बी के झा
कोलकाता , 1 मई
मतगणना से पहले तनाव चरम परपश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना से ठीक पहले भवानीपुर का स्ट्रॉन्ग रूम सियासी टकराव का केंद्र बन गया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का खुद मौके पर पहुंचना, EVM में कथित छेड़छाड़ के आरोप, और बाहर TMC-BJP समर्थकों के बीच झड़प—इन सबने चुनावी माहौल को और विस्फोटक बना दिया है।दक्षिण कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल में बने स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर जो दृश्य सामने आए, उन्होंने यह साफ कर दिया कि बंगाल में इस बार “नतीजों से पहले ही नैरेटिव की लड़ाई” अपने चरम पर है।
ममता का दौरा: “निरीक्षण या अविश्वास का संकेत?”
भारी बारिश के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का स्ट्रॉन्ग रूम पहुंचना एक असाधारण राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।TMC का कहना है कि एक उम्मीदवार के तौर पर उन्हें निरीक्षण का अधिकार है, और वही उन्होंने किया।लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम सिर्फ औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि “सिस्टम पर अविश्वास का सार्वजनिक प्रदर्शन” भी है—जो समर्थकों को यह संकेत देता है कि पार्टी हर स्तर पर सतर्क है।
स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर बवाल: आरोप-प्रत्यारोप और झड़पें
स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब चौरंगी इलाके में TMC और BJP समर्थक आमने-सामने आ गए।BJP ने TMC कार्यकर्ताओं पर मारपीट और डराने-धमकाने के आरोप लगाएTMC ने पलटवार करते हुए EVM में गड़बड़ी और सूचना छुपाने का आरोप लगायासुरक्षा बलों को बीच-बचाव करना पड़ा, जिससे हालात किसी तरह काबू में आए।BJP उम्मीदवार पूर्णिमा चक्रवर्ती का तीखा बयान—“4 मई के बाद जनता जवाब देगी”—इस टकराव को और राजनीतिक धार देता है।
TMC के आरोप: “सूचना छुपाई गई, प्रक्रिया संदिग्ध
”कुणाल घोष और शशि पांजा ने आरोप लगाया कि:स्ट्रॉन्ग रूम खोलने की सूचना समय पर नहीं दी गईपोस्टल बैलेट प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता नहीं थीकुछ गतिविधियां संदिग्ध तरीके से की गईंTMC का तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया जितनी संवेदनशील होती है, उतनी ही पारदर्शिता भी जरूरी है—और यही सवाल वे उठा रहे हैं।
चुनाव आयोग का जवाब: “हर प्रक्रिया नियमों के तहत
”चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया:सभी EVM उम्मीदवारों और एजेंट्स की मौजूदगी में सील की गईंपोस्टल बैलेट के लिए अलग स्ट्रॉन्ग रूम हैईमेल के जरिए सभी को पहले ही सूचना दी गई थीCCTV और ऑब्जर्वर की निगरानी में हर प्रक्रिया हुईआयोग ने दो टूक कहा—“किसी भी तरह की छेड़छाड़ संभव नहीं है।”
हाई कोर्ट का झटका: “चुनाव आयोग के फैसले वैध”
इस बीच कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी TMC को बड़ा झटका दिया।मतगणना केंद्र बदलने के खिलाफ याचिका खारिजअदालत ने चुनाव आयोग के अधिकार को वैध ठहरायाकहा—कोई गैर-कानूनी पहलू नहींकानूनविदों के अनुसार, यह फैसला स्पष्ट करता है कि “चुनावी प्रक्रिया में न्यायिक हस्तक्षेप सीमित और तथ्य-आधारित होना चाहिए।”
विश्लेषण: “नैरेटिव की लड़ाई बनाम संस्थागत भरोसा”
राजनीतिक विश्लेषकों और शिक्षाविदों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम तीन स्तरों पर चल रहा है:राजनीतिक नैरेटिव: हार या जीत से पहले ही माहौल बनानासंस्थागत परीक्षा: चुनाव आयोग और न्यायपालिका की विश्वसनीयताजनमानस पर प्रभाव: समर्थकों के बीच विश्वास या संदेह पैदा करनाविशेषज्ञों का कहना है कि “आज की राजनीति में चुनाव सिर्फ वोटिंग तक सीमित नहीं, बल्कि ‘परसेप्शन मैनेजमेंट’ का खेल भी बन चुका है।”
विपक्ष की प्रतिक्रिया: “डर बनाम ड्रामा”
BJP: TMC पर “हार के डर में अफवाह फैलाने” का आरोपवाम दल और कांग्रेस: पारदर्शिता की मांग, लेकिन हिंसा और टकराव पर चिंताइससे साफ है कि विपक्ष खुद भी इस मुद्दे पर पूरी तरह एकमत नहीं है।
नई सुरक्षा व्यवस्था: QR कोड और सख्त निगरानी
चुनाव आयोग ने मतगणना से पहले सुरक्षा को और मजबूत करते हुए:QR कोड आधारित पहचान प्रणाली लागू कीअनधिकृत प्रवेश रोकने के लिए सख्त प्रोटोकॉल बनाएयह कदम इस बात का संकेत है कि आयोग किसी भी विवाद की गुंजाइश को न्यूनतम करना चाहता है।
निष्कर्ष:
बंगाल में लोकतंत्र की ‘लिटमस टेस्ट
’भवानीपुर का यह घटनाक्रम सिर्फ एक सीट या एक पार्टी का विवाद नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की उस संवेदनशील स्थिति को दर्शाता है जहां:राजनीति आरोप लगाती हैसंस्थाएं जवाब देती हैंऔर जनता अंतिम फैसला सुनाती है
अंतिम शब्द:
4 मई को मतगणना के नतीजे सिर्फ सरकार तय नहीं करेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि—
क्या यह सियासी बवाल “हकीकत” था या “रणनीतिक शोर”?
NSK




