बांग्लादेश में भीड़तंत्र का उभार और सत्ता की वैधता पर सवाल: पूर्व राजनयिकों की चेतावनी, क्षेत्रीय स्थिरता पर संकट— ढाका से चटगांव तक फैली हिंसा, यूनुस सरकार पर गंभीर आरोप

बी के झा

NSK

ढ़ाका/ नई दिल्ली, 19 दिसंबर

बांग्लादेश एक बार फिर गंभीर अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। इंकलाब मंच के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा ने ढाका से लेकर चटगांव तक कानून-व्यवस्था को झकझोर दिया है। मीडिया संस्थानों पर हमले, आगजनी, भारत विरोधी नारेबाजी और राजनयिक मिशनों की सुरक्षा पर मंडराता खतरा—इन सबके बीच पूर्व भारतीय राजनयिकों के तीखे बयान ने बांग्लादेश की मौजूदा सत्ता व्यवस्था पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान केंद्रित कर दिया है।“यह सरकार नहीं, भीड़तंत्र है” —

वीणा सीकरी का तीखा आरोप

पूर्व भारतीय राजनयिक वीणा सीकरी ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बांग्लादेश में “पूरी तरह से भीड़तंत्र चल रहा है” और मौजूदा शासन एक संवैधानिक सरकार नहीं है। उनके अनुसार, यह एक गैर-कानूनी व्यवस्था है, जिसे चुनाव कराने का नैतिक या संवैधानिक अधिकार नहीं है।सीकरी ने दावा किया कि सत्ता परिवर्तन एक संगठित ऑपरेशन का हिस्सा था, जिसकी अगुवाई जमात-ए-इस्लामी ने की और जिसे बाहरी ताकतों का समर्थन प्राप्त था।

उन्होंने यह भी कहा कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बीते 18 महीनों में सरकार की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है, जिससे जनता में असंतोष बढ़ा है। इसी अलोकप्रियता से ध्यान हटाने के लिए उन्माद फैलाने की कोशिशें हो रही हैं।

उस्मान हादी की मौत और आरोपों की राजनीति

वीणा सीकरी ने उस्मान हादी की मौत को लेकर उठे सवालों पर भी गंभीर टिप्पणी की। उनके मुताबिक, गोली लगने के कुछ ही सेकंड के भीतर बिना किसी जांच या सबूत के भारत पर आरोप मढ़ने की कोशिश की गई। उन्होंने इसे चुनावी राजनीति का हिस्सा बताया और कहा कि इस तरह की जल्दबाजी न केवल सच्चाई को धुंधला करती है, बल्कि क्षेत्रीय रिश्तों में ज़हर घोलने का काम करती है।उनका स्पष्ट संदेश था कि बांग्लादेश को स्वतंत्र, निष्पक्ष, समावेशी और भागीदारी वाले चुनावों की ओर लौटना होगा—

वही बात जो भारत पहले ही ढाका में बांग्लादेशी उच्चायुक्त को स्पष्ट रूप से कह चुका है। उनके अनुसार, विश्वसनीय चुनावों के बिना बांग्लादेशी जनता किसी भी सरकार को स्वीकार नहीं करेगी और इसके लिए एक वास्तविक कार्यवाहक सरकार आवश्यक है।

राजनयिक मिशनों पर खतरा और संयम की अपील

बांग्लादेश में भारतीय मिशनों पर भीड़ के हमलों की पृष्ठभूमि में पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा उप-सलाहकार और बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त रहे पंकज सरन ने दोनों देशों को संयम बरतने की सलाह दी है।

उन्होंने चेतावनी दी कि भड़काऊ बयान और कार्रवाइयां हालात को और बिगाड़ सकती हैं।सरन का कहना है कि भारत और बांग्लादेश के संबंधों में किसी भी बाहरी शक्ति को दखल देने का मौका नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सरकार स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है, ताकि बांग्लादेश में तैनात भारतीय राजनयिकों और संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय:

असंतोष से अराजकता तक राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बांग्लादेश में जो हो रहा है वह केवल एक व्यक्ति की मौत के बाद की प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि लंबे समय से सुलग रहे असंतोष का विस्फोट है। एक वरिष्ठ विश्लेषक का कहना है, “जब सत्ता की वैधता सवालों के घेरे में हो और चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा टूट जाए, तो सड़कों पर फैसला होने लगता है—

और यही भीड़तंत्र की शुरुआत होती है।”विश्लेषकों का यह भी मानना है कि भारत विरोधी बयानबाजी और संस्थानों पर हमले आंतरिक विफलताओं से ध्यान हटाने की रणनीति हो सकती है। इससे न केवल बांग्लादेश की आंतरिक सुरक्षा कमजोर होती है, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता पर असर पड़ता है।रात से सुबह तक हिंसा,

सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

गुरुवार रात से शुक्रवार सुबह तक बांग्लादेश के कई शहरों में हिंसा का तांडव देखने को मिला। ढाका सहित अन्य क्षेत्रों में भीड़ ने संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया और डर का माहौल पैदा किया। नेशनल सिटिजन पार्टी—जिसे पिछले साल के आंदोलन से उभरे छात्र नेताओं ने बनाया था—ने संभावित हिंसा की चेतावनी दी, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

निष्कर्ष

बांग्लादेश आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। उस्मान हादी की मौत ने केवल हिंसा को जन्म नहीं दिया, बल्कि सत्ता की वैधता, चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूर्व भारतीय राजनयिकों और राजनीतिक विश्लेषकों की चेतावनियां इस ओर इशारा करती हैं कि यदि समय रहते विश्वसनीय चुनाव, संयमित राजनीति और कानून का राज बहाल नहीं हुआ, तो यह संकट केवल बांग्लादेश तक सीमित नहीं रहेगा—उसकी गूंज पूरे क्षेत्र में सुनाई देगी।

NSK

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