बी के झा
NSK

पटना , 20 नवंबर
बिहार के चर्चित बाहुबली नेता और मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह को पटना की विशेष अदालत से बड़ा झटका लगा है। दुलारचंद यादव हत्याकांड से जुड़े मामले में उनकी जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। इससे साफ है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मोकामा वाले विधायक ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह फिलहाल बेऊर जेल में ही रहेंगे, जहां से उन्होंने हालिया विधानसभा चुनाव में छठी बार जीत हासिल की थी।चुनाव प्रचार के दौरान हत्या—
उस दिन मोकामा में क्या हुआ था?
मोकामा विधानसभा के टाल क्षेत्र में 30 अक्टूबर को चुनाव प्रचार के दौरान जन सुराज पार्टी के समर्थक और बाहुबली नेता दुलारचंद यादव की हत्या हो गई थी।वह जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे, तभी उनका काफिला जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह के काफिले से आमने-सामने टकरा गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार—दोनों पक्षों के समर्थकों में तेज झड़प हुई उसके बाद गाली-गलौज बढ़ी मारपीट का रूप लियाऔर अंत में फायरिंग हुई पटना पुलिस के मुताबिक, दुलारचंद यादव के पैर में गोली लगी थी, लेकिन उनकी मौत गोली से नहीं बल्कि ऊपर से किसी भारी चीज के गुजरने से हुई।
परिवार ने आरोप लगाया कि अनंत सिंह और उनके समर्थकों ने गोली मारने के बाद गाड़ी चढ़ाकर दुलारचंद की हत्या की।”यह आरोप मामले को और पेचीदा बनाता है क्योंकि पुलिस अभी भी यह स्पष्ट कर रही है कि यह जानबूझकर हत्या थी या फिर अफरा-तफरी में हुआ एक्सीडेंट।
80 से अधिक गिरफ्तारी, अनंत सिंह भी जेल भेजे गए घटना के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों के लोगों की पहचान की और 80 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया।अनंत सिंह को भी हिरासत में लेकर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
डीजीपी विनय कुमार ने मामला भीड़ की उग्र हिंसा के रूप में बताया—“वहां मौजूद हर एक व्यक्ति संदेह के घेरे में है। जांच में किसी भी संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता।”जेल से ही चुनाव जीते ‘छोटे सरकार’6 नवंबर को मोकामा में मतदान हुआ और 14 नवंबर को नतीजे आए।जेल में रहने के बावजूद अनंत सिंह ने चुनाव में वीणा देवी (आरजेडी) को 28 हजार से अधिक मतों से हराया जन सुराज के पीयूष प्रियदर्शी तीसरे स्थान पर रहे
अनंत सिंह की जीत एक बार फिर दिखाती है कि मोकामा में उनका प्रभाव बरकरार है, भले वे जेल में ही क्यों न हों।
जमानत याचिका खारिज—अभी लंबा चलेगा कानूनी संघर्ष विशेष अदालत ने गुरुवार को जमानत देते हुए कहा कि ऐसे मामले में—गंभीर आरोप,प्रत्यक्षदर्शी बयान,और घटना की परिस्थितियाँ—जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं।इस फैसले के बाद साफ है किअनंत सिंह का कानूनी संघर्ष अब आगे और कठिन होगा, और फिलहाल तो उनकी जेल से बाहर आने की संभावना बहुत कम है।
राजनीतिक हलचल तेज—लेकिन ‘छोटे सरकार’ की पकड़ ढीली नहींजमानत याचिका खारिज होने के बाद भी मोकामा और आसपास के क्षेत्रों में अनंत सिंह का राजनीतिक प्रभाव बना हुआ है।लेकिन दुलारचंद यादव हत्याकांड ने उनके राजनीतिक भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सबकी निगाहें—पुलिस जांच,गवाहियों,और एफएसएल रिपोर्ट—पर टिकी होंगी।
मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि बिहार के चुनावी हिंसा के उस पुराने चेहरे का है, जो बार-बार नए रूप में सामने आता रहता है।
