मिथिलांचल की गौरवभूमि दरभंगा: जहाँ समरसता की परंपरा को राजनीति ने अस्थिरता के मोड़ पर पहुँचा दिया?

बी के झा

दरभंगा, मिथिलांचल , 6 नवंबर

प्राचीन मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी और ज्ञान–परंपरा की धड़कन माने जाने वाले दरभंगा की पहचान कभी अपने सुशासन, सामाजिक सौहार्द और उच्च कोटि की सांस्कृतिक विरासत से होती थी।

महाराजा धीरज महाराज नरेंद्र सिंह और बाद में महाराज कामेश्वर सिंह के शासनकाल में मिथिला का यह क्षेत्र गंगा से लेकर कोसी और उत्तर में नेपाल की सीमा तक फैला विशाल और शांतिपूर्ण राज था।

महाराजाओं की नीतियों में धर्म, जाति या संप्रदाय के आधार पर भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं थी।

सामाजिक समरसता की मिसाल थी—

वही दरभंगा जहाँ महाराज कामेश्वर सिंह ने सांप्रदायिक एकता को सम्मान देते हुए शहर का नाम भी “दरभंगी मियां” के नाम पर रखा था।

लेकिन स्थानीय बुद्धिजीवियों के अनुसार वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य ने इस शांत शहर को “अस्थिरता और विभाजन की राजनीति” की चपेट में ला दिया है।

स्थानीय बुद्धिजीवी बोले—“

शांत मिथिलांचल को राजनीति ने संप्रदायिकता की ओर धकेल दिया”

दरभंगा के एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक दलों द्वारा मिथिलांचल की सांस्कृतिक विरासत से खिलवाड़ किया गया है।

उनके अनुसार—आज के राजनीतिक माहौल ने दरभंगा की वह पहचान मिटा दी है जो इसे शांति और संस्कृति का केंद्र बनाती थी। कुछ नेता वोट बैंक के लिए संप्रदायिक भावनाओं को भड़का रहे हैं, जिससे समाज का विश्वास तंत्र टूट रहा है।उन्होंने विशेष रूप से बीजेपी नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण कर समाज में अविश्वास बढ़ाया गया है।

युवा पीढ़ी की नाराज़गी—

“वर्तमान विधायक के कार्यकाल में दरभंगा गुंडागर्दी का केंद्र बना”

शहर के युवा राघव झा ने भी स्थिति पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा—

बीजेपी विधायक के शासनकाल में दरभंगा में संप्रदायिक तनाव और गुंडागर्दी बढ़ी है। यह वह शहर नहीं रहा जो मिथिला की पहचान था।”युवाओं के बीच इस तरह की चर्चा यह संकेत देती है कि दरभंगा का सामाजिक ताना–बाना राजनीतिक टकरावों से प्रभावित हो रहा है।

जनसुराज उम्मीदवार और पूर्व डीजीपी आर. के. मिश्रा के तीखे आरोप

दरभंगा में चुनावी चर्चाओं के बीच जनसुराज के उम्मीदवार और बिहार के पूर्व डीजीपी श्री आर. के. मिश्रा ने एक स्थानीय यूट्यूबर से बातचीत में कड़ा बयान दिया।राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित रहे मिश्रा अपनी शांत प्रवृत्ति और सौम्य प्रशासनिक छवि के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार वे स्पष्ट रूप से आक्रोशित दिखे।

उन्होंने कहा—

अगर मेरी सरकार बनी तो मैं सबसे पहले दरभंगा को उसकी पुरानी पहचान लौटाऊँगा। घुसपैठियों और गुंडा तत्वों से शहर को मुक्त करूँगा। वर्तमान विधायक और मंत्री संजय पर मैं स्पष्ट तौर पर आरोप लगाता हूँ कि दरभंगा को अशांति और भ्रष्टाचार की ओर धकेलने में उनका हाथ है।

”सियासी जानकारों का मानना है कि आर.के. मिश्रा की छवि और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें “साइलेंट वोटर्स” का समर्थन मिल रहा है, जो बीजेपी के लिए कठिन चुनौती बन सकता है।

दरभंगा की राजनीति—परंपरा, अस्मिता और सुरक्षा के सवालों के बीच झूलती मिथिलांचल का यह ऐतिहासिक शहर जहाँ कभी साहित्य, संगीत, विद्या और कौशल की धारा बहती थी, आज राजनीतिक आरोप–प्रत्यारोप का केंद्र बन गया है।परंपरागत समरसता की भूमि पर संप्रदायिक तनाव और अपराध जैसे मुद्दों का उभार

स्थानीय जनता को गहरी चिंता में डाल रहा है।आने वाले चुनाव में दरभंगा किस दिशा में जाएगा—

सांस्कृतिक विरासत की राह या राजनीतिक ध्रुवीकरण के रास्ते?

यह आने वाला समय और मतदाता ही तय करेंगे।

NSK News

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