बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 12 दिसंबर
पाकिस्तान में सत्ता-सियासत का मौसम एक बार फिर तूफ़ानी मोड़ पर है। दो वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी और देश की खुफिया एजेंसी आईएसआई के पूर्व प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) फैज हमीद को 14 साल की सख्त कैद की सजा सुनाई गई है। आरोप—
राजनीतिक हस्तक्षेप, आधिकारिक रहस्यों की अवहेलना, पद का दुरुपयोग और लोगों को हिंसा की ओर उकसाना।लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि“फैज हमीद की सजा एक अंत नहीं—एक शुरुआत है।”9 मई की हिंसा: सजा की जड़ और आने वाले तूफ़ान का संकेत कहा जा रहा है कि यह सजा 9 मई 2023 को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद भड़की हिंसा से सीधे जुड़ी है—वह दिन जिसने पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार सेना के ठिकानों को निशाना बनते देखा।सेना ने दावा किया है कि फैज हमीद ने न केवल राजनीतिक अस्थिरता को हवा दी, बल्कि हिंसा भड़काने वाले समूहों को ‘शक्ति और संरक्षण’ भी दिया।यही नहीं, सेना के आधिकारिक बयान के अंतिम पैराग्राफ ने पूरे पाकिस्तान में हलचल बढ़ा दी है—
राजनीतिक अस्थिरता और आंदोलन को उकसाने में शामिल तत्वों की अलग से जांच जारी है, और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई अनिवार्य होगी।
”विशेषज्ञों के अनुसार यह पंक्ति साफ संकेत देती है कि—• अभी और गिरफ्तारियां होंगी• कई नेता व पूर्व अफसर निशाने पर आ सकते हैं• इमरान खान की पार्टी पीटीआई की रीढ़ तोड़ी जा सकती है
रक्षा विशेषज्ञों का विश्लेषण: “फैज हमीद पर गिरी गाज—लेकिन असली निशाना कौन?”दक्षिण एशिया के सैन्य मामलों के विशेषज्ञ मेजर जनरल (रि.) इलियास कादरी बताते हैं—
“फैज हमीद की सजा सेना की ओर से यह संदेश है कि वह अब राजनीतिक दखल को ‘अंदर से साफ’ करने पर उतर आई है। लेकिन यह कदम सिर्फ एक प्रतीक है—समझिए कि ‘मुख्य सूची’ अभी बाकी है।
”अंतरराष्ट्रीय सैन्य विश्लेषक जेसन यहुदा का आकलन है—
“इमरान खान के समर्थन नेटवर्क में कई रिटायर्ड अफसर, मीडिया हस्तियां और नौकरशाह शामिल थे। सेना अब उन्हें भी निशाने पर ले सकती है ताकि भविष्य में कोई राजनीतिक विद्रोह उभर न सके।”
अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषकों की चेतावनी: पाकिस्तान फिर पुराने रास्ते पर?
लीडेन यूनिवर्सिटी की दक्षिण एशिया विशेषज्ञ डॉ. रोसामुंड फर्नांडिस कहती हैं—”फैज हमीद की सजा पाकिस्तान में ‘पॉलिटिकल रिएलाइनमेंट’ शुरू होने का संकेत है—
यह वही दौर है जो भुट्टो, बेनज़ीर और नवाज़ शरीफ की गिरफ्तारी या निर्वासन के समय दिखा था।”लंदन के सेंटर फॉर ग्लोबल पॉलिटिक्स के विश्लेषक डॉ. एंड्रयू कोलमैन का कहना है—”
सेना खुलकर राजनीति पर नियंत्रण का संदेश दे रही है। यह न तो नई कहानी है, न पहला अध्याय—लेकिन यह अध्याय पहले से ज्यादा कठोर है।”क्या इमरान खान के समर्थक अगला निशाना?
पीटीआई कार्यकर्ताओं में भय बढ़ गया है कि—
मिलिट्री कोर्ट में और नाम भेजे जाएंगे• लंबी कैद, जुर्माना और देशद्रोह जैसे आरोप संभव•
मीडिया और सोशल मीडिया एक्टिविस्टों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है
राजनीतिक टिप्पणीकारों का कहना है कि यह पाकिस्तान के इतिहास का वह मोड़ है जहां लोकतांत्रिक विपक्ष की धुरी को सैन्य सर्जरी द्वारा कमजोर किया जा रहा है।
पाकिस्तान का इतिहास भी यही कहता है—‘कुर्सी छोड़ने पर कोई सुरक्षित नहीं’पाकिस्तान की राजनीति में सत्ता से गिरना अक्सर खून-खराबे, साजिश और कारावास का पर्याय रहा है—•
जुल्फिकार अली भुट्टो—फांसी दी गई•
बेनज़ीर भुट्टो—हत्या•
परवेज़ मुशर्रफ—निर्वासन और मुसीबत•
नवाज़ शरीफ—कैद और निष्कासन•
इमरान खान—अब भी जेल में फ़ैज़ हमीद की सजा इस श्रृंखला को नए चरण में ले जाती है, जहां सेना अब सिर्फ सरकारें बनाती नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में ‘फोर्स्ड क्लीनिंग’ भी करने लगी है।क्या पाकिस्तान एक और राजनीतिक तूफान की ओर बढ़ रहा है?
सभी संकेत बताते हैं कि—• सेना आक्रामक मोड में है• न्यायिक व्यवस्था सैन्य फैसलों पर मुहर लगा रही है• विपक्ष कमज़ोर, बिखरा और टारगेट पर• अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि और अनिश्चित
विशेषज्ञों की राय है कि फैज हमीद की सजा पाकिस्तान की राजनीति में “महत्वपूर्ण लेकिन डरावनी शुरुआत” है—
एक ऐसा दौर, जिसमें सत्ता की राख से उभरने वाले हर नेता को पहले सेना की परीक्षा से गुजरना होगा।
