बी के झा
NSK


पटना/गोपालगंज/मोतिहारी, 10 मई
बिहार में अपराध की दो दिल दहला देने वाली घटनाओं ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था, सामाजिक पतन और अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ गोपालगंज में खेत के किनारे 15 वर्षीय अज्ञात किशोरी का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई, तो दूसरी ओर पूर्वी चंपारण में एक युवक की जिस बर्बरता से हत्या की गई, उसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया।इन दोनों घटनाओं ने न केवल पुलिस प्रशासन को चुनौती दी है, बल्कि समाज के भीतर पनप रही हिंसक मानसिकता और सामाजिक विघटन को भी उजागर कर दिया है। गांवों से लेकर शहरों तक लोग भय, गुस्से और असुरक्षा की भावना से घिरे दिखाई दे रहे हैं।
गोपालगंज में खेत से मिली किशोरी की लाश, पांच जिलों की पुलिस पहचान में जुटी
गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के गम्हारी दियारा इलाके में रविवार की सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब सड़क किनारे खेत में एक किशोरी का शव पड़ा मिला। ग्रामीणों ने जैसे ही शव देखा, पूरे इलाके में खबर आग की तरह फैल गई। देखते ही देखते घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई।मृतका की उम्र लगभग 15 वर्ष बताई जा रही है। शव की स्थिति देखकर स्थानीय लोगों की रूह कांप उठी। पुलिस के अनुसार, किशोरी के नाक से झाग निकल रहा था और हाथ-पैर अकड़े हुए थे, जिससे प्रथम दृष्टया जहर देकर हत्या किए जाने की आशंका गहरा गई है।
सदर-2 एसडीपीओ राजेश कुमार एफएसएल टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में पुलिस को संदेह है कि हत्या कहीं और की गई और पहचान छिपाने के लिए शव को रात के अंधेरे में खेत में फेंक दिया गया।
दुष्कर्म, जहर और प्रेम प्रसंग—हर एंगल पर जांच
पुलिस इस मामले को बेहद संवेदनशील मानते हुए कई बिंदुओं पर जांच कर रही है।
क्या किशोरी के साथ दुष्कर्म हुआ?
क्या उसे जहर देकर मारा गया?
क्या मामला प्रेम प्रसंग या सामाजिक दबाव से जुड़ा है?
इन सभी पहलुओं पर गहन छानबीन की जा रही है।पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जो इस रहस्य से पर्दा उठा सकती है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मृतका की पहचान बनी हुई है।गोपालगंज पुलिस ने किशोरी की तस्वीर सारण, सिवान, मुजफ्फरपुर और मोतिहारी समेत पांच जिलों की पुलिस को भेजी है। टेक्निकल सेल और टावर डंप की मदद से सुराग जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।
पूर्वी चंपारण में क्रूरता की सारी हदें पार
इधर पूर्वी चंपारण के हरसिद्धि थाना क्षेत्र में सामने आई घटना ने पूरे बिहार को स्तब्ध कर दिया।25 वर्षीय अजय कुमार की जिस अमानवीय तरीके से हत्या की गई, उसने अपराध की भयावह तस्वीर सामने रख दी। हत्यारों ने पहले युवक की आंखें फोड़ दीं, फिर उसका गुप्तांग काट डाला और बाद में शव को फंदे से लटका दिया।यह दृश्य इतना वीभत्स था कि घटनास्थल पर पहुंचे लोगों की आंखें नम हो गईं।
गांव में मातम और दहशत दोनों का माहौल है।परिजनों के अनुसार, अजय पंजाब के लुधियाना में मजदूरी करता था और महज दो दिन पहले ही घर लौटा था। शुक्रवार की रात वह गांव में चल रहे ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम को देखने गया था, लेकिन फिर वापस नहीं लौटा। अगले दिन सुबह उसका शव घर से करीब 200 मीटर दूर नहर किनारे बथान में फंदे से लटका मिला।
वायरल वीडियो और प्रेम प्रसंग बना जांच का केंद्र
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, दो महीने पहले अजय का एक महिला के साथ कथित वीडियो वायरल हुआ था। अब पुलिस को शक है कि हत्या का संबंध उसी विवाद से हो सकता है।डीएसपी रवि कुमार ने भी प्रेम प्रसंग के एंगल से जांच की पुष्टि की है। पुलिस ने एक महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।हालांकि पुलिस अधिकारी अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि सभी पहलुओं की वैज्ञानिक जांच की जा रही है।
राजनीतिक गलियारों में फिर गरमाया कानून-व्यवस्था का मुद्दा
इन दोनों घटनाओं ने बिहार की राजनीति में भी हलचल तेज कर दी है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर अपराध नियंत्रण में विफल रहने का आरोप लगाया है।
विपक्ष के नेताओं का कहना है कि बिहार में अपराधियों के मन से कानून का भय समाप्त हो चुका है।एक वरिष्ठ विपक्षी नेता ने कहा—“जब बेटियां खेतों में मृत मिलें और युवकों की इस तरह निर्मम हत्या हो, तो यह केवल अपराध नहीं बल्कि प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है।”
सत्तापक्ष के नेताओं का कहना है कि पुलिस तेजी से कार्रवाई कर रही है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
कानूनविदों की राय: “ऐसे अपराध समाज की मानसिक विकृति दर्शाते हैं”
पटना हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अजय सिन्हा कहते हैं—“पूर्वी चंपारण की घटना सामान्य हत्या नहीं, बल्कि विकृत मानसिकता और प्रतिशोध की चरम अभिव्यक्ति लगती है। ऐसे मामलों में केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं, बल्कि त्वरित न्याय जरूरी है।
”वहीं आपराधिक मनोविज्ञान के विशेषज्ञ डॉ. संजीव रंजन का कहना है—“जब अपराधी शरीर को क्षत-विक्षत करते हैं, तो उसका उद्देश्य केवल हत्या नहीं बल्कि भय और अपमान का संदेश देना होता है। यह समाज में बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति का संकेत है।”
शिक्षाविदों और समाजसेवियों की चिंता
शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इन घटनाओं को सामाजिक विघटन और नैतिक पतन का परिणाम बताया है।गोपालगंज के समाजसेवी अशोक तिवारी कहते हैं—“आज गांवों में भी मोबाइल, सोशल मीडिया और निजी रिश्तों को लेकर तनाव तेजी से बढ़ा है, लेकिन सामाजिक संवाद और नैतिक नियंत्रण कमजोर हो रहा है। इसका परिणाम हिंसा के रूप में सामने आ रहा है।
”महिला अधिकार कार्यकर्ता रंजना कुमारी ने कहा—“यदि गोपालगंज की किशोरी के साथ दुष्कर्म की पुष्टि होती है, तो यह बेहद चिंताजनक होगा। बिहार में महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा अब सबसे बड़ा प्रश्न बनती जा रही है।”
गांवों में डर, लोगों में गुस्सा
दोनों घटनाओं के बाद ग्रामीण इलाकों में भय का माहौल है।लोगों का कहना है कि पहले इस तरह की बर्बर घटनाएं बड़े शहरों तक सीमित मानी जाती थीं, लेकिन अब गांवों में भी अपराध का स्वरूप बेहद हिंसक हो गया है।
पूर्वी चंपारण के एक बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा—“पहले दुश्मनी होती थी तो लोग लड़ लेते थे, लेकिन अब जिस तरह आंख फोड़ना, अंग काटना जैसी घटनाएं हो रही हैं, उससे लगता है इंसानियत खत्म होती जा रही है।”
बड़ा सवाल:
क्या बिहार में अपराध का स्वरूप बदल रहा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में अपराध अब केवल आर्थिक या राजनीतिक नहीं रह गया है।अब निजी संबंध, सोशल मीडिया विवाद, प्रेम प्रसंग, सामाजिक अपमान और मानसिक प्रतिशोध अपराधों के नए कारण बनते जा रहे हैं।इन घटनाओं ने पुलिस व्यवस्था के साथ-साथ समाज की सामूहिक चेतना पर भी सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल गोपालगंज की अज्ञात किशोरी और पूर्वी चंपारण के अजय कुमार—दोनों मामलों में लोग केवल एक ही मांग कर रहे हैं—
दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और ऐसी सजा, जो समाज में यह संदेश दे कि कानून अब भी जिंदा है।
