बी के झा
NSK

पटना / नई दिल्ली, 23 अक्टूबर
बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी के भीतर कलह और नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरु को राज्य की राजधानी पटना में एक कार्यकर्ता ने “टिकट चोर” कहकर सबके सामने शर्मसार कर दिया।
यह घटना तब हुई जब अल्लावरु एक होटल से बाहर निकल रहे थे। आरोप लगाने वाले नेता की पहचान आदित्य पासवान, प्रदेश कांग्रेस सेवा दल यंग ब्रिगेड के अध्यक्ष के रूप में हुई है।
घटना कैसे हुई
सूत्रों के अनुसार, कृष्णा अल्लावरु जैसे ही पटना के एक नामी होटल से बाहर निकले, वहां मौजूद कांग्रेस नेता आदित्य पासवान ने जोर-जोर से नारे लगाने शुरू कर दिए —टिकट चोर अल्लावरु, पार्टी का गला घोंटने वाले बाहर जाओ!”
आरोपों से हैरान अल्लावरु ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और वहां से चुपचाप निकल गए। लेकिन तब तक वहां मौजूद सैकड़ों लोग इस हंगामे के गवाह बन चुके थे।
नेताओं के तीखे आरोप
कांग्रेस के कई वरिष्ठ और युवा नेताओं ने पिछले कुछ दिनों में खुलकर पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
बीते शनिवार को पटना में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेताओं ने कहा कि —बिहार कांग्रेस अब कुछ नेताओं के निजी दलालों के हाथों में बंधक बन गई है।”
इन नेताओं ने सीधे तौर पर राहुल गांधी की आलोचना नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि “राहुल गांधी के भरोसे का गलत फायदा उठाया गया है।
”प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने भी खुलकर प्रभारी अल्लावरु पर निशाना साधते हुए कहा कि —कृष्णा अल्लावरु ने राहुल गांधी के नाम पर टिकट बेचकर भारी उगाही की है। उन्होंने राहुल जी के विश्वास का गलत उपयोग किया।”
एनडीए ने साधा निशाना
वहीं इस पूरे विवाद पर एनडीए नेताओं ने कांग्रेस पर करारा तंज कसा है।
उनका कहना है कि —गांधी परिवार की नस-नस में भ्रष्टाचार भरा हुआ है। अल्लावरु को राहुल गांधी के इशारे पर टिकट बेचने और उगाही करने के लिए बिहार भेजा गया था।”एनडीए नेताओं ने इसे कांग्रेस की “आंतरिक सड़ांध और नेतृत्वहीनता” का प्रतीक बताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे आरोप कांग्रेस की छवि को गहरा नुकसान पहुंचा सकते हैं।
पटना यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर (सेवानिवृत्त) डॉ. शशि भूषण सिंह कहते हैं —जब पार्टी के भीतर के लोग ही अपने नेताओं को टिकट चोर कहने लगें, तो मतदाताओं का भरोसा टूटना स्वाभाविक है।कांग्रेस को इस संकट से बाहर निकलने के लिए तुरंत अनुशासन और पारदर्शिता दिखानी होगी।”
बिहार चुनाव का समीकरण
बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे —पहला चरण: 6 नवंबर दूसरा चरण: 11 नवंबर गिनती और परिणाम: 14 नवंबर
साल 2020 के चुनाव में कांग्रेस ने 70 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन केवल 19 पर जीत मिली थी।इस बार पार्टी 61 सीटों पर मैदान में है, लेकिन भीतर की यह बगावत उसके लिए कठिन चुनौती बन सकती है।
निष्कर्ष
बिहार कांग्रेस में मचा यह तूफान केवल एक व्यक्ति या टिकट विवाद का मामला नहीं है — यह उस असंतोष का विस्फोट है जो लंबे समय से पार्टी के भीतर सुलग रहा था।अब देखना यह है कि राहुल गांधी और कांग्रेस हाईकमान इस संकट को कैसे संभालते हैं, या फिर यह विवाद महागठबंधन की एकता को ही कमजोर कर देगा।
