बी के झा
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पटना / बेनीपुर, दरभंगा/ नई दिल्ली, 18 अक्टूबर
‘हिन्दुस्तान बिहार समागम 2025’ के मंच से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पटना के चौराहे पर खुली चुनौती दी।
उन्होंने कहा —अगर जेल में बैठकर सरकार चलाना लोकतंत्र है, तो राहुल गांधी खुले मंच से आकर देश को यह बात बताएं। हमने संविधान संशोधन में सिर्फ इतना कहा है कि जो व्यक्ति जेल में है, वह सत्ता में नहीं रह सकता — इसमें गलत क्या है?”
अमित शाह के इस बयान से बिहार की सियासत में नई बहस छिड़ गई है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि “लोकतंत्र में पारदर्शिता जरूरी है, और अपराध के साथ सत्ता नहीं चल सकती।”
“लालू-राबड़ी का गड्ढा हमने भरा, बिहार अब विकास के रास्ते पर”अमित शाह ने बिहार में 20 वर्षों के एनडीए शासन को “स्थायित्व और विकास का युग” बताया।
उन्होंने कहा —लालू और राबड़ी ने बिहार को जिस अंधकार में छोड़ा था, उसे हमने रोशनी में बदला। पहले दस सालों में नीतीश कुमार ने कानून व्यवस्था सुधारी, और अब मोदी सरकार ने बिहार को हाईवे, पुलों और उद्योगों से जोड़ दिया।”
शाह ने कहा कि पटना से गया अब महज़ दो घंटे की दूरी पर है, गंगा पर विशाल पुल बन चुके हैं, बरौनी रिफाइनरी चालू है, दरभंगा में एम्स और बोधगया में आईआईएम स्थापित हो रहा है।
अब बिहार सिर्फ पलायन की पहचान नहीं, प्रगति की मिसाल बन रहा है,” उन्होंने जोड़ा।“दस साल में बिहार को बाढ़ से मुक्त करेंगे”गृह मंत्री ने कहा कि बिहार को प्राकृतिक आपदा से मुक्त करना सरकार की प्राथमिकता है।
नेपाल से आने वाला पानी हर साल तबाही लाता है। कोसी परियोजना के लिए हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अगले दस साल में बिहार बाढ़मुक्त होगा,” शाह ने कहा।
उन्होंने यह भी बताया कि बिहार को AI और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री का केंद्र बनाने की योजना है, ताकि रोजगार बढ़े और भूमि का उपयोग कम हो।“
SIR से घुसपैठिए निकलेंगे, तो राहुल गांधी को मिर्ची क्यों?”
राहुल गांधी द्वारा “वोट चोरी” के आरोप पर पलटवार करते हुए अमित शाह ने कहा —जो व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है, वह हमारे लोकतंत्र का फैसला कैसे करेगा?
चुनाव आयोग अगर SIR (Systematic Identification of Refugees) के ज़रिए घुसपैठियों की पहचान कर रहा है, तो कांग्रेस और आरजेडी को परेशानी क्यों हो रही है?”उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह घुसपैठियों की राजनीति कर रहा है और देश की सुरक्षा से समझौता करना चाहता है।
प्रशांत किशोर पर तंज — “पहली बार पार्टी बनाई है, नतीजों के बाद बात करेंगे”जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर के बारे में शाह ने कहा,उन्होंने पहली बार राजनीतिक पार्टी बनाई है। लोकतंत्र सिखाएगा कि जनता का फैसला क्या होता है, चुनाव परिणाम के बाद इस पर चर्चा करेंगे।”
ज़मीनी सच्चाई:
एनडीए की हुंकार बनाम जनता की तकलीफ़
हालाँकि अमित शाह के इस सशक्त भाषण के बीच बिहार की सड़कों और गलियों में एक अलग ही चर्चा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इतिहास खुद को दोहरा सकता है, जैसा कि 2015 में डीएनए विवाद के दौरान हुआ था।
पटना के एक वरिष्ठ पत्रकार (नाम न बताने की शर्त पर) ने कहा —अमित शाह जितनी भी हुंकार भरें, बिहार की जनता अब शब्दों से ज़्यादा ज़मीन पर सच्चाई देखती है।
जब भाजपा के ही विधायक और लोजपा (रामविलास) के नेता अपने रसूख में कानून को तोड़ते हैं, तब लालू का ‘जंगलराज’ याद दिलाना नैतिक दोहरापन लगता है।
”उन्होंने कहा कि दरभंगा से लेकर पूरे बिहार तक भाजपा व लोजपा समर्थित पासवान गुट का स्थानीय आतंक अब खुलेआम महसूस किया जा रहा है।
दरभंगा में भाजपा विधायक के इशारे पर उनके गुर्गों द्वारा सरकारी अफसर को दबाव में रखकर जमीन की रजिस्ट्री करवा ली गई, लेकिन आज तक पीड़ित को जमीन का एक इंच भी नहीं मिला। वहीं चिराग पासवान के संरक्षण में कुछ स्थानीय पासवान गुट खुलेआम धमकी, वसूली और कब्जे की राजनीति चला रहे हैं — और प्रशासन मौन है।
”पत्रकार ने जोड़ा —जब सत्ता के संरक्षण में यही सब हो रहा हो, तब जनता यह सवाल पूछने को मजबूर है कि ‘जंगलराज’ आखिर किसका है?
”अंत में…पटना के मंच से अमित शाह की हुंकार ने चुनावी हवा को गरम जरूर कर दिया है,पर बिहार की मिट्टी अब भावनाओं से ज़्यादा वास्तविकता को समझती है।
14 नवंबर को मतपेटी तय करेगी —क्या जनता अमित शाह के शब्दों में विकास देखेगी *,या अनुभव में वही सत्ता-प्रायोजित भय और अन्याय जो आज दरभंगा से लेकर सिवान तक गूंजता है।
