मोदी, राहुल, खरगे और प्रियंका सब आएंगे बिहार, छठ के बाद चुनावी भोंपू का बढ़ेगा शोर, सियासी दिग्गज करेंगे मतदाताओं पर असर डालने की कोशिश

बी के झा

NSK

पटना / नई दिल्ली , 27 अक्टूबर

छठ महापर्व के बाद बिहार की सियासत में चुनावी तापमान तेजी से बढ़ने वाला है। दीपावली, भैया दूज, चित्रगुप्त पूजा, गोवर्धन पूजा और छठ जैसे त्योहारों के कारण अब तक सियासी दलों की गतिविधियाँ धीमी रहीं, लेकिन मंगलवार दोपहर के बाद जब लोग पर्व की व्यस्तताओं से मुक्त होंगे, तब बिहार का माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंग जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी से लेकर राहुल-प्रियंका तक, सब उतरेंगे मैदान में सत्तापक्ष और विपक्ष –

दोनों ने ही अपने प्रचार अभियान को धार देने की कमर कस ली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 30 अक्टूबर से 7 नवंबर तक बिहार में कई कार्यक्रम तय हो चुके हैं।वहीं कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभाओं की भी रूपरेखा लगभग तैयार है।वामदलों के बड़े नेता भी अलग-अलग जिलों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाले हैं।

उधर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव रोजाना तीन से चार जनसभाएं कर रहे हैं। अब 29 अक्टूबर से इनकी सभाओं की संख्या बढ़कर छह से सात प्रतिदिन तक पहुंचने की उम्मीद है।वहीं, जनसुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर की सभाएँ भी 28 अक्टूबर से लगातार शुरू होंगी।

13 दिनों की सियासी जंग – नेताओं की होगी असली परीक्षाबिहार में पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को होगा और इसका प्रचार 4 नवंबर की शाम थम जाएगा।दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होना है, जिसके लिए प्रचार 9 नवंबर की शाम तक चलेगा।इस तरह छठ पर्व के पारण से लेकर दूसरे चरण के प्रचार थमने तक महज 13 दिन ऐसे होंगे जब पूरा बिहार चुनावी गूंज से भर जाएगा।

एनडीए और इंडिया गठबंधन – दोनों ही इस छोटे से अंतराल में राज्य के हर मतदाता तक पहुंचने की पूरी तैयारी कर रहे हैं।मोदी-योगी की जोड़ी बनाम राहुल-प्रियंका की चुनौती

बिहार के चुनावी रण में इस बार दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, और हिंदुत्व के स्टार प्रचारक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा की ओर से सबसे बड़े चेहरे होंगे।उधर, विपक्ष की तरफ से राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा गांधी, खरगे, और तेजस्वी यादव जनता के बीच अपने तर्क और विचारों से समर्थन जुटाने की कोशिश करेंगे।पर सवाल बड़ा है —

क्या राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी और योगी आदित्यनाथ जैसे जन-प्रभावी नेताओं के सामने अपनी बात दमदार तरीके से रख पाएंगे?

क्या प्रियंका गांधी बिहार की राजनीति में महिला और युवा वोटरों के बीच प्रभाव छोड़ पाएंगी?

विश्लेषकों की राय – “राहुल मनोरंजन बढ़ाएंगे, असर नहीं”

एक राजनीतिक विश्लेषक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा –

महागठबंधन के नेताओं में एक डर साफ दिखता है। जहां मोदी, योगी और शाह अपने तार्किक और सटीक शब्दों से मतदाताओं को प्रभावित करते हैं, वहीं राहुल गांधी अक्सर अपने बड़बोलेपन और बिना तर्क के बयानों से अपनी ही पार्टी को मुश्किल में डाल देते हैं।

उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में जोड़ा –आने वाले चुनाव में परिणाम चाहे जो हो, लेकिन राहुल गांधी के मैदान में उतरने से चुनाव का मनोरंजन ज़रूर बढ़ जाएगा।छठ के बाद बिहार में चुनावी रणभेरी त्योहारों की रौनक अब धीरे-धीरे सियासी भीड़ में बदलने जा रही है।

बिहार के हर जिले में चुनावी जनसभाओं, नारेबाजी और रोड शो का दौर चलेगा।

सियासी गलियारों में अब एक ही चर्चा है —छठ के बाद चढ़ेगा चुनाव का तापमान और गूंजेगा हर गली में एक ही आवाज़ — कौन बनेगा बिहार का बादशाह?

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