बी के झा
NSK

पटना/जबलपुर / नई दिल्ली, 7 अक्टूबर
लोकगीत और भजन गायिकी से देश-विदेश में पहचान बना चुकीं मैथिली ठाकुर अब राजनीति के मंच पर उतरने को तैयार नज़र आ रही हैं। लंबे समय से चल रही अटकलों के बीच उन्होंने खुद बिहार में चुनाव लड़ने के संकेत दे दिए हैं। जबलपुर में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में मैथिली ने कहामैं भी टीवी पर देख रही हूं। मैं कल ही बिहार गई थी, नित्यानंद जी और तावड़े जी से मुलाकात हुई। बिहार के भविष्य और हालात पर लंबी चर्चा हुई। अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है… देखते हैं आगे क्या होता है।”उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में ‘परोक्ष स्वीकृति’ के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह रही कि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि अगर चुनाव लड़ेंगी, तो अपने गांव के क्षेत्र से ही शुरुआत करेंगी।अपने गांव से शुरुआत करना चाहती हूं”जब उनसे पूछा गया कि वह किस सीट से चुनाव लड़ना चाहेंगी, तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा—मैं अपने गांव के क्षेत्र में ही जाना चाहूंगी, क्योंकि वहां से एक अलग जुड़ाव है। अगर वहीं से शुरुआत करूंगी तो लोगों से मिलने, समझने और सीखने का अवसर मिलेगा।”गौरतलब है कि मैथिली ठाकुर मधुबनी जिले के बेनीपट्टी की रहने वाली हैं — जो एक महत्वपूर्ण विधानसभा सीट मानी जाती है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा उन्हें बेनीपट्टी से मैदान में उतारने पर विचार कर सकती है। भाजपा नेताओं से मुलाकात के बाद तेज हुई अटकलेंपिछले हफ्ते मैथिली ठाकुर की पटना में भाजपा के वरिष्ठ नेता नित्यानंद राय और विनोद तावड़े से मुलाकात की तस्वीरें सामने आई थीं। तभी से यह चर्चा गर्म है कि पार्टी उन्हें बिहार विधानसभा चुनाव में ‘युवा चेहरा’ बनाकर पेश कर सकती है।हालांकि, भाजपा ने अभी तक इस पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन पार्टी के अंदरखाने में इस पर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।स्थानीय भाजपा नेताओं में नाराजगीमधुबनी और मिथिलांचल के कुछ वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने इस फैसले पर असंतोष जताया है।एक वरिष्ठ स्थानीय नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा—दिल्ली या पटना में बैठे नेताओं को लगता है कि हेलिकॉप्टर से आए चेहरे से वोट मिल जाएंगे। लेकिन मिथिलांचल की राजनीति जमीन से जुड़ी है। अगर ऊपर से किसी को थोपने की कोशिश की गई तो नुकसान तय है।”इस बयान के बाद भाजपा संगठन में अंदरूनी असहमति के स्वर तेज हो गए हैं।महागठबंधन में ‘खुशहाली’जहां भाजपा में माथापच्ची जारी है, वहीं महागठबंधन के नेताओं के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है। उनका मानना है कि मैथिली ठाकुर जैसी लोकप्रिय शख्सियत को टिकट देने से ब्राह्मण वोटों में नाराजगी पैदा हो सकती है, जो महागठबंधन के पक्ष में जा सकती है।एक राजद नेता ने व्यंग्य में कहा—भाजपा अगर कलाकारों से चुनाव लड़वाएगी, तो जनता उन्हें गाते हुए ही देखेगी, वोट नहीं देगी।”राजनीतिक विश्लेषकों का भी कहना है कि अगर भाजपा ने मैथिली ठाकुर को बेनीपट्टी से उतारा, तो मिथिलांचल में ब्राह्मण वोटों का एक हिस्सा खिसक सकता है, जो पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है।देश के विकास के लिए जो बन पड़े, करूंगी”राजनीति में उतरने की अटकलों पर मैथिली ने कहा—देश के विकास के लिए जो भी संभव हो, मैं जरूर योगदान देना चाहूंगी। लोग मुझे विधायक या मंत्री के रूप में देखेंगे या नहीं, ये तो भविष्य बताएगा। अभी सब भगवान भरोसे है।”उनका यह सहज लेकिन आत्मविश्वास भरा जवाब यह संकेत देता है कि राजनीति में उनकी दिलचस्पी गहरी हो चुकी है।कौन हैं मैथिली ठाकुर?जुलाई में 25 वर्ष की हुईं मैथिली ठाकुर का जन्म मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड में हुआ था।उनका परिवार बाद में रोजगार की तलाश में दिल्ली चला गया।उन्होंने सोशल मीडिया और यूट्यूब पर अपने लोकगीत, भजन और मैथिली गीतों से देशभर में अपार लोकप्रियता हासिल की।आज उनके करोड़ों प्रशंसक हैं और कई राज्यों में उनके कार्यक्रम होते हैं। निष्कर्षमैथिली ठाकुर का राजनीति में कदम रखना न केवल बिहार की चुनावी राजनीति में नई ऊर्जा लेकर आएगा, बल्कि यह भाजपा के लिए ‘भावनात्मक कार्ड’ भी साबित हो सकता है।हालांकि, पार्टी को यह भी ध्यान रखना होगा कि स्थानीय नेताओं की नाराजगी और जातीय समीकरणों को नजरअंदाज करना उसे भारी पड़ सकता है।अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भाजपा वास्तव में “स्वरों की देवी” मैथिली ठाकुर को 2025 के रण में उतारती है — या यह चर्चा महज अटकल बनकर रह जाती है।
