मदनी का ‘जिहाद’ बयान—भोपाल से उठा तूफ़ान, हिंदू संगठनों और राजनीतिक हलकों में भारी नाराज़गी; सुप्रीम कोर्ट पर सवाल से तनाव और बढ़ा

बी के झा

NSK

नई दिल्ली/ भोपाल, 29 नवंबर

भोपाल की धरती पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने एक बार फिर ऐसा बयान दे दिया जिसने राष्ट्रीय राजनीति और धार्मिक संगठनों में तीखी प्रतिक्रियाओं का तूफ़ान खड़ा कर दिया है।

मदनी ने कहा—“जहां जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा। अदालतें भी सरकार के दबाव में फैसले दे रही हैं। बाबरी और तलाक के मामलों में अल्पसंख्यक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।”उनके इस बयान ने न केवल हिंदू संगठनों बल्कि केंद्र सरकार और राजनीतिक विश्लेषकों तक में गंभीर चिंता पैदा की है।

जिहाद पर भड़काऊ टिप्पणी

भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में मदनी ने कहा—“जिहाद को मीडिया और सरकार गलत तरीके से पेश करता है। जिहाद पवित्र था और रहेगा। जहां भी जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा।”उन्होंने आगे कहा—“भारत सेक्युलर देश है, यहां मुसलमान संविधान के वफादार हैं। लेकिन अगर सरकार नागरिकों के अधिकारों की रक्षा नहीं करती, तो फिर जिम्मेदारी उसकी है।

”सुप्रीम कोर्ट पर गंभीर आरोप

सर्वोच्च न्यायालय को लेकर मदनी ने बेहद विवादित टिप्पणी की—“सुप्रीम कोर्ट उसी दिन तक सुप्रीम है, जब तक वह संविधान की हिफाजत करे। अगर नहीं, तो नैतिक रूप से भी सुप्रीम कहलाने का हक नहीं।”उनके इस बयान ने राजनीतिक और संवैधानिक हलकों में बड़ी चिंता पैदा की है, क्योंकि इससे अदालत की निष्पक्षता पर सीधा सवाल उठता है।

हिंदू संगठनों का पलटवार:

“मदनी देश को उकसा रहे हैं”विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने मदनी को आड़े हाथों लेते हुए कहा—“जिहाद के नाम पर देश को धमकाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ये वही सोच है जिसने अतीत में दंगे और आतंकी हमले पैदा किए। मदनी जैसे लोग समाज में जहर घोलने का काम कर रहे हैं।”एक प्रमुख धर्मगुरु ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा—“

मदनी को बताना चाहिए—क्या लालकिले पर निर्दोषों की हत्या जिहाद था?

क्या अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पकड़ा गया आतंकी नेटवर्क जिहाद था?

भारत में कानून सर्वोपरि है, मदनी की धमकी वाली भाषा नहीं।

”बीजेपी का हमला:

“बिहार चुनाव से घबराई मौलाना ब्रिगेड”बीजेपी नेता ने कटाक्ष करते हुए कहा—“बिहार चुनाव के बाद ‘मौलाना ब्रिगेड’ परेशान है। हिंदू समाज के एकजुट होने से इन कट्टरपंथी नेताओं की जमीन खिसकने लगी है। इसलिए अब सुप्रीम कोर्ट से लेकर सरकार तक पर आरोप लगाए जा रहे हैं।

”उन्होंने कहा—“भारत में कोई धर्म विशेष की सरकार नहीं है। हिंदू समाज अब पहले जैसा बंटा हुआ नहीं है। ऐसे बयानों के पीछे साफ राजनीतिक मंशा दिखती है—डर फैलाना और समुदायों को भड़काना।

”केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया:

“अदालत और संविधान पर प्रश्न उठाना अस्वीकार्य

”सरकारी सूत्रों ने कड़े शब्दों में कहा—“सुप्रीम कोर्ट को राजनीति में घसीटना बेहद गंभीर और गैर जिम्मेदाराना है। ऐसे बयान कानून और व्यवस्था को चुनौती देने जैसे हैं। सरकार न तो किसी धर्म के दबाव में काम करती है, न किसी कट्टरपंथी संस्था के।

”राजनीतिक विश्लेषकों की चेतावनी:

“देश को आग में झोंकने की कोशिश”एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने टिप्पणी की—“मदनी के बयान सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से लक्षित हैं। जिहाद जैसे शब्द का उपयोग कर वह देश के माहौल को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। यह बेहद खतरनाक संकेत है।”उन्होंने कहा—“मदनी को यह भी बताना चाहिए—

क्या न्यायपालिका पर आरोप लगाने से पहले उनके पास सबूत हैं?

या यह सिर्फ राजनीति है ताकि मुस्लिम वोटों को भावनात्मक रूप से उकसाकर अपने पक्ष में किया जा सके?”निष्कर्ष:मौलाना महमूद मदनी के बयान ने एक बार फिर दिखा दिया है कि 2025 की राजनीतिक जमीन बेहद संवेदनशील और ध्रुवीकृत है। जिहाद और सुप्रीम कोर्ट जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बयानबाजी न सिर्फ विवाद को जन्म दे रही है, बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी चुनौती दे रही है।

हिंदू संगठनों, धर्मगुरुओं, राजनीतिक दलों और संवैधानिक संस्थाओं ने साफ कर दिया है कि देश को धार्मिक तनाव की आग में झोंकने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जयेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *