बी के झा
NSK

नई दिल्ली/पटना , 2 फरवरी
केंद्र सरकार के आम बजट 2026-27 को लेकर सियासी हलकों में गर्माहट साफ़ दिखाई दे रही है। सत्तापक्ष इसे 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की ठोस नींव बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे ज़मीन से कटा हुआ ‘मुंगेरी लाल का हसीन सपना’ करार दे रहा है। बजट पर आई प्रतिक्रियाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल आर्थिक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीति और विकास की दिशा तय करने वाला घोषणापत्र भी है।सत्तापक्ष का दावा: विकासोन्मुखी और विज़नरी बजटकेंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री और ‘हम (से)’ के संरक्षक जीतनराम मांझी ने बजट को विकासोन्मुखी बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एमएसएमई सेक्टर को अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में स्थापित करने की ठोस कोशिश की गई है।
मांझी ने विशेष रूप से एमएसएमई बजट में बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में जहां इस सेक्टर के लिए 23,168 करोड़ रुपये का प्रावधान था, वहीं 2026-27 में इसे बढ़ाकर 24,566 करोड़ रुपये कर दिया गया है। उनके अनुसार, “यह बढ़ोतरी सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि रोजगार, स्वरोजगार और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत इरादों की प्रतीक है।”उन्होंने ग्रोथ फंड के जरिए 10,000 करोड़ रुपये के इक्विटी सपोर्ट को छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए गेमचेंजर बताया। साथ ही, आत्मनिर्भर भारत कोष में 2,000 करोड़ रुपये के टॉप-अप को सरकार की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रमाण करार दिया।
पारदर्शिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस
जीतनराम मांझी ने सीपीएसई द्वारा सभी खरीद के लिए ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) को अनिवार्य बनाने के फैसले की सराहना की। उनका कहना है कि इससे भुगतान प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और छोटे उद्योगों को समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा।इसके साथ ही, महात्मा गांधी ग्राम स्वराज मिशन के तहत खादी को तकनीकी सहायता देने के फैसले को उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में अहम कदम बताया।
चिराग पासवान: 2047 का रोड मैप
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने बजट को “21वीं सदी के दूसरे दशक का सबसे दूरदर्शी और ऐतिहासिक बजट” बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा कि यह बजट केवल तात्कालिक जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करता है।चिराग के अनुसार, बजट की सबसे बड़ी ताकत इसकी निरंतरता और स्थिरता है। “इसमें बुनियादी ढांचे, ग्रामीण विकास, शहरीकरण और स्वरोजगार—सभी को संतुलित रूप से प्राथमिकता दी गई है। सरकार का केंद्र बिंदु देश का युवा है, जिसे कौशल, रोजगार और उद्यमिता के जरिए सशक्त बनाने की योजना है,”
उन्होंने कहा।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का समर्थन
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी बजट को विजनरी करार देते हुए कहा कि इसमें दीर्घकालिक विकास की स्पष्ट झलक मिलती है। उनके अनुसार, यह बजट राज्यों की विकास जरूरतों और केंद्र के दीर्घकालिक लक्ष्यों के बीच संतुलन साधने की कोशिश है।
आर्थिक विश्लेषण: अवसर और चुनौतियां दोनों
वरिष्ठ अर्थशास्त्री प्रो. (डॉ.) संजय कुमार मानते हैं कि एमएसएमई पर जोर रोजगार सृजन के लिहाज से सही दिशा में कदम है। “हालांकि असली चुनौती यह होगी कि घोषित फंड और योजनाएं जमीनी स्तर तक कितनी तेजी और पारदर्शिता से पहुंचती हैं,” वे कहते हैं।
कानूनी दृष्टिकोण: नीतियों के क्रियान्वयन पर नजर
कानूनविद और नीति विशेषज्ञ एडवोकेट अनामिका वर्मा के अनुसार, “ट्रेड सिस्टम और इक्विटी सपोर्ट जैसे प्रावधान तभी कारगर होंगे जब उनके लिए स्पष्ट नियम, समयबद्ध भुगतान और विवाद निपटान की मजबूत व्यवस्था बनाई जाए।”
विपक्ष का हमला: ‘हसीन सपना’ या हकीकत से दूरी?
विपक्षी दलों ने बजट को लेकर तीखा हमला बोला है। राजद और कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार बड़े-बड़े लक्ष्य तो दिखा रही है, लेकिन बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की आय जैसे बुनियादी सवालों पर ठोस राहत नहीं दी गई है।एक विपक्षी नेता ने तंज कसते हुए कहा, “2047 का विकसित भारत सुनने में अच्छा है, लेकिन 2026 में आम आदमी की जेब हल्की है। यह बजट मुंगेरी लाल के हसीन सपने जैसा लगता है।
”निष्कर्ष:
संकल्प बनाम सियासी यथार्थबजट 2026-27 को लेकर साफ है कि यह दस्तावेज़ विकास के बड़े सपने दिखाता है और एमएसएमई व युवाओं को केंद्र में रखता है। सवाल यह नहीं कि विज़न क्या है, बल्कि यह है कि क्रियान्वयन कितना प्रभावी होगा।
2047 का लक्ष्य सत्तापक्ष के लिए उम्मीद का प्रतीक है, तो विपक्ष के लिए सियासी चुनौती।
आने वाले वर्षों में यही तय करेगा कि यह बजट इतिहास में विकसित भारत की आधारशिला माना जाएगा या हसीन सपनों की सूची में शामिल होगा।
