बिहार मंत्रिमंडल में बड़ा उलटफेर: नीतीश ने छोड़ा गृह विभाग, सम्राट चौधरी की ताकत बढ़ी

बी के झा

NSK

पटना, 21 नवंबर —

बिहार की राजनीति में शुक्रवार का दिन एक अहम मोड़ लेकर आया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने मंत्रिमंडल के विभागों का जो बंटवारा किया, उसमें सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फैसला था गृह मंत्रालय छोड़ना—

वह विभाग जो दो दशक से भी ज्यादा समय तक लगभग उनके “अधिकार सुरक्षित” श्रेणी में माना जाता था।सरकार बनने के बाद गृह विभाग पर सभी की निगाहें थीं, और अब यह जिम्मेदारी सौंपी गई है डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को। इससे न केवल उनका कद बढ़ा है, बल्कि भाजपा के हिस्से में भी एक बड़ी रणनीतिक जीत मानी जा रही है।पहली बार नीतीश बिना गृह विभाग के, राजनीतिक संकेत दूरगामी महागठबंधन हो या एनडीए—

हर सरकार में गृह मंत्रालय नीतीश कुमार के पास ही रहा।लेकिन इस बार उन्होंने इसे छोड़कर सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।इसे कुछ विश्लेषक “नीतीश का पावर-डिस्ट्रिब्यूशन मॉडल” कह रहे हैं, जबकि कुछ इसे उनकी कम होती प्रशासनिक पकड़ का संकेत बता रहे हैं।राजनीति में लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि बिहार में कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण के लिए गृह विभाग सबसे महत्वपूर्ण है।

ऐसे में इसे सम्राट चौधरी को सौंपना भाजपा नेतृत्व पर भरोसा और भाजपा को बढ़ती भूमिका—दोनों का संकेत है।

जेडीयू कोटे के विभाग अभी भी रहस्यअब तक केवल बीजेपी, एलजेपी (आर), हम और आरएलएम कोटे के मंत्रियों के विभाग घोषित किए गए हैं।जेडीयू के मंत्री—जिनका विभाग सबसे ज्यादा राजनीतिक महत्व रखता है—अब भी इंतजार में हैं।यह देरी जेडीयू के भीतर चल रही आंतरिक चर्चा, या भाजपा-जेडीयू के बीच संतुलन खोजने का प्रयास भी हो सकती है।सम्राट के साथ-साथ इन नेताओं का कद भी बढ़ा

विजय कुमार सिन्हा — भूमि, राजस्व और खान विभाग

दूसरे डिप्टी सीएम और भाजपा के सीनियर नेता विजय सिन्हा को भूमि एवं राजस्व तथा खान एवं भू-तत्व विभाग मिला है—दोनों ही विभाग आर्थिक और औद्योगिक दृष्टि से बेहद अहम माने जाते हैं।

मंगल पांडे — फिर स्वास्थ्य मंत्री, साथ में कानून पिछली सरकार की तरह मंगल पांडे को स्वास्थ्य मंत्रालय मिला है—बिहार में मौजूद स्वास्थ्य ढांचे को देखते हुए यह विभाग सरकार की परफॉर्मेंस का पैमाना साबित होता है।इसके साथ कानून मंत्रालय भी उन्हें सौंपा गया है, जो उनकी भूमिका को और मजबूत बनाता है।

दिलीप जायसवाल — उद्योग विभाग

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल को उद्योग मंत्रालय दिया गया है। यह विभाग राज्य की औद्योगिक नीति, निवेश और स्टार्टअप इको सिस्टम को नई गति देने में अहम भूमिका निभाएगा।राम

कृपाल यादव — कृषि मंत्री केंद्र की राजनीति में लम्बा अनुभव रखने वाले राम कृपाल यादव को कृषि मंत्रालय मिला है—बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में यह विभाग सीधा जनता के जीवन से जुड़ा है।

नितिन नवीन — पथ निर्माण, नगर विकास और आवास सबसे भारी और तीन प्रमुख विभाग—पथ निर्माण नगर विकासआवास नितिन नवीन के खाते में आए हैं।ये विभाग बिहार के बुनियादी ढांचे, सड़कों, शहरों और नगर निकायों के समग्र विकास को दिशा देते हैं। इन्हें गृह विभाग के बाद सबसे “पावरफुल पोर्टफोलियो” माना जाता है।

विश्लेषण: इस फेरबदल से क्या संकेत मिलते हैं?

1. भाजपा की मजबूत स्थिती गृह, स्वास्थ्य, उद्योग जैसे बड़े विभाग बीजेपी नेताओं के पास जाना संकेत देता है कि सरकार में उनकी पकड़ मजबूत है।

2. नीतीश की बदली रणनीति प्रशासनिक नियंत्रण छोड़कर “संतुलित सत्ता मॉडल” की तरफ बढ़ना शायद नीतीश की गठबंधन टिकाऊ रखने की रणनीति है।

3. 2025–26 के राजनीतिक समीकरणों की नींवआगामी चुनावों के लिए यह मंत्रिमंडल बंटवारा शक्ति संतुलन का शुरुआती संकेत है। भाजपा अब केवल सहयोगी नहीं—बल्कि बराबरी का रणनीतिक भागीदार दिख रही है।

4. जेडीयू की भूमिका पर सवाल जेडीयू मंत्रियों के विभाग घोषित न होने से यह चर्चा तेज है कि पार्टी अंदरूनी समीकरण साधने में लगी है।

निष्कर्ष

बिहार मंत्रिमंडल का यह बंटवारा सिर्फ विभागों का वितरण नहीं है—यह बिहार की आने वाली राजनीति,गठबंधन की आंतरिक संरचना,और नीतीश कुमार की बदलती सियासी प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत है।सम्राट चौधरी को गृह विभाग देकर भाजपा को एक तरह से “सत्ता की चाबी” सौंप दी गई है।

अब निगाहें इस बात पर होंगी कि जेडीयू को कौन-कौन से विभाग मिलते हैं और यह गठबंधन आगे किस दिशा में बढ़ता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *