बी के झा
NSK

अनूपपुर ( मध्यप्रदेश )/ नई दिल्ली , 26 अक्टूबर
मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। कानून के रक्षक पर ही कानून तोड़ने वालों ने हमला कर दिया।
अनूपपुर जिले के भालूमाडा क्षेत्र में शुक्रवार की आधी रात अज्ञात हमलावरों ने न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) अमनदीप सिंह चावड़ा के सरकारी आवास पर पथराव किया, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और उन्हें व उनके परिवार को गालियां देकर जान से मारने की धमकी दी।
यह घटना न केवल प्रशासनिक तंत्र की नाकामी को उजागर करती है, बल्कि इसने न्यायपालिका की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
आधी रात दहशत का मंजर — जब पत्थरों ने तोड़ा सन्नाटा पुलिस अधीक्षक मोतीउर रहमान ने बताया कि यह वारदात शुक्रवार देर रात करीब 12:30 बजे हुई। जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर भालूमाडा कस्बे में स्थित सरकारी आवास पर न्यायिक मजिस्ट्रेट अमनदीप सिंह चावड़ा अपने परिवार संग सो रहे थे।इसी दौरान कुछ अज्ञात लोग आवास के बाहर पहुंचे, गालियां देने लगे और देखते ही देखते पथराव शुरू कर दिया।
हमलावरों ने आवास के गेट पर लगे लैंप, लोहे के फिक्स्चर और आंगन के अन्य सामान को तोड़ डाला।जब न्यायिक अधिकारी बाहर निकले तो हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। इस दौरान उन्होंने परिवार को भी धमकाया कि “अगली बार जान से मार देंगे।”
जज की शिकायत पर दर्ज हुई गंभीर धाराएं घटना
के बाद मजिस्ट्रेट अमनदीप सिंह चावड़ा ने भालूमाडा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल एक्शन लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
इनमें शामिल हैं —धारा 224: लोक सेवक को चोट पहुंचाने की धमकीधारा 296: अश्लील कृत्य और अभद्र भाषा का प्रयोगधारा 324: संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की शरारत धारा 331(6): घर में घुसकर तोड़फोड़धारा 333: चोट पहुंचाने की तैयारी के साथ घर में प्रवेशधारा 351(3): जान से मारने की धमकी या आग से संपत्ति नष्ट करना
पुलिस का कहना है कि वे इस दिशा में भी जांच कर रहे हैं कि क्या यह हमला किसी हालिया न्यायिक आदेश से जुड़ा हुआ है, जिसमें मजिस्ट्रेट ने किसी आरोपी की जमानत याचिका को खारिज किया हो।
कांग्रेस का हमला — “जब जज सुरक्षित नहीं, तो जनता कैसे?”घटना के बाद सियासी गलियारों में भी हलचल मच गई है। कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा —यह घटना बताती है कि मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था की हालत चरमरा चुकी है। जब न्यायिक अधिकारी तक सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की कल्पना भी नहीं की जा सकती।”
उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा —मुख्यमंत्री अपने प्रदेश को सुरक्षित नहीं रख पा रहे, मगर बिहार के चुनाव में प्रचार करने पहुंच गए हैं। क्या अब न्यायाधीशों को भी सुरक्षा के लिए आवेदन देना होगा?”
न्यायपालिका की सुरक्षा पर उठे सवाल
घटना के बाद पूरे प्रदेश में यह चर्चा गर्म है कि न्यायिक अधिकारी, जो आम नागरिकों को न्याय दिलाने के लिए दिन-रात काम करते हैं, अगर वही असुरक्षित हैं, तो आम इंसान की सुरक्षा किस भरोसे पर टिकी है?कानून के जानकारों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि यह राज्य के प्रशासनिक ढांचे की गंभीर कमजोरी को भी उजागर करती हैं।
पुलिस की कार्रवाई —
जांच जारी, लेकिन हमलावर अब तक फरार एसपी मोतीउर रहमान ने बताया कि जांच के लिए विशेष टीम गठित कर दी गई है। आसपास के इलाकों में CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और शक के आधार पर कई लोगों से पूछताछ भी की जा रही है।फिर भी, अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।पुलिस इस बात पर भी गौर कर रही है कि हमलावरों को मजिस्ट्रेट के आवास की जानकारी कैसे मिली और क्या इसमें स्थानीय तत्वों की भूमिका थी।
जनता का सवाल — “न्याय पर हमला, क्या ये लोकतंत्र का नया चेहरा?”भालूमाडा के स्थानीय लोगों में दहशत है। उनका कहना है कि अगर जज तक को धमकाया जा सकता है, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
एक स्थानीय शिक्षक ने कहा —यह सिर्फ एक मजिस्ट्रेट पर हमला नहीं, न्याय की आत्मा पर प्रहार है।
संवेदनशील समय में गंभीर संकेत
चुनावी मौसम में यह घटना प्रदेश सरकार की प्रशासनिक दक्षता पर सवाल खड़े कर रही है।
कानून-व्यवस्था पर विपक्ष के हमले तेज हैं और अब जनता भी यह जानना चाहती है कि न्याय की रक्षा करने वाले खुद कब तक असुरक्षित रहेंगे?
