बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना पर सख्ती बढ़ते आवेदनों के बीच निजी शिक्षण संस्थानों की जमीनी जांच, सियासत गरमाई

बी के झा

NSK

पटना / न ई दिल्ली, 31 जनवरी

बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह है—आवेदनों की असामान्य बढ़ोतरी और इसके पीछे संभावित अनियमितताओं की आशंका। शिक्षा विभाग ने योजना के तहत सबसे अधिक आवेदन वाले 15 निजी शिक्षण संस्थानों की भौतिक एवं स्थलीय जांच का आदेश देकर साफ संकेत दिया है कि अब केवल कागज़ी भरोसे पर काम नहीं चलेगा।शिक्षा विभाग का यह कदम ऐसे समय आया है जब योजना के तहत निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक आवेदन सामने आए हैं, जिससे सरकार और प्रशासन दोनों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

लक्ष्य से आगे निकले आवेदन, बढ़ी प्रशासनिक चिंता

बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के प्रभारी पदाधिकारी नसीम अहमद द्वारा जिला शिक्षा पदाधिकारियों को भेजे गए पत्र के अनुसार—शैक्षणिक सत्र 2024–25 मेंलक्ष्य: 85,000प्राप्त आवेदन: 99,357शैक्षणिक सत्र 2025–26 (27 जनवरी तक)लक्ष्य: 95,220प्राप्त आवेदन: 1,15,423शिक्षा विभाग की आंतरिक समीक्षा में पाया गया कि लगभग सभी निजी शिक्षण संस्थानों में पिछले वर्षों की तुलना में आवेदन अचानक बढ़े हैं। यही वजह है कि अब सरकार ने इसे व्यवस्थित जांच की श्रेणी में डाल दिया है।

किन जिलों और संस्थानों पर सबसे पहले गिरेगी नजर

पहले चरण में पटना,

वैशाली,

मुजफ्फरपुर,

मधुबनी,

रोहतास

और औरंगाबाद के कुल 15 निजी शिक्षण संस्थानों की जांच के आदेश दिए गए हैं।

पटना मगध प्रोफेशनल इंस्टीट्यूटऑक्सफोर्ड कॉलेज ऑफ रिसर्च एंड मैनेजमेंट

चैतन्य कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी

आरएस विद्यापीठ

एबीसी कॉलेज ऑफ एजुकेशन

नोवा मैनेजमेंट कॉलेज

हिमालया कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल एजुकेशन (पालीगंज)

अन्य : एमपीएस कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन,

शिवी कॉलेज वैशाली: श्री उमेश मिश्रा रणजीत कुमार प्रकाश कॉलेज,

इंदु देवी रणजीत कुमार प्रकाश प्रोफेशनल कॉलेज,

डॉ. रणजीत कुमार प्रकाश कॉलेज मधुबनी:

संदीप यूनिवर्सिटीऔरंगाबाद:

सितयोग इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रोहतास:

गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय

कैसी होगी जांच?

सिर्फ फाइल नहीं, ज़मीन पर उतरेगी कमेटी

शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि यह जांच केवल कागज़ी औपचारिकता नहीं होगी। इसके लिए एक तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है—समिति में शामिल जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (योजना एवं लेखा) – अध्यक्षजिला निबंधन सह परामर्श केंद्र प्रबंधक – सदस्यबिहार राज्य वित्त निगम के सहायक प्रबंधक – सदस्यइस समिति को एक पखवाड़े के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी।

जांच के मुख्य बिंदु

संस्थान का संबंधन और सरकारी अनुमति पाठ्यक्रमों की वैधता नामांकन और उपस्थिति विवरण पिछले दो वर्षों की शुल्क संरचना कक्षाएं, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, कंप्यूटर लैब, सेमिनार हॉल की जियो-टैग्ड तस्वीरें स्थायी और अस्थायी शिक्षकों की योग्यता छात्रों से सीधा फीडबैक

शिक्षाविदों की राय: “योजना नेक, क्रियान्वयन संदिग्ध”

वरिष्ठ शिक्षाविदों का मानना है कि—“स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना गरीब और मध्यम वर्गीय छात्रों के लिए वरदान है, लेकिन निजी शिक्षण संस्थानों की बेलगाम भूमिका ने इसकी साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।”उनका कहना है कि कई संस्थान केवल लोन के भरोसे नामांकन बढ़ा रहे हैं, न कि शिक्षा की गुणवत्ता के आधार पर।

कानूनविदों की चेतावनी: दोषी पाए गए तो रद्द हो सकता है संबंधन

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि जांच में—फर्जी नामांकन उपस्थिति में गड़बड़ीया शुल्क में अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित संस्थानों का संबंधन रद्द, लोन वसूली और आपराधिक कार्रवाई तक संभव है।

विपक्ष का तीखा हमला: “पहले लूट, फिर जांच का नाटक”

विपक्षी दलों ने सरकार पर सीधा हमला बोला है। एक वरिष्ठ विपक्षी नेता ने तंज कसते हुए कहा—“पहले सरकार निजी कॉलेजों को खुली छूट देती है, फिर जब मामला उजागर होता है तो जांच के नाम पर नौटंकी करती है। यह भ्रष्टाचार छुपाने की कोशिश है।

”विपक्ष का आरोप है कि यदि समय रहते निगरानी होती, तो आज इतनी बड़ी संख्या में संदिग्ध आवेदन सामने नहीं आते।

राजनीतिक विश्लेषण: सख्ती या मजबूरी?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम—बढ़ते सार्वजनिक दबाव मीडिया रिपोर्ट्सऔर चुनावी माहौल का परिणाम है। सरकार अब यह संदेश देना चाहती है कि वह शिक्षा और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर गंभीर है।

निष्कर्ष:

छात्र हित बनाम सिस्टम की साख

बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का भविष्य अब इस जांच रिपोर्ट पर काफी हद तक निर्भर करेगा।यदि गड़बड़ियां सामने आती हैं, तो यह केवल कुछ संस्थानों पर कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता की परीक्षा होगी।

सरकार के लिए चुनौती साफ है—छात्रों के भविष्य की रक्षा भी करनी है और व्यवस्था की सफाई भी।

अब देखना यह है कि यह जांच वास्तविक सुधार का रास्ता खोलती है या फिर कागज़ों में सिमटकर रह जाती है।

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