बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 10 फरवरी
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के प्रस्तावित भारत दौरे से पहले भारत की सामरिक और सैन्य तैयारियों ने नई रफ्तार पकड़ ली है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की 12 फरवरी 2026 को होने वाली बैठक में भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल बहु-भूमिका लड़ाकू विमानों की ऐतिहासिक खरीद को आवश्यकता स्वीकृति (Acceptance of Necessity – AoN) मिलने की प्रबल संभावना है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की इस डील को न केवल वायुसेना के इतिहास की सबसे बड़ी खरीद माना जा रहा है, बल्कि यह ‘मेक इन इंडिया’ और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के लिहाज से भी मील का पत्थर साबित हो सकती है।
राफेल डील: सिर्फ हथियार नहीं, रणनीतिक संदेश
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा महज लड़ाकू विमानों की खरीद नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन को भारत के पक्ष में निर्णायक रूप से मोड़ने वाला कदम है। पहले से सेवा में मौजूद 36 राफेल विमानों ने ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी और सैन्य ठिकानों पर सटीक हमलों से अपनी मारक क्षमता सिद्ध कर दी है। अब 114 नए विमानों के शामिल होने से भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन ताकत, मारक दूरी और बहु-मोर्चा युद्ध क्षमता में अभूतपूर्व इजाफा होगा।
18 ‘फ्लाई-अवे’, 96 भारत में निर्माण
प्रस्ताव के अनुसार, फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन से 18 राफेल विमान सीधे तैयार अवस्था (फ्लाई-अवे कंडीशन) में खरीदे जाएंगे, जबकि शेष 96 विमान भारत में निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ साझेदारी में बनाए जाएंगे। इनमें कई दो-सीटर विमान होंगे, जो प्रशिक्षण और जटिल अभियानों में अहम भूमिका निभाएंगे।सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि इससे न सिर्फ स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत को एयरोस्पेस निर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।
मेक इन इंडिया को मिलेगा रणनीतिक बल
रक्षा खरीद नियमों के तहत डीएसी से AoN मिलना प्रक्रिया का पहला औपचारिक और निर्णायक कदम होता है। रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) पहले ही इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे चुका है। इसके बाद वाणिज्यिक बातचीत, लागत निर्धारण और अंततः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) से अंतिम मंजूरी ली जाएगी।रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि भारत में राफेल निर्माण से तकनीक हस्तांतरण, कुशल रोजगार और रक्षा निर्यात क्षमता को नई ऊंचाई मिलेगी। यह भारत की उस दीर्घकालिक नीति का हिस्सा है, जिसके तहत देश आयातक से आगे बढ़कर रक्षा उपकरणों का निर्यातक बनना चाहता है।
पड़ोसी देशों में बढ़ी बेचैनी
रणनीतिक हलकों में यह चर्चा आम है कि राफेल डील की खबरों ने पाकिस्तान की सुरक्षा प्रतिष्ठानों की नींद उड़ा दी है। अत्याधुनिक मेटियोर एयर-टू-एयर मिसाइल, स्कैल्प क्रूज मिसाइल और हैमर प्रिसिजन गाइडेड बम से लैस राफेल न केवल दुश्मन के लड़ाकू विमानों को हवा में ही निष्क्रिय करने में सक्षम हैं, बल्कि सटीक गहराई वाले हमलों में भी बेजोड़ माने जाते हैं।वायुसेना प्रमुख का स्पष्ट संदेशअक्टूबर 2025 में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने साफ कहा था कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य में नए लड़ाकू विमानों और आधुनिक सैन्य उपकरणों को तेजी से शामिल करना समय की मांग है।
उन्होंने राफेल को भारतीय वायुसेना के लिए सबसे भरोसेमंद और प्रभावी विकल्पों में से एक बताया था।मैक्रों दौरा और कूटनीतिक संकेत फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों के 18 से 20 फरवरी के बीच भारत आने और AI Impact Summit में भाग लेने की संभावना है। माना जा रहा है कि इस दौरान भारत–फ्रांस रक्षा साझेदारी को और गहराई देने के लिए राफेल डील को अंतिम रूप या निर्णायक दिशा दी जा सकती है।
निष्कर्ष
114 राफेल विमानों की प्रस्तावित खरीद भारतीय वायुसेना को न केवल संख्यात्मक मजबूती देगी, बल्कि तकनीकी, रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक बढ़त भी सुनिश्चित करेगी। यह सौदा स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अब सिर्फ अपनी रक्षा जरूरतें पूरी नहीं कर रहा, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक शक्ति संतुलन में निर्णायक भूमिका निभाने की ओर बढ़ चुका है।
