक इस दिशा में कोई सार्वजनिक परियोजना सामने नहीं आई है। इसी कारण क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
प्रशासन ने क्या कहा
ठाकुरगंज के अंचल अधिकारी मृत्युंजय कुमार के अनुसार सेना स्टेशन के लिए चिन्हित भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित जमीनों के दाखिल-खारिज के लिए फिलहाल कोई ऑनलाइन आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
मामले को लेकर भाजपा नेताओं ने जांच की मांग उठाई है। झंझारपुर से भाजपा विधायक एवं मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र में इतनी बड़ी मात्रा में जमीन खरीदने के उद्देश्य की जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर कुछ स्थानीय सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।हालांकि, इस पूरे मामले में कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी या कांग्रेस पार्टी की ओर से इस रिपोर्ट के संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
अब सबकी नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर
नेपाल सीमा से सटे संवेदनशील क्षेत्र, प्रस्तावित सेना स्टेशन और बड़े पैमाने पर हुई जमीन की खरीद-बिक्री ने इस मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया है।
अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार या संबंधित एजेंसियां इस मामले में किसी प्रकार की जांच शुरू करती हैं या नहीं तथा भविष्य में सेना स्टेशन परियोजना की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।
