बुलडोजर ने घर गिराया, इंसानियत ने उठाया—हिंदू पड़ोसी ने मुसलमान पत्रकार को दिया प्लॉट, बोला: “भाई है… टूटा नहीं रहने दूंगा”

बी के झा

नई दिल्ली/जम्मू , 29 नवंबर

जम्मू-कश्मीर की राजनीति और प्रशासनिक टकराव के बीच एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे देश का दिल जीत लिया। एक ओर जहाँ बुलडोजर कार्रवाई ने विवाद और तनाव पैदा किया, वहीं दूसरी ओर एक हिंदू पड़ोसी द्वारा अपने मुस्लिम पत्रकार दोस्त के लिए आगे बढ़कर मानवता और भाईचारे का जो परिचय दिया, वह भारत की असली पहचान को फिर से सामने लाता है।40 साल पुराना घर पलभर में मलबा… पत्रकार बेघरजम्मू डिवेलपमेंट अथॉरिटी ने पिछले दिनों स्थानीय पत्रकार अराफाज अहमद दैंग के घर पर बुलडोजर चला दिया। कार्रवाई सुबह-सुबह शुरू हुई और बड़ी संख्या में पुलिसबल तैनात कर दिया गया। दैंग ने आरोप लगाया कि उन्हें न कोई नोटिस मिला, न ही अपनी बात रखने का मौका।उन्होंने कहा,“यह घर 40 साल पुराना था। मेरे पिता ने बनाया था। पिछले साल भी एक घर ढहा दिया गया था। इस बार कम से कम मुझे सुन तो लिया जाता। यह तानाशाही है।”

दैंग एक स्थानीय न्यूज पोर्टल चलाते थे और सरकारी डिमोलिशन ड्राइव पर लगातार रिपोर्टिंग कर रहे थे।राजनीतिक गलियारे में गरमाई चर्चा

यह घटना राजनीतिक गलियारों में भी बड़ा मुद्दा बन गई। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना पत्रकार के परिवार से मिले और खुले शब्दों में कहा—“हमारे प्रधानमंत्री लोगों को घर देने में विश्वास करते हैं… यह कैसी सरकार है जो लोगों के घर उजाड़ रही है?

”वहीं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुलडोजर कार्रवाई को सीधे “साजिश” करार दिया। उन्होंने कहा—“यह चुनी हुई सरकार को बदनाम करने की कोशिश है। उपराज्यपाल द्वारा नियुक्त अधिकारी ही ये कार्रवाई कर रहे हैं।”उधर प्रशासन इस पर चुप है, लेकिन सोशल मीडिया में तूफान बरकरार है।

सोशल मीडिया भावुक: “

घर गिरा, पर इंसानियत की दीवार मज़बूत हुई”

सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें देखा गया कि पुलिस दैंग को खींचकर दूर ले जा रही है। कई लोग इसे तानाशाही कार्रवाई बता रहे हैं।लेकिन इसी शोर में एक ऐसी खबर आई जिसने देश भर में उम्मीद की लौ जलाई।

कुलदीप शर्मा—हिंदू पड़ोसी, जिसने देश को फिर एकता का पाठ पढ़ाया जब दैंग का घर गिरा, उनके हिंदू पड़ोसी कुलदीप शर्मा तुरंत आगे आए। उन्होंने न केवल सहानुभूति जताई, बल्कि अपने दिल और जेब—दोनों खोल दिए।उनका बयान पूरे देश में सुर्खियों में है—

“मैं अपने भाई को टूटने नहीं दूंगा।उन्होंने 3 मारला का घर गिराया… मैं 5 मारला का प्लॉट देता हूँ।घर भी मैं ही बनवाऊंगा।”उनकी यह बात सुनकर मौजूद लोग भावुक हो गए।

शर्मा ने कहा—“हम 20 साल से पड़ोसी हैं… इंसानियत सबसे पहले है, धर्म बाद में।”

हिंदू-मुस्लिम सौहार्द का वह दृश्य जिसने भारत की तस्वीर बदल दी जिस वक्त प्रशासन बुलडोजर चला रहा था, उसी समय शर्मा ने दैंग के परिवार को अपने घर में आश्रय दिया।लोग कह रहे हैं—“बुलडोजर ने घर गिराया,पर कुलदीप शर्मा ने भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब बचा ली।”देशभर में उदाहरण बना यह रिश्ता

राजनीतिक तनाव के बीच यह घटना देश भर में एकता का नया प्रतीक बनी है।जहाँ एक तरफ सरकार और प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम नागरिकों ने दिखा दिया कि—

भारत की आत्मा अभी भी ज़िंदा है…जहाँ इंसानियत की कीमत धर्म से कहीं ऊपर है।

निष्कर्ष:

एक बुलडोजर—दो कहानियाँ1. पहली कहानी प्रशासनिक कार्रवाई की है, जिसमें एक पत्रकार का घर बिना नोटिस ढहाया गया।2. दूसरी कहानी इंसानियत, प्रेम और भाईचारे की है—

जहाँ एक हिंदू ने मुस्लिम भाई के लिए अपना द्वार, अपना दिल और अपनी जमीन खोल दी

NSK News

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